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कंपनी ने लगाया जासूसी सॉफ्टवेयर, महिला कर्मचारी की खुली पोल

टाइम-ट्रैकिंग सॉफ़्टवेयर के जरिये कंपनी महिला कर्मचारी की गतिविधि रिकॉर्ड कर रही थी. जहां उसके सामान्य काम करने की गति और ट्रैकिंग के वक्त काम करने में विसंगति देखने को मिली. बाद में पता चला कि महिला अपनी ड्यूटी के दौरान वक्त बर्बाद कर रही थी. ऐसे में उस पर एक्शन लिया गया.

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वर्क फ्रॉम होम करती महिला (सांकेतिक फोटो- गेटी)
वर्क फ्रॉम होम करती महिला (सांकेतिक फोटो- गेटी)

वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) के दौरान टाइम पास करना एक महिला कर्मचारी को भारी पड़ गया. कंपनी ने एक स्पाई सॉफ्टवेयर के जरिए महिला की 'कामचोरी' पकड़ ली. रंगेहाथ पकड़े जाने के बाद कंपनी ने उस पर एक्शन लिया. मामला कोर्ट जा पहुंचा. जहां अब महिला को हर्जाना देने का आदेश दिया गया है. मामला कनाडा के वैंकूवर का है. 

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CBS न्यूज के मुताबिक, टाइम-ट्रैकिंग सॉफ़्टवेयर के जरिये वर्क फ्रॉम होम करते वक्त कर्मचारियों की गतिविधियों को ट्रैक किया जा रहा था. महिला कंपनी में अकाउंटेंट का काम करती थी. उसका नाम कार्ली बेसे है. कंपनी ने TimeCamp नाम के सॉफ्टवेयर की मदद से पता लगाया कि कार्ली अपनी ड्यूटी के दौरान वक्त बर्बाद कर रही थी.

ऐसे में उसे बिना नोटिस दिए नौकरी से निकाल दिया गया. कंपनी के इस फैसले के खिलाफ कार्ली ने कोर्ट का रुख किया और 2 लाख 12 हजार रुपये हर्जाना देने की मांग की. 

हालांकि, कोर्ट में कंपनी की ओर से बताया कि कार्ली को ड्यूटी आवर्स में टाइम वेस्ट करते हुए पाया गया था. इसी के चलते उसे नौकरी से निकाला गया. कंपनी ने यह भी बताया कि कार्ली 50 घंटे काम करने का दावा करती थी, लेकिन उसका दावा पूरी तरह से गलत निकला जिसका पूरा रिकॉर्ड है. 

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इतना ही नहीं कंपनी ने कार्ली पर हेरफेर का भी आरोप लगाया. इसके लिए कंपनी ने बाकायदा सॉफ्टवेयर डेटा के साथ सबूत दिए. जिसके बाद कोर्ट ने कर्मचारी का दावा खारिज करते हुए उसे उल्टा कंपनी को 2 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया. हालांकि, कुछ आलोचकों का कहना है कि इस तरह की निगरानी या जासूसी करना, कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है. 

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