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व्यंग्य: Whatsapp पर पसरा है ज्ञान, जल्दी बटोरिए कहीं इंटरनेट पैक न खत्म हो जाए

Watsapp पर सबसे ज्यादा तो वो लोग भरे हुए हैं, जिनके घर से प्रधानमंत्री कार्यालय की हॉटलाइन जुड़ी होती है. इनके हर मैसेज पर सबसे ऊपर लिखा होता है, 'आज प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आग्रह किया है कि...' पीएम खुद भी सकते में आ सकते हैं कि बस एक बार उन्हें ये पता चल जाए कि समाजे सेवी उनके नाम का सहारा लेकर रोज लंबे-लंबे मैसेजों के जरिए Watsapp पर फलां देसी मैसेजिंग एप इस्तेमाल करने से लेकर ढिकाना शीतल पेय इस्तेमाल न करने का आग्रह कर रहे हैं.

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Watsapp पर सबसे ज्यादा तो वो लोग भरे हुए हैं, जिनके घर से प्रधानमंत्री कार्यालय की हॉटलाइन जुड़ी होती है. इनके हर मैसेज पर सबसे ऊपर लिखा होता है, 'आज प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आग्रह किया है कि...' पीएम खुद भी सकते में आ सकते हैं कि बस एक बार उन्हें ये पता चल जाए कि समाजे सेवी उनके नाम का सहारा लेकर रोज लंबे-लंबे मैसेजों के जरिए Watsapp पर फलां देसी मैसेजिंग एप इस्तेमाल करने से लेकर ढिकाना शीतल पेय इस्तेमाल न करने का आग्रह कर रहे हैं.

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Watsapp पर इसके बाद डरपोक लोगों की बारी आती है. इनका हर मैसेज ‘शाम तक नहीं भेजा तो बुरी खबर मिलेगी..' या 'सॉरी यार, शेयर करना पड़ा..मां का सवाल है' लिए होता है. इसी के साथ उन लोगों की भी कोई कमी नहीं है. जो दुम की तरह ‘मार्केट में नया है, जल्दी शेयर करो’ लगाकर मैसेज भेजते हैं. इनके मैसेज के साथ साईं बाबा और शनिदेव भी खूब आते हैं.

इन संदेशों में इस बात का विश्वास भी दिलाया जाता है कि अगर ग्यारह लोगों को ये मैसेज भेजा तो पक्का अच्छी खबर मिलेगी. जिंदगी जब जम कर मजे लेती है तो कभी-कभी ख्याल आता है. शायद इसीलिए मेरे कोई काम नहीं बनते क्योंकि मैंने कभी साईं बाबा का मैसेज ग्यारह लोगों को नहीं भेजा. ऐसा नही है कि Watsapp पर सिर्फ सिरदर्द देने वाले लोग बसे हैं. समाज का भला चाहने वाले लोग भी हैं. उन लोगों को देखिए जो हर दूसरे-तीसरे दिन ये बताते रहते हैं कि ‘ये वाला कोल्डड्रिंक मत पीजिए. उसमें उसी कंपनी के एक कर्मचारी ने अपना एचआईवी संक्रमित खून मिला दिया है. फलाना न्यूज चैनल पर खबर भी आ रही है’. अब भले पिछले पांच सालों में मेल-मैसेज से यही संदेश सैकड़ों बार आप तक पहुंचा हो. पर अगले की भलमनसाहत इससे कम तो नहीं ही होती है न?

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दूसरे के भले के लिए लोग कितने फिक्रमंद होते हैं इसकी बानगी देखिए. युगांडा की आईसीयू में एडमिट बच्ची की फोटो और कैप्शन का स्क्रीनशॉट फेसबुक से उठाकर Watsapp पर डालकर लोग आपको ज्यादा से ज्यादा शेयर करने को कहते हैं. ताकि हर शेयर के बदले उस बच्ची के मां-बाप को माइक्रोसॉफ्ट वाले डेढ़ डॉलर दे सकें. बात यहीं खत्म नहीं होती, साथ में ये भी कहा जाता है कि 'अगर मैसेज फ्री हो तो हर ग्रुप पर शेयर करो. आपका एक शेयर किसी की जान बचा सकता है!' कसम से आंसू आ जाते हैं आंखों में किसी की जान बचाने का मौका पाकर. दो आंसू और ये सोचकर आ जाते हैं कि अगला दुनिया के भले की जल्दी में दिमाग भी घर पर छोड़ आया है. जब उसके Watsapp पर मैसेज फ्री हैं तो हमसे कोई क्यों पैसे एंठेगा?

जिंदगी में जो कभी जनरल नॉलेज की क्लास में खड़े होकर एक सवाल का जवाब नहीं दे पाते हैं. वो Watsapp पर ‘आईएएस के इंटरव्यू में पूछा गया सवाल’ पूछते रहते हैं. कभी-कभी लगता है कि नाहक ही लोग प्रतियोगिता दर्पण और लूसेंट घोटते हैं. सारा ज्ञान तो Watsapp पर पसरा है.

(युवा व्यंग्यकार आशीष मिश्र पेशे से इंजीनियर हैं और इंदौर में रहते हैं.)

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