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निकल ना जाए मौका, 50,000 साल में पहली बार दिखेगी ये चीज

अंतरिक्ष से आने वाला ये धूमकेतु पृथ्वी के पास से गुजरेगा. इसे नंगी आंखों से भी देखा जा सकता है. इस धूमकेतु का नाम C/2022 E3 (ZTF) है. ऐसा नजारा 50,000 साल में पहली बार देखने को मिल रहा है. यह धूमकेतु काफी अधिक चमकीला हो सकता है. उत्तरी गोलार्ध में लोग इसे सुबह के वक्त आसमान में देख पाएंगे.

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इस धूमकेतु के देखे जाने को बेहद खास माना जा रहा है (प्रतीकात्मक फोटो)
इस धूमकेतु के देखे जाने को बेहद खास माना जा रहा है (प्रतीकात्मक फोटो)

अंतरिक्ष के क्षेत्र में रुचि रखने वालों के लिए एक अच्छी खबर है. जल्द ही कुछ ऐसा होने वाला है, जो 50,000 साल में पहले कभी नहीं हुआ. अंतरिक्ष से आने वाला एक विशाल धूमकेतु सूर्य से होते हुए पृथ्वी के पास से गुजरेगा. इसे धरती पर मौजूद लोग नंगी आंखों से देख सकेंगे. इसके पृथ्वी के पास से 1 फरवरी को गुजरने की संभावना है. अगर आप इसे देखना चाहते हैं तो दूरबीन की मदद भी ले सकते हैं. आपके पास दूरबीन नहीं है तो भी आप इसे देख पाएंगे.

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अगर उस दिन चांद पूरा निकलता है कि तो इसे देखना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. इस धूमकेतु का पता अमेरिका के कैलिफोर्निया की ज्विकी ट्रांजिएंट फैसिलिटी ने लगाया था. उसने इसे पहली बार बीते साल मार्च महीने में बृहस्पति ग्रह के पास से गुजरते देखा था. इसके बाद धूमकेतु का नाम C/2022 E3 (ZTF) रखा गया. पेरिस ऑब्जरवेटरी में खगोल वैज्ञानिक निकोलस बीवर का कहना है कि धूमकेतु बर्फ, गैस और चट्टान से बने होते हैं और हरे रंग की रोशनी का उत्सर्जन करते हैं.

बेहद चमकीला हो सकता है धूमकेतु

पृथ्वी के पास से गुजरेगा धूमकेतु

ऐसा अनुमान है कि इस धूमकेतु का व्यास एक किलोमीटर है जो इसे NEOWISE (नंगी आंखों से आखिरी बार देखा गया धूमकेतु) से छोटा बनाता है. ये धूमकेतु मार्च 2020 में पृथ्वी के पास से गुजरा था. वहीं 60 किलोमीटर के व्यास वाला Hale-Bopp धूमकेतु भी इससे बड़ा है, जो 1997 में पृथ्वी के पास से गुजरा था. ऐसे में इसके ज्यादा बड़ा होने की संभावना नहीं है. हालांकि इसमें अनुमान से ज्यादा चमक हो सकती है. उत्तरी गोलार्ध में लोग इसे सुबह के वक्त आसमान में देख पाएंगे.

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ऐसा माना जा रहा है कि धूमकेतु Oort Cloud से आ रहा है, यह सौर मंडल के चारों ओर मौजूद एक विशालकाय क्षेत्र है, जो रहस्यमय बर्फीली वस्तुओं का घर है. पिछली बार जब धूमकेतु पृथ्वी के करीब से गुजरा था, तब वह पुरापाषाण काल ​​के दौरान हुआ था.

बीवर ने कहा कि ऐसी संभावना है कि इसके बाद धूमकेतु "सौर मंडल से स्थायी रूप से बाहर हो गए थे." खगोल वैज्ञानिक ने आगे बताया, इसे जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से करीब से देखा जाएगा. हालांकि वह धूमकेतु की तस्वीरें नहीं लेगा बल्कि इसकी संरचना का अध्ययन करेगा.  

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