आज से कश्मीर में जी20 की बैठक शुरू हो गई है. ये तीसरी पर्यटन कार्य समूह की बैठक है, जिसका आयोजन 24 मई तक श्रीनगर में होगा. इसके लिए शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया है. घाटी की खूबसूरती से किसी की नजर नहीं हट रही. बैठक के मद्देनजर श्रीनगर में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. इस बीच ये ध्यान रखने की भी पूरी कोशिश है कि पर्यटकों को किसी तरह की दिक्कत न हो.
भारत इस साल जी20 की अध्यक्षता कर रहा है. देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ये बैठकें हो रही हैं. इन शहरों में श्रीनगर को भी चुना गया था. इस बैठक में जी20 सदस्य देशों के कार्य समूह के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. इसे कश्मीर में होने वाला इतिहास का सबसे बड़ा इंटरनेशनल इवेंट भी कहा जा रहा है.
बुरी तरह चिढ़ा हुआ है पाकिस्तान
बैठक को लेकर पाकिस्तान बुरी तरह तिलमिलाया हुआ है. उसका साथ देते हुए चीन ने भी बैठक का बहिष्कार किया है. चीन जी20 के सदस्य देशों में शामिल है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि चीन विवादित क्षेत्र पर कि किसी भी तरह की जी20 बैठक का दृढ़ता से विरोध करता है. उन्होंने कहा कि हम ऐसी बैठकों में शामिल नहीं होंगे. खैर दो मुंह वाले चीन की बात ही अलग है. उसे पीओके में सीपीईसी पर निवेश करना, निर्माण करना विवादित नहीं लगता. लेकिन भारत के अभिन्न अंग कश्मीर में बैठक उसे विवादित लगती है.
Chairman PPP & Foreign Minister @BBhuttoZardari arrives in Kashmir to protest against India’s violation of international laws and UN resolutions
— PPP (@MediaCellPPP) May 21, 2023
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इस बीच खबर आई है कि पाकिस्तान ने भारत से चिढ़कर एक बचकाना हरकत कर दी है. इस हरकत को वो श्रीनगर में हो रही बैठक के खिलाफ उठाया अपना एक कदम बता रहा है. हरकत ये है कि पाकिस्तानी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी पीओके (पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर) गए हैं. उनका ये दौरा 21 से 23 मई तक चलेगा. पीओके पहुंचकर उन्होंने भारत के खिलाफ जमकर जहर भी उगला है. बिलावल ने अपनी इस यात्रा की जानकारी ट्वीट्स के जरिए दी है. उन्होंने कहा है कि 'कश्मीर में जी20 की बैठक कराकर भारत अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कर रहा है. वो इस कॉन्फ्रेंस के जरिए कश्मीरियों की आवाज को नहीं दबा सकता.'
पहले भी उगला था जहर
इससे पहले जब वो भारत में एससीओ के विदेश मंत्रियों की बैठक में आए थे, तब उन्होंने कहा था, 'विवादित क्षेत्र में जी20 की बैठक आयोजित करना भारत की संकीर्णता को दर्शाता है और यह दुनिया को भारत का घमंड दिखाता है कि उसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों की बिलकुल परवाह नहीं है.'
जी20 की स्थापना 1999 में एशियाई वित्तीय संकट के बाद हुई थी. ग्रुप ऑफ ट्वेंटी यानी जी20 में 19 देश (अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, कोरिया गणराज्य, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, ब्रिटेन और अमेरिका) और यूरोपीय संघ शामिल हैं.