लोगों के अपने अपने शौक होते हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए वो पानी की तरह पैसा बहाने से भी पीछे नहीं हटते. कुछ ऐसा ही इस वक्त चीन में देखने को मिल रहा है. यहां लोगों को सूअरों को करीब से देखना इतना पसंद है कि वो इसके लिए एक लाख रुपये तक देने को तैयार हैं. यहां लोग इतना पैसा देकर ऐसे होटल रूम किराए पर ले रहे हैं, जिनकी खिड़कियों से देश के बेहद दुर्लभ और अहम माने जाने वाले सूअरों को करीब से देखा जा सके.
इन सूअरों से चीन की फेमस और पारंपरिक डिश जिन्हुआ हैम बनती है. चीन के झेजियांग प्रांत में थीम पार्क की बिल्डिंग को अनोखे तरीके से डिजाइन किया गया है. होटल रूम की खिड़की से जमीन पर मौजूद सूअरों को देखा जा सकता है. होटल रूम की कुछ तस्वीरें भी स्थानीय सोशल मीडिया एप Douyin पर वायरल हो रही हैं. इसे चीन का टिकटॉक कहा जाता है. थीम पार्क को लोग जिन्हुआ का डिज्नीलैंड बोलते हैं.
2021 में खुला था थीम पार्क
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ये पार्क साल 2021 में 'पांडा पिग' नाम के सूअरों की नस्ल को प्रमोट करने के लिए खोला गया था. इन सूअरों का सिर और पूंछ वाला हिस्सा काले रंग का होता है. इस नस्ल को मूल रूप से "टू-एंड ब्लैक पिग" नाम दिया गया था. जो चीन में कम से कम 1200 वर्षों से है. इसे जिन्हुआ ड्राई-क्योर्ड हैम का पारंपरिक स्रोत भी माना जाता है. जो इटली के प्रोसियुट्टो डी पर्मा और स्पेन के जामोन इबेरिको का मुकाबला करता है. इटली और स्पेन की ये दोनों डिश भी सूअरों से बनती हैं.
चीन में बची है काफी कम आबादी
चीन की इस सुअर से बनने वाली डिश पूरी दुनिया में काफी पसंद की जाती है. रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा कहा जाता है कि इटली के व्यापारी, खोजकर्ता और राजदूत मारको पोलो 13वीं सदी में जिन्हुआ से ड्राई-क्योर्ड हैम का सीक्रेट यूरोप लेकर गए थे. जिसके बाद ये डिश चीन के बाहर भी मशहूर हो गई. कियानजियांग इवनिंग न्यूज की साल 2016 की एक रिपोर्ट में जिन्हुआ में सूअरों की इस नस्ल की वार्षिक उपलब्ध संख्या 75,000 से 80,000 बताई गई थी, जो शहर के कुल सूअरों की आबादी का सिर्फ 3 से 4 फीसदी है.