अगर आपकी नज़र में कोई घपला या भ्रष्टाचार का मामला है और आप उसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने से हिचकिचाते हैं, तो अब आपको मिलने वाला है एक नया हथियार. भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाना अब आसान होगा. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने व्हिसल ब्लोअर्स बिल को मंज़ूरी दे दी है.
इस बिल का पूरा नाम है 'पब्लिक इंफ़ोर्मेशन डिस्क्लोज़र ऐंड प्रोटेक्शन टू परसन मेकिंग डिस्क्लोज़र 2010' बिल. यानी भ्रष्टाचार की ख़बर देने वाले की पहचान हर हाल में गुप्त रखी जाएगी. अगर किसी ने पहचान ज़ाहिर की तो उसके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई होगी.
इस बिल का मकसद है भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने वाले को किसी भी तरह से जान-माल का ख़तरा न रहे. व्हिसल ब्लोअर बिल के तहत सीवीसी यानी केंद्रीय सतर्कता आयोग को नोडल एजेंसी बनाया गया है. सीवीसी के पास अदालत के अधिकार होंगे. भ्रष्टाचारियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने से अक्सर लोग इसलिए हिचकिचाते हैं, क्योंकि उन्हें अपनी हिफ़ाज़त की फ़िक्र होती है. ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जब घपले का ख़ुलासा करने वाले को अपने हौसले की क़ीमत जान देकर चुकानी पड़ी.
आरटीआई कार्यकर्ता अनिल जेठवा की हत्या को अभी ज़्यादा वक्त नहीं गुज़रा. अनिल ने गिर के जंगलों में अवैध खनन का मामला उठाया था. इंजीनियर सत्येंद्र दुबे की हत्या इसलिए कर दी गई थी क्योंकि उन्होंने सड़क परियोजना में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर प्रधानमंत्री को चिठ्ठी लिखी थी. इसी कड़ी में इंडियन ऑयल के मंजूनाथ की हत्या भी दर्ज हुई थी. मंजूनाथ ने पेट्रोल डीज़ल में मिलावट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी.