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सबसे तेज इंटरनेट चाहिए तो मार्स पर जाइए! वहां शुरू हुई ये सुविधा तो लोग उठाने लगे सवाल

नासा मंगल ग्रह पर हाई-स्पीड इंटरनेट स्थापित करने का प्रयोग कर रहा है. इसमें काफी हद तक सफलता मिल चुकी है और बहुत जल्द मंगल पर हाई स्पीड इंटरनेट सेवा शुरू हो जाएगी. इससे धरती पर कमजोर कनेक्टिविटी से जूझ रहे लोगों में नाराजगी भी है.

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मंगल ग्रह पर हाई स्पीड इंटरनेट (फोटो - AI जेनरेटेड)
मंगल ग्रह पर हाई स्पीड इंटरनेट (फोटो - AI जेनरेटेड)

मंगल ग्रह पर पृथ्वी से ज्यादा तेज हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा शुरू हो रही है. इस खबर से कई लोग नाराज भी हैं क्योंकि इंग्लैंड जैसे देश में भी एक बड़ा इलाका ऐसा है, जहां अभी भी इंटरनेट सेवा खराब है. ऐसे में मंगल ग्रह पर हाई स्पीड इंटरनेट सेवा स्थापित करने पर लोग सवाल भी उठा रहे हैं. 

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मंगल पर हाई-स्पीड इंटरनेट स्थापित करने का प्रयोग चल रहा है और जल्द ही ये प्रणाली काम करने लगेगी. नासा की नई क्रांतिकारी तकनीक की बदौलत मंगल ग्रह पर यूके से पहले हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध हो सकती है. डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक नासा ने इसकी पुष्टि भी की है. अब सवाल ये उठता है कि आखिर मंगल पर हाईस्पीड इंटरनेट की जरूरत किसे होगी  और वहां ऐसी प्रणाली क्यों स्थापित की जा रही है?

इस प्रोजेक्ट का नाम है डीप स्पेस ऑप्टिकल कम्युनिकेशंस
दरअसल, ये नासा की 'डीप-स्पेस' इंटरनेट नेटवर्क योजना है.  इसका सबसे पहले लाभ मंगल ग्रह को मिलने वाला है. डीप स्पेस ऑप्टिकल कम्युनिकेशंस (DSOC) नामक नई तकनीक का टेस्ट वर्तमान में नासा के साइकी अंतरिक्ष यान पर किया जा रहा है और अब तक के परिणाम आशाजनक रहे हैं.

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अंतरिक्ष में होने वाले प्रयोगों का हाई डेफिनेशन डेटा भेजने में होगी सहूलियत
यह प्रणाली दूर अंतरिक्ष से डेटा भेजने के लिए पारंपरिक रेडियो ट्रांसमिशन के बजाय शक्तिशाली लेजरों का उपयोग करती है, जो मौजूदा तरीकों की तुलना में 100 गुना अधिक स्पीड प्रदान करती है. डीएसओसी की बदौलत लाखों किलोमीटर दूर से हाई-डेफिनिशन वीडियो और जटिल डेटा भेजी जा सकती है. यानी इस तकनीक से अंतरिक्ष या मंगल ग्रह पर होने वाले रिसर्च के डेटा, वीडियो, ऑडियो और इमेजेज आसानी से कुछ सेकेंड में हमें मिल जाएंगे. 

267 मेगाबिट प्रति सेकंड की स्पीड से भेज सकते हैं डेटा
यह टेक्नोलॉजी पहले ही 460 मिलियन किलोमीटर से डेटा भेजने में सक्षम साबित हो चुकी है - जो पृथ्वी और मंगल के बीच की दूरी से भी अधिक है. इस प्रणाली की स्पीड इतनी ज्यादा है कि पृथ्वी पर ब्रॉडबैंड सेवा देने वाले  अधिकांश एजेंसी भी शर्मिंदा हो जाएंगे.बहुत निकट दूरी पर, जैसे कि पृथ्वी और मंगल के बीच 53 मिलियन किलोमीटर की दूरी है. इस डीएसओसी सिस्टम 267 मेगाबिट प्रति सेकंड की स्पीड प्राप्त की है, जो कि उच्च गति वाले इंटरनेट के क्षेत्र में ठोस एक बड़ी उपलब्धि है. 

नासा की जेट प्रोपल्शन प्रयोगशाला में डीएसओसी प्रोजेक्ट के टेक्नोलॉजिस्ट अभिजीत अबी बिस्वास ने कहा कि मुझे आपको यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हमारा प्रदर्शन वास्तव में बहुत अच्छा रहा है. हम अपने सभी लेवल वन आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम रहे हैं और वास्तव में, यह अपेक्षाओं से भी बढ़कर रहा है.

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भविष्य के रिसर्च डेटा को कम्युनिकेट करने में होगी सुविधा
हालांकि यह तकनीक अभी भी अपने प्रायोगिक चरण में है, लेकिन इसके मायने बहुत बड़े हैं. मंगल ग्रह के लिए, इसका मतलब यह हो सकता है कि रोवर्स, ऑर्बिटर्स और यहां तक ​​कि भविष्य के मानव मिशनों के साथ कम्युनिकेशन के तरीके में यह एक बहुत बड़ी छलांग होगी.

धरती पर ब्रिटेन जैसे देश में अभी भी 4G कनेक्टिविटी से जूझ रहे हैं लोग
लेकिन धरती पर यह क्रांतिकारी संचार सफलता उन लोगों के लिए थोड़ी कड़वी हो सकती है जो अभी भी धीमी इंटरनेट स्पीड से जूझ रहे हैं. खासकर ब्रिटेन जैसे देश के ग्रामीण इलाकों के बड़े हिस्से अभी भी लोग तेज ब्रॉडबैंड की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जहां कई क्षेत्रों में कनेक्टिविटी की समस्याएं हैं. इन इलाकों में अभी भी 4G ही पहुंच पाया है. ऐसे में लोग मंगल ग्रह पर हाई स्पीड इंटनेट तकनीक विकसित करने पर नाराजगी भी जता रहे हैं. 

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