
20 जून, 1956... रात का समय. एक विमान हवा में उड़ रहा था. तभी पायलट को इंजन में खराबी का एहसास होता है. वो कंट्रोल रूम से इमरजेंसी लैंडिंग की परमिशन मांगता है. लेकिन इससे पहले ही अटलांटिक महासागर के ऊपर उड़ रहे इस विमान में आग लग जाती है. विमान आग के गोले में तब्दील हो जाता है और विस्फोट के बाद समुद्र में समा जाता है. विमान में सवार सभी 74 लोग मारे जाते हैं. हादसे के बाद उनके क्षत-विक्षत शव खोजने में कई दिन लगे.
दरअसल, हम बात कर रहे हैं आज के ही दिन यानि 20 जून को हुए LAV फ्लाइट नंबर 253 हादसे की. इतिहास के पन्नों में इस हादसे को सबसे खतरनाक प्लेन क्रैश (Most Dangerous Plane Crash) के रूप में जाना जाता है. इसमें यात्रियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला. एक झटके में दर्जनों लोग आग में झुलसकर अपनी जान गंवा बैठे.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Linea Aeropostal Venezolana (LAV) Flight 253 ने 19 जून को रात के 11:15 बजे अमेरिका के आइडलविल्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट से वेनेजुएला के कैरकस एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरी थी. आइडलविल्ड एयरपोर्ट को अब जॉन एफ केनेडी एयरपोर्ट के नाम से जाना जाता है. मौसम साफ था, विमान में फ्यूल से लेकर सारी चीजें भी ठीक थीं. टेकऑफ के बाद विमान कुछ ही देर में हवा से बातें करने लगा. लेकिन घंटे भर बाद विमान के एक इंजन के पंखे ने काम करना बंद कर दिया.
कैलेंडर पर तारीख बदल चुकी थी. 20 जून, रात के साढ़े 12 बजे पायलट ने इमरजेंसी लैंडिंग की इजाजत मांगी. वक्त की नजाकत को देखते हुए आइडलविल्ड एयरपोर्ट के एयर ट्रैफिक कंट्रोलर ने पायलट लुइस फ्रांसिस्को को लैंड करने की परमिशन दे दी. लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था.
लगभग 1:25 बजे विमान न्यू जर्सी के तट से दूर था जब पायलट को लैंडिंग के लिए विमान को हल्का करने के लिए समुद्र में फ्यूल छोड़ने की अनुमति मिली. लेकिन फ्यूल डंप शुरू करने के तुरंत बाद विमान में आग लग गई. पलक झपकते आग ने विमान को अपनी आगोश में ले लिया. अगले ही पल इसमें विस्फोट हुआ और विमान समुद्र में डूब गया.
ये पूरा मंजर LAV फ्लाइट को एस्कॉर्ट कर रहे दो विमानों के पायलट ने लाइव देखा. उन्होंने बताया कि LAV फ्लाइट एयरपोर्ट से मुश्किल से 10 मिनट की दूरी पर थी. लेकिन फ्यूल डंप के दौरान ये आग के गोले में बदल गई. इसके बाद फ्लाइट असबरी पार्क से 32 मील दूर अटलांटिक महासागर में समा गई.
इस भीषण हादसे में 64 यात्रियों और 10 केबिन क्रू मेंबर्स की मौत हो गई. इस तरह विमान में सवार सभी 74 लोग मारे गए. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि उन्हें शुरू में ऐसा लगा जैसे आसमान से कोई आग का गोला समुद्र में गिर रहा हो. लेकिन बाद में पता चला कि ये विमान हादसा था.