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मोहनजोदड़ो में खुदाई के दौरान हुई बड़ी खोज, मिली 2000 साल पुरानी ये खास चीज

Mohenjo Daro Pakistan: मोहनजोदड़ो सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे बड़ी बस्ती हुआ करती थी. इतनी विशाल सभ्यता कैसे खत्म हो गई, ये आज भी इतिहासकारों के लिए एक बड़ा रहस्य बना हुआ है.

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मोहनजोदड़ो में पुरातात्विदों को मिलीं खास चीजें (तस्वीर- @oxycanus/X)
मोहनजोदड़ो में पुरातात्विदों को मिलीं खास चीजें (तस्वीर- @oxycanus/X)

पाकिस्तान में पुरातात्विदों ने एक बड़ी खोज की है. इन्हें पाकिस्तान में मौजूद मोहनजोदड़ो वाली साइट पर 2000 साल पुरानी खास चीजें मिली हैं. ये खोज ऐतिहासिक स्थल पर निर्मित एक बौद्ध मंदिर के अवशेषों में हुई. यहां खोजकर्ताओं को तांबे के सिक्के मिले हैं. जो कुषाण साम्राज्य के वक्त के माने जा रहे हैं. कुषाण साम्राज्य के दौरान बौद्ध धर्म को व्यापक लोकप्रियता मिली थी. इन बौद्ध तीर्थस्थलों का दूसरा नाम स्तूप है. 

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लाइवसाइंस के अनुसार, जिस बौद्ध मंदिर से ये सिक्के मिले हैं, वो आज मोहनजोदड़ो में मौजूद मंदिर के अवशेषों के भीतर स्थित हैं. ये स्थल दक्षिण-पूर्व पाकिस्तान में लगभग 2600 ईसा पूर्व पुराना है. पुरातत्वविद् और गाइड शेख जावेद अली सिंधी ने एक इंटरव्यू में कहा, 'स्तूप मोहनजोदड़ो के पतन के 1600 साल बाद उसके खंडहरों पर बनाया गया था.' शेख जावेद अली सिंधी के नेतृत्व में एक टीम ने मोहनजोदड़ो में एक दीवार के ढहने के बाद खुदाई के काम में हिस्सा लिया. जहां उन्हें सिक्कों का एक भंडार मिला. 

डायरेक्टर ऑफ आर्कियोलोजी सैयद शाकिर शाह ने मोहनजोदड़ो स्थल पर इस परियोजना का निरीक्षण किया. सिंधी के अनुसार, सिक्कों को अब आर्कियोलॉजिकल लैबोरेट्री में सावधानीपूर्वक साफ किया जाएगा. दशकों तक दफनाए जाने के बाद सिक्के एक जगह मिले हैं, जिनका वजन करीब 5.5 किलोग्राम है. कुछ सिक्के आसपास भी मिले हैं. सिंधी के अनुसार, सिक्कों की संख्या 1,000 से 1,500 के बीच है. उनके अनुसार, इन पर खड़ी आकृतियां पाई गई हैं. विशेषज्ञों का मानना ​​है कि ये कुषाण राजाओं की हो सकती हैं.

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सिंधी ने कहा कि ये सिक्के 1931 के बाद स्तूप के खंडहरों से मिली ऐसी पहली आकृतियां हैं. इससे पहले ब्रिटिश पुरातत्वविद् अर्नेस्ट मैके को यहां 1,000 से अधिक तांबे के सिक्के मिले थे. 1920 के दशक में स्तूप में और भी सिक्के खोजे गए थे. मोहनजोदड़ो सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे बड़ी बस्ती हुआ करती थी. लेकिन 1700 ईसा पूर्व में इनकी हालत भी सिंधु घाटी सभ्यता की अन्य बस्तियों की तरह होने लगी. इतनी विशाल सभ्यता कैसे खत्म हो गई, ये आज भी इतिहासकारों के लिए एक बड़ा रहस्य बना हुआ है.

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