जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र की एक झील के उपर आकाश में उड़ती नजर आने वाली रहस्यमयी चमकदार वस्तुओं के बारे में पता लगाने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों का एक दल जल्द ही लेह पहुंचेगा.
वैज्ञानिकों का दल यह पता लगाएगा कि चमकदार वस्तुएं 'चीनी लालटेन' तो नहीं हैं. आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि लेह से 160 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पैंगोंग झील के उपर रहस्यमयी चमकदार वस्तुओं के चीनी लालटेन होने की शुरुआती रिपोर्ट मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां दूसरे संगठन के विशेषज्ञों से आकलन कराना चाहती थीं ताकि इसके बारे में पुष्टि हो सके.
सूत्रों ने कहा कि ऐसे में इसरो से वैज्ञानिकों का एक दल भेजने का आग्रह करने का फैसला किया गया. यह दल उड़ती वस्तुओं की जांच करेगा और फिर अपनी रिपोर्ट देगा. भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने इसी साल अक्तूबर में सरकार को इन रहस्यमयी वस्तुओं के बारे में लिखा था. इसके साथ ही लेह स्थित 14-कोर को सतर्क कर दिया गया था.
लद्दाख क्षेत्र में नजर आने वाली इन वस्तुओं के नजर आने के बाद कई संगठनों के वैज्ञानिकों ने वायुसेना के साथ विचार-विमर्श किया है. वायुसेना के रेडार भी इन वस्तुओं से जुड़ा कोई संकेत हासिल करने में नाकाम रहे. सरकार ने इस तरह की वस्तु को मार गिराने के प्रस्ताव को रद्द कर दिया क्योंकि इस क्षेत्र में आखिरी बार 1962 में चीन के साथ युद्ध के दौरान गोलीबारी हुई थी और इस वस्तु को मार गिराने से तनाव बढ़ सकता है.
यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इसरो के वैज्ञानिक कब इन उड़ती रहस्यमयी वस्तुओं का पता लगाने के लिए लेह पहुंचेंगे. इन दिनों फिर से ये वस्तुएं दिखाई दे रही हैं. सुरक्षा एजेंसियों का इशारा इस ओर भी है कि ‘चीनी लालटेन’ के जरिए यह चीन की सेना का मनोवैज्ञानिक अभियान भी हो सकता है.