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गजब! पाकिस्तान में बच्चों के साथ हो रही ठगी, ये एक वादा करके फंसा रहे अपराधी

यहां मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज के एडमिशन टेस्ट के दौरान 213 बच्चों को नकल करते पकड़ा गया. इन्होंने अपने कानों में न नजर आने वाला ब्लूटूथ डिवाइस लगाए हुए थे.

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पाकिस्तान में बच्चे बन रहे स्कैमर्स का शिकार (प्रतीकात्मक तस्वीर- Pexels)
पाकिस्तान में बच्चे बन रहे स्कैमर्स का शिकार (प्रतीकात्मक तस्वीर- Pexels)

आपने वयस्कों के साथ धोखाधड़ी के बारे में सुना होगा. वो ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही तरह की धोखाधड़ी का शिकार होते हैं. लेकिन क्या आपने कभी बच्चों के साथ होने वाली ठगी के बारे में सुना है? आजकल बच्चों को लेकर बढ़ती परेशानियों का फायदा अपराधी उठा रहे हैं. ऐसा इस वक्त पाकिस्तान में काफी ज्यादा देखने को मिल रहा है. आपने ऐसी खबरें पढ़ी होंगी, जब परीक्षा में कम नंबर आने के डर से बच्चे आत्महत्या कर लेते हैं. बस इसी बात का फायदा अब अपराधी संगठनों ने उठाना शुरू कर दिया है. नकल कराने वालों का पूरा रैकेट इसके लिए मौजूद है. 

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ऐसा कई देशों में हो रहा है. बच्चों को पास कराने के लिए अमीर लोग पैसा देकर नकल तक करवा लेते हैं. लेकिन गरीब और मध्यम वर्ग से ताल्लुक रखने वाले बच्चे थोड़े नंबर कम आने पर दाखिले की दौड़ में पीछे रह जाते हैं. पाकिस्तान से हाल में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां मेडिकल एंड डेंटल कॉलेज के एडमिशन टेस्ट के दौरान 213 बच्चों को नकल करते पकड़ा गया. इन्होंने अपने कानों में न नजर आने वाले ब्लूटूथ डिवाइस लगाए हुए थे.

90 फीसदी से ज्यादा नंबर की गारंटी
 
इन बच्चों को बाहर से एक गिरोह सवालों के जवाब बता रहा था. हैरानी की बात ये है कि गिरोह में टीचर भी शामिल थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गिरोह बच्चों को कोचिंग सेंटर्स में शिकार बनाता है. इनसे कहा जाता है कि आधे पैसे परीक्षा से पहले दे दो और आधे परीक्षा के बाद. ये 90 फीसदी से अधिक नंबर दिलाने की गारंटी देते हैं. एक अन्य गिरोह का जब भंडाफोड़ हुआ, तो पता चला कि पेशावर की अदालत ने परीक्षा के नतीजों को रोक दिया है. इस गिरोह ने बच्चों से 20-20 लाख रुपये लिए थे. इससे पहले पेपर लीक होना भी सामान्य माना जाता था. लेकिन परीक्षा के दौरान ये सब होना काफी हैरानी की बात है.

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आप खुद सोच सकते हैं कि जब इस तरह पास होने के बाद बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर या वकील बनेंगे, तो वो समाज में किस तरह काम करेंगे. वो कैसे मरीजों को ठीक करेंगे और कितनी मजबूत इमारतों का निर्माण करेंगे. ऐसे में परिवारों की जिम्मेदारी बनती है कि वो बच्चों पर परीक्षा पास करने का दबाव डालना बंद करें.

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