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मुझे नौकरी से निकाला क्योंकि..., स्कूल ने टीचर को किया फायर, तो छात्रों के लिए छोड़ा ये मैसेज

17 सालों से एक स्कूल में पढ़ा रही एक टीचर को एक बेतुके नियम को फॉलो न करने के नाम पर नौकरी से निकाल दिया गया. टीचर ने स्कूल के आखिरी दिन छात्रों के लिए बोर्ड पर एक खास मैसेज छोड़ा जो कि वायरल हो गया है.

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फोटो- फेसबुक
फोटो- फेसबुक

स्कूलों में अक्सर कुछ टीचर पढ़ाई को लेकर काफी सख्त होते हैं. वे अपने छात्रों से बेहद प्यार करते हैं लेकिन पढ़ाई में ढिलाई कतई बर्दाश्त नहीं करते.  फ्लोरिडा के पोर्ट सेंट लूसी में एक हाई स्कूल में 17 साल से काम कर रही महिला टीचर टिराडो को अचानक ही स्कूल प्रशासन ने निकाल दिया.

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'सीनियर टीचर से बहस के बाद...'

टिराडो को स्कूल का अजीब नियम फॉलो न करने के लिए फायर कर दिया गया. हालांकि 17 सालों में उन्हें इस अनोखे नियम का सामना कभी नहीं करना पड़ा था. बेतुके नियम को लेकर जब उन्होंने सीनियर टीचर से बहस की तो उनका कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया गया.

'छात्र परीक्षा में कुछ न लिखे फिर भी...'
 
नियम यह था कि स्कूल के स्टूडेंट्स और पेरेंट्स हैंडबुक के अनुसार, किसी भी शिक्षक को किसी छात्र को 50 प्रतिशत से कम अंक देने की अनुमति नहीं है - भले ही उसने परीक्षा में कुछ न लिखा हो. लेकिन टिराडो ने कुछ न लिखने वाले बच्चों को मुफ्त में 50 प्रतिशत अंक नहीं दिए. 

आखिरी दिन छात्रों के लिए लिखा खास मैसेज

फिर इसको लेकर सीनियर से बहस के बाद बिना किसी आधिकारिक कारण के उन्हें टर्मिनेशन नोटिस प्राप्त हुआ. इसके बाद जब वह नोटिस पीरियड में थी तो स्कूल के आखिरी दिन उन्होंने अपने छात्रों के लिए एक दुखद विदाई संदेश क्लास के व्हाइट बोर्ड पर लिखा और चली गईं. 

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'मुझे काम से निकाल दिया क्योंकि...'

इसमें लिखा था- "बाय बच्चों, मिसेज टिराडो आपसे प्यार करती हैं और आपको जीवन में शुभकामनाएं देती हैं! मुझे कोई प्रोजेक्ट न सब्मिट करने पर भी आपको 50% अंक, देने के लिए कहा जा रहा है. इससे इनकार करने पर मुझे काम से निकाल दिया गया. [लव] मिसेज टिराडो". उन्होंने इस बोर्ड की एक तस्वीर फेसबुक पर पोस्ट की. बाद में यह पोस्ट वायरल हो गई और इसे 2,000 से अधिक लाइक्स मिले.

'मुझे दो बार लिखना पड़ा मैसेज'
 
पोस्ट के नीचे कमेंट में, टीचर ने खुलासा किया कि उन्हें बोर्ड पर संदेश दो बार लिखना पड़ा क्योंकि स्कूल के कर्मचारियों ने पहली बार इसे मिटा दिया था. उन्होंने कहा कि उनके कॉन्ट्रैक्ट में मार्किंग के बारे में कुछ भी मेंशन नहीं किया गया था और उन्होंने इस टर्मिनेशन के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए अपने स्थानीय शिक्षक संघ और एक वकील से संपर्क किया है.

'बिना कुछ किए कुछ नहीं मिलता'

अमेरिकी समाचार चैनल डब्लूएलओएस पर बोलते हुए, टीचर ने कहा: "अगर ग्रेड देने के लिए बच्चे ने कुछ किया ही नहीं है, तो मैं किसी को 50 प्रतिशत कैसे दे सकती हूं? मैं इस तथ्य पर बहस कर रहा हूं कि आपको बिना कुछ किए कुछ नहीं मिलता है. मैं चाहती हूं कि ये नियम बदल जाए." फेसबुक पेज पर अन्य लोगों ने उस समय टीचर के फैसले की सराहना की. एक फेसबुक यूजर ने लिखा: "अगर यह सच है तो मैं भी नौकरी से बाहर हो जाऊंगा."

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स्कूल ने बताई प्रोफेश्नलिज्म की कमी

इधर, उनके अनुबंध की समाप्ति के बाद, स्कूल जिले के एक प्रवक्ता ने कहा- "टिराडो को टीचर के रूप में फायर कर दिया गया था क्योंकि उनके प्रदर्शन को सब स्टैंडर्ड माना गया था और छात्रों, कर्मचारियों और माता-पिता के साथ उनकी बातचीत में प्रोफेश्नलिज्म की कमी थी और उन्होंने एक स्कूल के परिसर में टॉक्सिक माहौल बना रखा था ." प्रवक्ता ने स्कूलों की ग्रेडिंग नीति का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया कि "किसी शिक्षक को काम नहीं करने पर शून्य अंक देने से रोकने वाली कोई नीति नहीं है."

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