कोरोना की वजह से बंद हुए करतारपुर कॉरिडोर के एक बार फिर से खुलने के बाद पंजाब में इसको लेकर राजनीति तेज हो गई है. पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू फिर से आमने-सामने आ गए हैं.
सूत्रों के मुताबिक पंजाब सरकार की और से गृह मंत्रालय (MHA) से पहले जत्थे में 50 लोगों को साथ ले जाने की अनुमति मांगी गई थी लेकिन सीएम चरणजीत सिंह चन्नी प्रदेश अध्यक्ष सिद्धू को छोड़कर अपने साथ कुछ करीबी कैबिनेट मंत्रियों और उनके परिवारों को लेकर करतारपुर कॉरिडोर पहुंच गए. इससे सिद्धू बेहद नाराज हो गए हैं और उनके समर्थक नेता भी चन्नी पर सवाल उठा रहे हैं.
जानकारी के मुताबिक पंजाब सरकार की तरफ से नवजोत सिंह सिद्धू का नाम इस इस जत्थे में साथ जाने के लिए गृह मंत्रालय को अनुमति के लिए नहीं भेजा गया.
सूत्रों के मुताबिक नवजोत सिंह सिद्धू को देर रात पंजाब सरकार की और से जानकारी दी गई कि वो सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के साथ जा रहे दल में शामिल नहीं है.
सिद्धू को बताया गया कि उन्हें गुरुपर्व के अगले दिन यानी की 20 नवंबर को करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जाने की अनुमति मिली है जबकि सिद्धू सीएम के डेलिगेशन के साथ जाने को लेकर पूरी तैयारी कर चुके थे और काफी उत्साहित भी थे. सिद्धू अब इसी पूरी घटना के बाद नाराज हो गए हैं.
इससे पहले सिद्धू के मीडिया सलाहकार ने नवजोत सिंह सिद्धू को सीएम के साथ जाने की अनुमति नहीं मिलने पर कहा था कि पंजाब सरकार उन्हें इसलिए साथ नहीं ले गई क्योंकि अगर सिद्धू जाते तो सबका ध्यान सीएम की जगह उन्हीं पर रहता. इस वाकये के बाद पंजाब सरकार और कांग्रेस संगठन के बीच का कलह एक बार फिर सामने आ गया है.
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धू सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के खिलाफ कांग्रेस आलाकमान के सामने भी अपनी नाराजगी जाहिर कर सकते हैं.
बता दें कि कोरोना की वजह से करीब डेढ़ साल बाद करतारपुर कॉरिडोर खुलने पर करतारपुर कॉरिडोर से लौटने पर पंजाब के सीएम चन्नी ने ट्वीट किया, 'गुरु नानक देव जी के 552वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में पाकिस्तान के श्री करतारपुर साहिब में मत्था टेकने का अवसर पाकर अत्यंत धन्य महसूस कर रहा हूं. 'चारड़ी कला' और 'सरबत दा भला' के लिए प्रार्थना. आइए गुरु जी की प्रेम, शांति, धर्मनिरपेक्षता और भाईचारे की शिक्षाओं का पालन करें.'
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