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पोन्नियिन सेल्वन: दक्षिण भारत का वो राजा जिसकी मुट्ठी में था पूरा एशिया, इशारे पर चलती थी सबसे बड़ी नौसेना!

PS2: ऐश्वर्या राय की फिल्म पोन्नियिन सेल्वन 2 एक ऐसी कहानी है, जो इतिहास के पन्नों में कहीं खोकर रह गई. मगर जब लोगों के सामने आई, तो बाकी सभी कहानियां इसके आगे काफी छोटी दिखने लगीं. तो आइये चलते हैं एक ऐसे सफ़र में जो हमें बीते कल की एक शौर्यगाथा तक पहुंचाएगा...

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दक्षिण के महान राजा की कहानी है पीएस-2 (तस्वीर- सोशल मीडिया)
दक्षिण के महान राजा की कहानी है पीएस-2 (तस्वीर- सोशल मीडिया)

'ये मदिरा, गण, रक्त भी, युद्ध भी... सब भुलाने के लिए है, उसको भुलाने, अपने आप को भुलाने, सबको भुलाने के लिए है...', अपनी प्रेमिका से अलग होने के बाद एक प्रेमी के ये शब्द आपके जेहन को हिला सकते हैं. इन शब्दों में छिपी पीड़ा को समझने वाला हर व्यक्ति दुख के समंदर में गोता खा सकता है.

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लैला-मजनू, हीर-रांझा या फिर जोधा-अकबर की प्रेम कहानियों को सुनने और सुनाने वालों को ऐसी भी कहानियों के बारे में जानना चाहिए जो इतिहास के गर्भ में सदियों से दफ़न हैं. बीते कुछ समय पहले ऐसी ही एक कहानी को फ़िल्मी पर्दे पर लाया गया. और इसे लाने वाला कोई और नहीं बल्कि इसी फ़िल्मी दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम मणिरत्नम हैं. और ये कहानी है आदित्य और नंदिनी की. 

आदित्य चोल वंश के वो युवराज थे, जिन्होंने तेजी से साम्राज्य का विस्तार किया. लेकिन वक्त वक्त पर उन्हें नंदिनी का प्यार कमजोर करता रहा. 'किसी जूती को सिर का ताज नहीं बनाया जा सकता', यह कहकर ना जाने कितनी की प्रेम कहानियों को मिटा दिया गया. प्रेम के बीच अमीरी और गरीबी का एंगल भी कितनी ही बार विलन बनकर सामने आया. ऐसे ही युवराज आदित्य और एक अनाथ नंदिनी के बीच उपजे प्रेम को जड़ से मिटाने के लिए हर वो कोशिशें की गईं जिनको किया जा सकता था. लेकिन जब प्रेम अपने ही प्रेमी के खिलाफ हाथों में तलवार उठा ले तो मंजर क्या होगा? यही इस फिल्म का सबसे रोमांचक मोड़ है. 

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आदित्य और नंदिनी करते थे प्यार (तस्वीर- सोशल मीडिया)
आदित्य और नंदिनी करते थे प्यार (तस्वीर- सोशल मीडिया)

आदित्य के ही छोटे भाई थे पोन्नियिन सेल्वन. उन्हीं के नाम पर फिल्म का टाइटल रखा गया है.  

पोन्नियिन सेल्वन, एक ऐसा राजा जिसकी ताकत, हुकूमत करने का हुनर का सलीका आपको हैरान कर देगा. इतिहास से प्यार करने वालों के लिए सिनेमा के इस रूप की अलग ही चाहत है, जहां उनकी किताबों के किरदार आंखों के सामने अभिनय कर रहे होते हैं. सब कुछ एक बार फिर घटित हो रहा होता है. फिर चाहे वो युद्ध हो या फिर प्रेम.  

वीकेंड का माहौल और अगर आप ऐसे में इस फिल्म को देखने का मन बना रहे हैं तो ये पूरी स्टोरी आपके ही लिए है. जिसे पढ़ने के बाद फिल्म देखने का मज़ा दोगुना हो जाएगा. फिल्म पर एक छोटी सी बात कर लें तो मणिरत्नम की इस फिल्म का यह दूसरा भाग है जो अब रिलीज हो चुका है. इससे पहले पोन्नियिन सेल्वन का पहला भाग यानी PS1 भी दर्शकों के बीच आ चुका है. मिले जुले रिव्यू के साथ फिल्म ने खूब चर्चाएं बटोरीं, जिसके बाद अब बारी है दूसरे भाग की. 

एक साथ कई कहानी समेटे हुए है फिल्म (तस्वीर- सोशल मीडिया)
एक साथ कई कहानी समेटे हुए है फिल्म (तस्वीर- सोशल मीडिया)

मणिरत्नम ने PS2 में कहानी समझाने के बजाए, कहानी को दिखाने पर पूरा ध्यान दिया है. जिसे कहानी पता है, उसके लिए तो ये अब तक की बेस्ट फिल्म हो सकती है. लेकिन जिसे कहानी या इतिहास का इल्म ही नहीं, उसके लिए यह फिल्म तनिक सिर से ऊपर निकल जाने वाली हो सकती है. लेकिन इससे पहले कि इतिहास की एक महान कहानी किसी के सिर से निकले हम आपको इस पूरी कहानी को समझा देने के लिए मौजूद हैं. ताकि रोमांस, ड्रामा, राजनीति, षडयंत्र, धोखे और गलहफहमियों समेत तमाम मिर्च मसालों से भरी इस ऐतिहासिक कहानी का लुत्फ आप भी उठा सकें.

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अब अगर आप सोच रहे हैं कि भला फिल्म का नाम PS1 या PS2 क्या सोचकर रखा गया है, तो आपकी जानकारी के लिए हम बताते चलें कि इसका पूरा नाम है 'पोन्नियिन सेल्वन', यानी पोनी का बेटा. ऐसे में यहां पोनी, कावेरी नदी को कहा गया है.

जिसके मुताबिक पोन्नियिन सेल्वन का मतलब हुआ कावेरी का बेटा. फिल्म में इसी पोन्नियिन सेल्वन की कहानी बताई गई है, जिसका किरदार अभिनेता जयम रवि ने निभाया है. फिल्म में बताया गया है कि वह बचपन में भूल से नदी में गिर गए थे और उन्हें मां पोनी (कावेरी) ने बचाया था. हालांकि पोन्नियिन ने फिल्म में कहा कि उन्हें मोनी रानी ने बचाया था, न कि मां पोनी ने, वह सफेद बालों वाली एक बूढ़ी महिला है. वो गूंगी भी है.

राजाराज को बचाती है बूढ़ी महिला (तस्वीर- सोशल मीडिया)
राजाराज को बचाती है बूढ़ी महिला (तस्वीर- सोशल मीडिया)

पोन्नियिन को फिल्म में अरुलमोरीवर्मन के नाम से पुकारा जाता है. अरुलमोरीवर्मन को इतिहास में राजाराज-I के नाम से भी जाना जाता है. वो अपने समय के सबसे महान राजा हुआ करते थे. उन्होंने भारत के बाहर विदेशों में भी अपनी जड़ें जमा ली थीं. यहां तक कि बड़ी संख्या में मंदिरों का निर्माण करवाया. लेकिन अफसोस कि इतिहास उन्हीं को भुला बैठा.

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दक्षिण भारत की ताकत की कहानी!

हमारे देश में तमाम राजा महाराजा रहे हैं. ऐसे ही एक राजा दक्षिण भारत में भी थे. ऐसे ही एक राजा पोन्नियिन सेल्वन भी थे.जिनके पिता का नाम था सुंदर चोल. फिल्म में ये किरदार प्रकाश राज ने निभाया है. अब फिल्म की स्क्रीन की तरफ नजर घुमाएं तो हमारे सामने चोल वंश के बूढ़े राजा सुंदर चोल एक तख्त पर लेटे हुए दिख रहे हैं. साथ में पत्नी है, और एक चीनी वैद्य उनका इलाज कर रहा है. सुंदर चोल के दो बेटे और एक बेटी हैं.

बड़ा बेटा आदित्य करिकलन है, जिसे आदित्य चोल भी कहा जाता है. ये वही किरदार है, जो अपनी प्रेमिका के विरह में इस कदर डूब गया है, कि खुद को जिंदा दिखाने के लिए युद्ध पर युद्ध लड़ रहा है. उसने अपने दिमाग को इस कदर व्यस्त कर लिया है कि प्रेमिका चाहकर भी याद न आ जाए. इस किरदार को बखूबी निभाने वाले एक्टर चियान विक्रम हैं. उन्हें आदित्य-II भी कहते हैं.

राजाराज-I की कहानी है पीएस2 (तस्वीर- सोशल मीडिया)
राजाराज-I की कहानी है पीएस2 (तस्वीर- सोशल मीडिया)

फिल्म का सबसे महत्वपूर्ण किरदार है आदित्य का छोटा भाई और सुंदर चोल का छोटा बेटा अरुलमोरीवर्मन. जिन्हें पोन्नियिन सेल्वन और राजाराज-I भी कहा जाता है. वहीं तीसरी प्रमुख किरदार, राजा की बेटी है, जिसका नाम राजकुमारी कुंदवई है. फिल्म में इस किरदार को एक्ट्रेस तृषा कृष्णन ने निभाया है.

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सिनेमा के पर्दे पर साम्राज्य के भीतर तख्तापलट को लेकर चल रही साजिशों और बाहरी दुश्मन के हमलों के बारे में दिखाया गया है. आदित्य की प्रेमिका नंदिनी (ऐश्वर्या राय बच्चन) से तो आप मिल ही चुके हैं. जो चोल साम्राज्य में रहकर ही इसकी जड़ें कमजोर करने में लगी रहती है.

अब बात फिल्म के उस किरदार की जिसने सबको खूब हंसाया. जिसने अपनी बहादुरी के दम पर खूब वाहवाही भी लूटी. यह किरदार है आदित्य के दोस्त वंध्यवन का. यह किरदार एक्टर कार्ति ने निभाया है. वो आदित्य के साथ एक युद्ध में हिस्सा ले चुके हैं. फिल्म में युवराजों की बहन कुंदवई के प्रेमी भी हैं. साथ ही सभी षडयंत्रों से निपटने में उनकी मदद करते हैं.

वंध्यवन से प्रेम करती है कुंदवई (तस्वीर- सोशल मीडिया)
वंध्यवन से प्रेम करती है कुंदवई (तस्वीर- सोशल मीडिया)

ऐसे में चाहे फिल्म के पहले पार्ट की बात की जाए या फिर दूसरे भाग की... वंध्यवन सबके चेहरे पर बार बार हंसी लेकर आए. इसके अलावा आदित्य, एक दिलजले आशिक के साथ एक वीर योद्धा के रूप में दिखे. वहीं पोन्नियिन सेल्वन अपनी बहादुरी और दरियादिली दिखाकर सबको अपना कायल बना गए. पहली फिल्म में जो सवाल अधूरे रहे गए थे, उनके जवाब दूसरे पार्ट ने दे दिए हैं. फिल्म की कहानी की तह खोलने से पहले हम बात करते हैं उस हिस्से की जहां से इस कहानी का उदय हुआ.

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कहां से निकलकर आई ये कहानी?

इसे जानने के लिए चलते हैं साल 1950 में. ये वही समय है, जब अंग्रेज देश को खोखला कर भाग चुके हैं. पाकिस्तान नाम का एक अलग मुल्क बन गया है. देश में गरीबी खूब है और बड़ी आबादी अनपढ़. एक तरफ देश को पटरी पर लाने की तमाम कोशिशें हो रही थीं. दिल्ली में खूब हलचल मची है. तो दूसरी तरफ तमिलनाडु में कुछ और ही चर्चा हो रही है. ये चर्चा है, एक कहानी की. ये कहानी पोन्नियिन सेल्वन की है. जो पहली बार लोगों के सामने आ रही है.

आपने इतिहास की किताब से लेकर फिल्म के पर्दे तक तमाम राजाओं महाराजाओं की कहानी सुनी होगी. लेकिन एक राजा ऐसे भी थे, जो विदेश तक अपनी जड़ें जमा चुके थे. हैरानी भी इसी बात में है कि इतना सब होने के बाद भी उस राजा का नाम इतिहास के पन्नों में दबकर रह गया. यह नाम जब किताब के रूप में सामने आया तो चारों तरफ इसकी चर्चा तो हुई, शायद इस चर्चा को अभी और आगे जाना था. इसीलिए इसने सिनेमा के पर्दे को चुना.

पोन्नियिन सेल्वन की कहानी (तस्वीर- सोशल मीडिया)
पोन्नियिन सेल्वन की कहानी (तस्वीर- सोशल मीडिया)

कहानी थी, राजाराज-I यानी पोन्नियिन सेल्वन की. जो दक्षिण भारत के वो महान राजा थे, जिनके गुणगान के लिए किताब के पन्ने और फिल्म की समयसीमा तक छोटे पड़ गए. 1950 में कल्कि कृष्णमूर्ति ने 'पोन्नियिन सेल्वन' नाम से एक ऐतिहासिक उपन्यास लिखा. जो तमिल भाषा में छपा. कृष्णमूर्ति एक स्वतंत्रता सेनानी थे.

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इस कहानी के हिस्सों को सबसे पहले 1950 में हर हफ्ते क्लिक नामक मैगजीन में छापा जाता था. जो हद से ज्यादा बिकी. सिर्फ यही कहानी पढ़ने के लिए लोग मैगजीन खरीद रहे थे. फिर इस कहानी को 1955 में पांच भागों में किताब का रूप देकर जारी किया गया. ये कहानी 2210 पन्नों में दर्ज हुई. मगर ये पन्ने भी कम पड़ गए. किताब आज तक बेस्ट सेलर की लिस्ट में शामिल है.

जब इन्हीं पन्नों को फिल्म का रूप देने की बात आई, तो एक भाग कैसे एक दौर को बता सकता था. तो दूसरा पार्ट भी लाया गया. किताब में चोल वंश का इतिहास लिखा हुआ है. कहानी को समझने से पहले हमें चोल राजवंश का इतिहास जानना होगा.

चोल राजवंश का इतिहास क्या है?

चोल वंश का इतिहास इतना बड़ा है कि इसे चार भागों में बांटना पड़ा. इस दक्षिण भारतीय राजवंश को लेकर कहा जाता है कि यह न केवल भारत बल्कि दुनिया में सबसे लंबे दौर तक चले राजवंशों में से एक है. इनका राज 2000 साल तक चला. इसकी शुरुआत गुमनाम है, लेकिन मध्यक्रम यानी तीसरा भाग, सबसे अधिक महत्वपूर्ण है. तब ही इसे साम्राज्य का दर्जा मिला था. ये मदुरै से शुरू हुआ. मध्यक्रम में इसका इतना विस्तार हुआ कि भारत के आसपास के देशों पर भी नियंत्रण हासिल हो गया. इसी तीसरे भाग की कहानी हमें फिल्म में दिखाई गई है.

पहला दौर

शुरुआती चोल शासक मुख्य रूप से एक क्षेत्र पर राज करते थे. इसे आज के समय में तमिलनाडु कहते हैं. चोल शासकों से जुड़ी सबसे पहली जानकारी 2300 साल पहले मिलती है. यहां तक कि संगम साहित्य में भी इसका जिक्र है. साथ ही सम्राट अशोक के शिलालेख संख्या 13 में भी. हालांकि पहले दौर में इसे साम्राज्य का दर्जा नहीं मिला था.

पहले दौर में 300 ईसा पूर्व से 200 ईसवी तक चोल राजाओं के नाम और दूसरे साक्ष्य मिले हैं. तमिल साहित्य से लेकर कांस्य पट्टिकाओं तक में इस कालखंड के 15 से अधिक चोल राजाओं के नाम हैं.

चोल राजवंश की कहानी बताती है फिल्म (तस्वीर- सोशल मीडिया)
चोल राजवंश की कहानी बताती है फिल्म (तस्वीर- सोशल मीडिया)

दूसरा दौर

इतिहासकारों ने इस वंश का दूसरा दौर 200 ईसवी से 800 ईसवी तक को निर्धारित किया है. इसे चोल राजवंश का अज्ञात काल भी कहते हैं. यानी इस वक्त से जुड़ी ज्यादा जानकारी नहीं है. तब चोल वंश दबा हुआ था. इसके पीछे की वजह में माना जाता है कि तब दक्षिण में पल्लव और पांड्या राजवंशों का प्रभुत्व बढ़ गया था. यानी उन्होंने अपना प्रचार प्रसार अधिक कर लिया था. तभी चोलों से जुड़ी कोई जानकारी सामने नहीं आ पाई.

तीसरे दौर पर ही है फिल्म की कहानी

PS1 और PS2 फिल्म इसी तीसरे दौर की कहानी बताती है. ये दौर 848 ईसवी से लेकर 1070 ईसवी तक चला. इसी दौर में साम्राज्य का सबसे अधिक विस्तार हुआ. इस चरण में चोल वंश के दो सबसे बहादुर और पराक्रमी राजा थे. इनमें पहले राजा राजाराज-I चोल थे, यानी पोन्नियिन सेल्वन और दूसरे उनके बेटे राजेंद्र चोल-प्रथम थे.

तीसरे दौर यानी मध्यकालीन चोल शासन की स्थापना 848 ईसवी में हुई थी. इसे स्थापित करने वाले चोल राजा विजयालय थे. उन्हें ही कई बार चोल वंश का संस्थापक कहा जाता है. उनके बाद जो राजा आए, यानी सुंदर चोल के वक्त, उन राजाओं ने पांड्या, पल्लव, राष्ट्रकूट और चेर शासकों से कई युद्ध लड़े. इन्हीं युद्धों में लगातार जीत मिलने के बाद चोल शासकों ने एक बड़ा दक्षिण भारतीय क्षेत्र चोल साम्राज्य के अधीन कर लिया था. इनकी राजधानी तंजौर बनी. जिसे आज तंजावुर कहा जाता है. यह तमिलनाडु में है.

985 ईसवी में राजाराज चोल यानी फिल्म के हीरो पोन्नियिन सेल्वन राजा बने थे. उन्होंने पल्लव, पांड्या, चालुक्य और चेर राजाओं के कई और क्षेत्रों को जीतकर चोल साम्राज्य में शामिल कर लिया. इन्हीं राजा के शासन काल में चोल साम्राज्य का विस्तार दूसरे देशों तक हुआ. सबसे पहले उन्होंने सीलोन (सिंघल राज्य जिसे आज श्रीलंका बोलते हैं) पर आक्रमण किया था. इस पर जीत भी दर्ज की.

तीसरे दौर की कहानी पर बेस्ड है फिल्म (तस्वीर- सोशल मीडिया)
तीसरे दौर की कहानी पर बेस्ड है फिल्म (तस्वीर- सोशल मीडिया)

1014 ईसवी में राजाराज के बेटे राजेंद्र चोल राजा बने और जो क्षेत्र उनके पिता ने जीते, उन्होंने उसके उत्तर में विस्तार किया. उन्होंने ओडिशा और बंगाल के कई क्षेत्र जीते. उन्होंने वापस आकर दक्षिण भारत में कृष्णा नदी पर एक नगर की स्थापना की और इसे गंगईकोंडाचोलपुरम नाम दिया. मतलब कि गंगा पार कर उसके आगे के राजाओं को हराना. बंगाल की खाड़ी का नाम चोल झील रख दिया. इस साम्राज्य की सेना उस वक्त एशिया महाद्वीप की सबसे बड़ी नौसेना थी.

राजेंद्र चोल ने अपनी इसी मजबूत नौसेना के बल पर समुद्री प्रांतों के आसपास के स्थान अपने शासन में शामिल कर लिए. इनमें मालदीव, श्रीलंका, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम, कंबोडिया, इंडोनेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर जैसे तमाम देश शामिल थे. साथ ही चीन के साथ भी व्यापार होता था. इसके लिए बाकायदा राजेंद्र चोल ने अपने राजनयिक चीन भेजे थे. उन्होंने वहां अपने दूतावास तक बनाए.

इसी समय में राजाओं ने ढेरों मंदिर बनवाए. भारतीय संस्कृति दूर दूर तक फैली. मंदिरों के जरिए कल्याणकारी कार्य कराए जाते थे. इंडोनेशिया तक में ऐसे मंदिर हैं, जो चोल राजाओं ने बनवाए थे.

हुआ ये था कि पांड्या और पल्लव आपस में लड़ रहे थे. बीच में चोल राजा आए और पल्लवों की मदद की. पांड्याओं को हराया. इससे पल्लव खुश हो गए और विस्तार करने की छूट दे दी. बस तभी 848 ईसवी में इस राजवंश की स्थापना हो गई.

चौथा दौर

चोल साम्राज्य का चौथा और आखिरी दौर 11वीं से 13वीं सदी के बीच रहा. फिर धीरे धीरे इस साम्राज्य का पतन होने लगा. राजाराज यानी पोन्नियिन सेल्वन और राजेंद्र चोल के बाद विराराजेंद्र (1063-1067 ईसवी), अथीराजेंद्र (1067-1070 ईसवी) और कुलोट्टुंगा I (1070-1122 ईसवी) आए. ये ज्यादा खास नहीं रहे. इनके बाद आए राजेंद्र-III. ये आखिरी चोल शासक थे. इन्हें जटावर्मन् सुंदरपांड्य-II ने हरा दिया था.

आसान भाषा में बात करें, तो सबसे पहले पांड्याओं को चोलों ने हराया. फिर चोलों को पांड्याओं ने हराया. और फिर पांड्याओं को मलिक कफूर ने हरा दिया. जो अकाउद्दीन खिलजी का कमांडर था. मुगल शासक तब दक्षिण भारत तक पहुंच गए थे.

अब आ जाते हैं फिल्म की कहानी पर

तो अब हम चोल वंश का इतिहास तो जान गए हैं. अब फिल्म की कहानी भी जान लेते हैं. बहुत से लोगों की शिकायत है कि वो कहानी को समझ नहीं पा रहे. तो सबसे पहले PS1 की बात कर लेते हैं.

अब टाइम मशीन में बैठिए और 1000 साल पीछे चलिए. हम चोल साम्राज्य के स्वर्णिम युग की शुरुआत से थोड़ा पहले वाले समय में आ गए हैं. कहानी की शुरुआत चोल साम्राज्य के राजा सुंदर चोल और उनके दो बेटों और एक बेटी के इंट्रोडक्शन के साथ होती है. अब राजा तो महल में बीमार हैं, फिर बाकी लोग कहां हैं?

राजा के बड़े बेटे युवराज वीर योद्धा आदित्य करिकलन युद्ध में इस कदर खो चुके हैं, ताकि चाहकर भी प्रेमिका को याद न कर पाएं. उन्होंने सेवूर युद्ध के मैदान में पांड्याओं को हराया और वीर पांड्या का सिर धड़ से अलग कर दिया है. वहीं प्रतिशोध लेने के लिए वीर पांड्या के अंगरक्षकों ने चोल वंश का खात्मा करने की शपथ ले ली है. आदित्य चोल साम्राज्य का विस्तार करने के लिए अब राष्ट्रकूट को हराने के मकसद से आगे बढ़ चुके हैं.

एक दूसरे से प्यार करते हैं आदित्य और नंदिनी (तस्वीर- सोशल मीडिया)
एक दूसरे से प्यार करते हैं आदित्य और नंदिनी (तस्वीर- सोशल मीडिया)

दूसरी तरफ सिंघला पर जीत हासिल करने के लिए राजकुमार अरुलमोरीवर्मन अपनी विशाल नौसेना के साथ निकल चुके थे. यहां सिंघला श्रीलंका को कहा गया है.  

एक तरफ पांड्या हत्यारे पीछे पड़े हैं और दूसरी तरफ महल के भीतर तख्तापलट का षडयंत्र रचा जा रहा है. अभी राजा सुंदर चोल और उनके दोनों बेटों की जान पर खतरा मंडरा रहा है.

साम्राज्य के भीतर भला कौन रच रहा है साजिश?

पांड्या हत्यारे इनके पीछे क्यों पड़े हैं, इसकी वजह तो हमने जान ली. अब भला साम्राज्य के भीतर अपने ही लोग कौन सा षडयंत्र रच रहे हैं? अब इस बारे में जान लेते हैं. फिलहाल दोनों भाई अपने पिता और महल से दूर अलग अलग स्थानों पर साम्राज्य का विस्तार करने के लिए युद्ध लड़ने में बिजी हैं.

पूरी कहानी शुरू होती है, आदित्य करिकलन से. वो अपने दोस्त वंध्यवन से बोलते हैं कि कदंबुर जाओ और पता करो कि साम्राज्य के खिलाफ कौन सी योजना बन रही है? योजना का पता चलते ही सबसे पहले सम्राट को जाकर बताना, फिर बहन कुंदवई को और आखिर में छोटे भाई अरुलमोरीवर्मन को. वंध्यवन वहां जाते हैं, तो पता चलता है कि चोल साम्राज्य का संरक्षक और महाबली कोषाध्यक्ष पर्वतेश्वर अन्य मंत्रियों के साथ मिलकर तख्तापलट की साजिश रच रहा है.

मदुरांतकन को राजा बनाने की कोशिश (तस्वीर- सोशल मीडिया)
मदुरांतकन को राजा बनाने की कोशिश (तस्वीर- सोशल मीडिया)

साजिश ये होती है कि मदुरांतकन को राजा बनाना है. अब ये कौन है? सुंदर चोल के ताऊ के बेटे ही मदुरांतकन थे. दरअसल सुंदर चोल के ताऊ ने अपने बेटे को राजा के बजाय शिव भक्त बनाने का फैसला लिया. इसमें उनकी पत्नी ने साथ दिया. उन्होंने पूरा साम्राज्य सुंदर चोल को दे दिया था. जिनके दोनों बेटे आदित्य और अरुलमोरीवर्मन युद्ध लड़ते हुए इसका विस्तार कर रहे थे. लेकिन मदुरांतकन इससे खुश नहीं थे.

उनका कहना था कि वो शिव भक्त नहीं बनना चाहते और शासन पर उनका हक है और वो इसे हासिल करके रहेंगे. इस सबमें कुछ मंत्री और पर्वतेश्वर उनका साथ दे रहे थे. बाद में पांड्या भी इनके साथ मिल गए. वो बोलते हैं, राज्य स्थायी तौर पर सौंपा गया था. तो सुंदर चोल क्यों राज कर रहे हैं. पर्वतेश्वर का भाई सेनापति है. वहीं उसकी पत्नी है नंदिनी. उसे भी बदला लेना है. अब यहां तक आप कहानी समझ गए होंगे.

नंदिनी को किस बात का बदला लेना है?

नंदिनी को कोई मंदिर की सीढ़ियों पर छोड़ गया था. जिसके बाद मंदिर के पुरोहित ने उन्हें वहां देखा. वो वहीं मंदिर में पूजा करती और गाना गातीं. जब वो थोड़ी बड़ी हुईं, तो वो और राजा आदित्य एक दूसरे से प्यार करने लगे. मगर राजपरिवार को ये मंजूर नहीं था. उनका मानना था कि नंदिनी अनाथ है और उसका कोई वंश नहीं. एक दिन वो अचानक से गायब हो गईं.

आदित्य ने खूब ढूंढा मगर नहीं मिलीं. आदित्य की बहन ने बाद में उन्हें बताया कि उन्होंने अपनी मां से बोलकर सैनिकों की मदद से नंदिनी को कहीं और भेज दिया था. तब आदित्य ने अपनी बहन से कहा कि वो नंदिनी की सुंदरता से जलती थी, इसलिए उसने ऐसा किया.

नंदिनी को चोलों के दुश्मन वीर पांड्या ने अपने यहां शरण दी. बड़ा किया. कुछ साल बाद जब वीर पांड्या युद्ध के मैदान से भागकर एक कुटिया में आकर छिपा, तो आदित्य उसे ढूंढते हुए वहां तक आ गए और तभी उनके पैरों में पड़ी थी, उन्हीं की प्रेमिका नंदिनी. जो अचानक से गायब हो गई थीं. उसने जीवनदान मांगा. 

आदित्य से बदला लेना चाहती है नंदिनी (तस्वीर- सोशल मीडिया)
आदित्य से बदला लेना चाहती है नंदिनी (तस्वीर- सोशल मीडिया)

मगर आदित्य ने वीर पांड्या का सिर धड़ से अलग कर दिया. कुछ साल बाद नंदिनी बूढ़े पर्वतेश्वर से शादी कर लेती है. वो इसी राज्य में रहने लगीं. जिसके चलते युवराज आदित्य यहां नहीं आते. अपने ही राज्य से दूर रहने लगे. नंदिनी का मानना है कि वीर पांड्या ने उन्हें शरण दी थी, जब चोलों ने निकाल दिया. वो उसकी मौत का बदला लेने की ठान लेती हैं. 

जब राज्य पर संकट आता है, तो कुंदवई के दोनों भाई वहां नहीं होते. पिता यानी राजा सुंदर चोल उन्हें अपने भाई आदित्य को लाने को बोलते हैं, जो वापस आने से मना कर देते हैं. उन्हें अपना प्रेम याद आ जाता है. वो बहन से बोलते हैं कि जब नंदिनी अचानक गायब हो गई, 'वो मेरी पहली मौत थी.'

जब उन्होंने वीर पांड्या को मारा और वहां नंदिनी पैरों में पड़ी थी, वो जान की भीख मांग रही थी. तब का किस्सा बताते हुए कहते हैं, 'मैं दोबारा मर गया, जीवित लाश बन गया.' वो आगे बताते हैं, 'ये मदिरा, गण, रक्त भी, युद्ध भी... सब भुलाने के लिए है, उसको भुलाने, अपनेआप को भुलाने, सबको भुलाने के लिए है...' 

अब होती है पीएस की एंट्री

इसके बाद पोन्नियिन सेल्वन की एंट्री होती है. एक तरफ उनकी जान के पीछे पड़े हैं पांड्या हत्यारे. उनका मकसद दोनों भाईयों और उनके पिता को मारना है. पोन्नियिन सेल्वन सिंघला को जीत चुके होते हैं. वहां महाबोधी संगम उन्हें अपना सम्राट स्वीकार कर लेता है. वह बोलता है कि सामने सम्राट अशोक के वंशजों का सिंहासन है. लेकिन पोन्नियिन सेल्वन उसे स्वीकर करने से मना कर देते हैं. 

पोल्लियिन सेल्वन ने सबको हराया (तस्वीर- सोशल मीडिया)
पोल्लियिन सेल्वन ने सबको हराया (तस्वीर- सोशल मीडिया)

अब यहीं तक पांड्या हत्यारे मारने आ जाते हैं. तो दूसरी तरफ पर्वतेश्वर सम्राट की आज्ञा लेकर वापस लाने के बहाने से अरुलमोरीवर्मन यानी पोन्नियिन सेल्वन को बंदी बनाने की बात कहता है. इस दौरान उनके साथ वंध्यवन यानी कार्ति होते हैं. हमने कहानी में ऊपर बताया था कि आदित्य वंध्यवन को तख्तापलट की आशंका होने पर कदंबुर जाकर सब पता करने को बोलते हैं. वो वहां जाकर पर्वतेश्वर, आदित्य के चाचा मदुरांतकन और अन्य मंत्रियों की बात सुन लेते हैं. इनकी योजना पहले सम्राट को बताते हैं. फिर कुंदवई को और आखिर में अरुलमोरीवर्मन को. जब अरुलमोरीवर्मन पर हमला होता है, तो वो उनके साथ ही होते हैं. 

आदित्य चाहते हैं कि साम्राज्य पर जो भी संकट आया है, उससे उनके भाई और बहन निपट लें. वो नंदिनी के चलते वापस नहीं आना चाहते. वहीं बंदी बनाने आई सेना को कोई मार डालता है. साथ ही पांड्या हत्यारे पहले वंध्यवन और फिर अरुलमोरीवर्मन पर हमला करते हैं. दोनों पानी में डूब जाते हैं. बस पहले पार्ट में कहानी यहीं खत्म होती है. 

वंध्यवन देते हैं पोन्नियिन सेल्वन का पूरा साथ (तस्वीर- सोशल मीडिया)
वंध्यवन देते हैं पोन्नियिन सेल्वन का पूरा साथ (तस्वीर- सोशल मीडिया)

ये अपने पीछे कई सवाल छोड़ गई. क्या पोन्‍न‍िय‍िन सेल्वन जीवित बचते हैं? सफेद बालों वाली बूढ़ी औरत कौन थी? नंदिनी क्या आदित्य को मार देगी? आखिर में मुकुट किसके सिर पर होगा? क्या पर्वतेश्वर अपनी योजना में सफल होगा? क्या वाकई में तख्तापलट हो जाएगा? क्या आदित्य महल में कभी वापस लौटेंगे?

PS2 में क्या दिखाया गया है?

इस कहानी में कई सवालों के जवाब दिए गए हैं. सबसे पहले दिखाते हैं कि अरुलमोरीवर्मन यानी पोन्नियिन सेल्वन समुद्र में लापता हो गए हैं. उनकी मृत्यु की खबर हर तरफ फैल जाती है. जिसके बाद चोल साम्राज्य की गद्दी पर राज करने के लिए आदित्य और उनके चाचा मदुरांतकन के बीच होड़ लगती है. हालांकि बाद में पता चलता है कि अरुलमोरीवर्मन जीवित हैं. सफेद बालों वाली औरत मंदाकिनी है. वो गूंगी है और नंदिनी की मां है. उसी ने कई बार अरुलमोरीवर्मन की जान बचाई है, इस बार भी उन्हें पानी से निकाल लेती है. 

क्या है मंदाकिनी की कहानी?

राजा सुंदर चोल एक बार मंदाकिनी से मिले थे. इन्होंने कुछ वक्त साथ बिताया. राजा की शादी के दो साल बाद वो गर्भवती होकर चोल साम्राज्य में आई थी. बच्ची यानी नंदिनी के पैदा होने के बाद वो उसे मंदिर की सीढियों पर छोड़ गई. फिल्म में जब सुंदर चोल पर हमला होता है, तो वो खुद की पीठ पर तीर खाकर मर जाती है. तभी उसका रहस्य खुलता है. 

दरअसल पांड्याओं को पता चल गया था कि राजा चोल, मंदाकिनी को चाहने लगे हैं. राजा चोल से बदला लेने के लिए वीर पांड्या ने मंदाकिनी का रेप किया था. यही वजह है कि चोल साम्राज्य से नंदिनी को जब निकाला गया, तो वीर पांड्या ने उसे शरण दी. क्योंकि वो उसी की बेटी थी. उसने मरने से पहले अपने पांच साल के बेटे को भी नंदिनी को सौंपा और कहा कि उसे पांड्याओं का राजा बनाए. साथ ही नंदिनी से माफी मांगी. मगर नंदिनी को रेप वाली बात नहीं पता होती. ये उन्हें फिल्म के आखिर में मालूम पड़ती है. वो तो बस वीर पांड्या की मौत का बदला लेने के लिए प्रतिशोध की आग में जल रही होती हैं.

नंदिनी की मां है मंदाकिनी (तस्वीर- सोशल मीडिया)
नंदिनी की मां है मंदाकिनी (तस्वीर- सोशल मीडिया)

हालांकि युवराज आदित्य यानी नंदिनी के प्रेमी फिल्म के पहले पार्ट में वीर पांड्या को मार देते हैं. बस उसी का बदला लेने के लिए वो आदित्य को अंत में मार देती हैं.

उन्हें आदित्य को मारने के बाद पता चलता है कि उनकी मां के साथ क्या हुआ. आदित्य ने तो उनकी मां के साथ अत्याचार करने वाले को ही मारा था. वही आदित्य जो उनसे खूब प्रेम करता था. ये भी काफी दिलचस्प सीन है.

समुद्र में बहकर भी बच जाते हैं अरुलमोरीवर्मन 

PS2 फिल्म की शुरुआत में ही दिखाया गया है कि नागपट्टनम में घायल पोन्नियन सेल्वन का इलाज चल रहा है. यानी समुद्र से उन्हें जीवित निकाले जाने के बाद. उन्हें होश नहीं आ रहा. वो समुद्र की ऊंची उठती लहरों को देख रहे हैं. आंखें नहीं खोल पा रहे. तभी एक सफेद बालों वाली बूढ़ी महिला यानी नंदिनी की मां उन्हें बचा लेती है. अरुलमोरीवर्मन उसी का चेहरा बार बार याद करते हैं. और फिर अचानक एक झटके साथ उनकी आंखें खुलती हैं.

अब बौद्ध भिक्षु अरुलमोरीवर्मन का इलाज कर रहे हैं. यहां उनकी बहन कुंदवई और भाई आदित्य उनसे मिलने आते हैं. तभी आदित्य बताते है कि वह कुंदवई जा रहे हैं. उन्हें सब मना करते हैं मगर वो नहीं मानते. यहां नंदिनी उन्हें अपने पास बुलाती हैं. 

ये सीन फिल्म का सबसे धमाकेदार सीन कहा जाए तो कुछ गलत नहीं. एक कमरा है, उसमें नंदिनी और आदित्य एक बार फिर आमने सामने हैं. नंदिनी के हाथ कांप रहे हैं, वो बदले की आग को बुझाने के लिए आदित्य को मारना चाहती हैं, मगर मार नहीं पा रहीं. आंखों में आंसू हैं. तभी आदित्य बोलते हैं कि 'मेरा चेहरा देखकर मार नहीं पा रही.' तो बस वो इस मुश्किल को आसान करने के लिए सारे दिये बुझा देते हैं. अंधेरा कर देते हैं. 

आदित्य को नंदिनी ने मारा (तस्वीर- सोशल मीडिया)
आदित्य को नंदिनी ने मारा (तस्वीर- सोशल मीडिया)

वो समझ जाते हैं कि वो उन्हें मार देगी. फिर भी बहादुरी के साथ मारने को बोलते हैं. तब नंदिनी उन्हें मार देती है. उसके हाथ खून में लथपथ हैं. महल में आग लग जाती है. नंदिनी को हाथ पकड़कर वहां से बाहर ले जाया जाता है. अब आदित्य अपनी प्रेमिका से मौत मिलने के बाद वहीं जमीन पर पड़े हैं.  

वंध्यवन ने खूब जमाया अपना रंग

इस पार्ट में वंध्यवन ने अपना रंग खूब जमाया है. पहले उन पर ही आदित्य को मारने का आरोप लगता है. क्योंकि वो उस वक्त उसी स्थान पर थे, जब नंदिनी ने उन्हें मारा. हालांकि उनपर भी हमला हो जाता है, जिस वजह से वो वक्त रहते आदित्य को नहीं बचा पाते. जैसे ही वंध्यवन को होश आता है, वो घिसटते हुए आदित्य के पास पहुंचते हैं. तब तक आदित्य दुनिया छोड़ चुके हैं. वो आदित्य को गोद में उठाकर बाहर तक लेकर जाते हैं. 

फिल्म के आखिरी सीन में दिखाया गया है कि पोन्‍न‍िय‍िन सेल्वन सम्राट का मुकुट मदुरांतकन को दे देते हैं. वो इसे लेने से मना करते हैं. बस यहीं फिल्म खत्म हो जाती है. वहीं मदुरांतकन को भी अपनी गलती का एहसास हो जाता है.

अब चलते चलते फिल्म की सिनेमाटोग्राफी की बात करें तो मणिरत्नम ने फिल्म के दूसरे हिस्से को पहले से ज्यादा भव्य बनाने की कोशिश की है. इसे देखने पर ऐसा लगेगा मानो आप वक्त में पीछे चले गए हों. करीब पौने तीन घंटे की फिल्म शुरू से लेकर आखिर तक बांधे रखेगी. अगर आपने पहला पार्ट नहीं देखा है और आपको इसकी कुछ भी जानकारी नहीं है तो आप कहानी को समझने में उलझ जाएंगे. ऐसे में अगर पहला पार्ट देख लिया है, तो ही दूसरा पार्ट देखिएगा.

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