सैनिकों की दरियादिली के वजह से एक बेरोजगार शख्स, करीब 1 हजार किलोमीटर पैदल चलने से बच गया. शख्स की नौकरी चली गई थी. इसके बाद उसने पैदल ही अपने शहर जाने का फैसला किया था. 12 दिन में उसने 300 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर ली थी. लेकिन उसके घर तक की कुल दूरी 1350 किमी थी.
ये मामला थाइलैंड का है. thethaiger की रिपोर्ट के मुताबिक, 42 साल के चोई दक्षिणी प्रांत सोंगखला में नौकरी कर रहे थे. लेकिन यहां उन्हें नौकरी नहीं मिल रही थी. इसके बाद वह बीते रविवार को पैदल चलते हुए पथालंग प्रांत पहुंचे. यहां थाई सेना के सैनिकों ने उनकी सहायता की और ट्रेन के टिकट के लिए पैसे दिए.
चोई करीब सात महीने पहले ना थावी जिले (सोंगखला) में मौजूद रबर के बगानों में काम करने के लिए आए थे. चोई को उम्मीद थी कि यहां से पैसा कमाकर वह अपने परिजनों की मदद कर सकेंगे. शुरुआत अच्छी हुई, वह हर दिन 650 रुपए कमाने लगे. चोई को रबर के पेड़ काटने होते थे.
लेकिन जैसे-जैसे महीने गुजरे, चोई को काम मिलना बंद हो गया. वह मुश्किल से पैसे कमा पाते थे. परिवार को भी पैसे भेजने बंद कर दिए. फिर चोई ने 5 सितंबर को घर वापस जाने का फैसला किया. लेकिन, उनके पास ना तो फोन था और ना पैसे. 12 दिन में चोई 300 किलोमीटर चले. रास्ते में वह मंदिरों में रुके, जहां बौद्ध भिक्षुओं ने उन्हें खाना खिलाया.
रविवार को जब पथालंग प्रांत पहुंचे तो थाई सैनिकों से पीने के लिए पानी मांगा. पहले तो सैनिकों को लगा कि चोई कोई अपराधी हैं, ऐसे में उससे पूछताछ की. सेना ने बताया कि चोई को उन्होंने प्लेन के टिकट के लिए पैसे देने की बात कही, पर उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि प्लेन में कैसे सफर किया जाता है. इसके बाद सेना ने उन्हें 2 हजार रुपए दिए और रेलवे स्टेशन पर जाकर छोड़ दिया.
फिर चोई ट्रेन से 13 घंटे का सफर कर पथालंग से 'हुआ लैंफोंग' रेलवे स्टेशन (बैंकॉक) पहुंचे. बैंकॉक से 8 घंटे का सफर तय कर वह बरीराम पहुंचे. यहां पहुंचते ही उनकी 81 साल की दादी 'ला' ने स्वागत किया और उनके हाथ में धागा बांध दिया. लोई के बारे में जब उनकी दादी को पता चला कि वह 300 किलोमीटर पैदल चले तो वह इमोशनल हो गईं.
दादी ने सेना का धन्यवाद किया, बोलीं- अगर सेना मदद ना करती तो उनके पोते की यात्रा काफी लंबी होती. सोंगखला से बरीराम की दूरी 1350 किलोमीटर है.