समानता और रंगभेद से निजात की बातें कहने, सुनने, पढ़ने में तो अच्छी लगती हैं लेकिन मुश्किल तब आती है, जब उन्हें जमीन पर लाना हो. अमली जामा पहनना हो. आयरलैंड सुर्ख़ियों में है. कारण है इंटरनेट पर वायरल एक ऐसा वीडियो जो समानता को ठेंगा दिखाते हुए रंगभेद को बढ़ावा दे रहा है. वीडियो मार्च 2022 का है, जहां डबलिन में आयोजित एक जिमस्टार्ट कार्यक्रम में जो हुआ उसने एक बार फिर नस्लवाद और रंगभेद को लेकर बहस तेज कर दी है.
वीडियो में दिख रहा है कि एक प्रोग्राम में बच्चों को सम्मानित करते हुए आयोजकों द्वारा एक 'ब्लैक' बच्ची को नजरअंदाज किया गया. आयोजनकर्ताओं ने एक-एक कर सभी बच्चों को मेडल पहनाया. लेकिन जब बारी एक अश्वेत बच्ची की आई तो मैडल पहनाने वाली महिला आगे बढ़ गई. घटना भले ही थोड़ी पुरानी हो. मगर क्योंकि फिर एक बार इसका वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, लोगों ने इस अहम मुद्दे पर अपनी अपनी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है.
वायरल वीडियो पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए चार बार की ओलंपिक चैंपियन सिमोन बाइल्स ने कहा है कि जिस तरह का सुलूक एक अश्वेत बच्ची के साथ हुआ है उससे उनका दिल टूट गया. इस मामले के सामने आने के बाद जिमनास्टिक्स आयरलैंड ने एक बयान जारी कर कहा है कि उन्हें मार्च 2022 में लड़की के माता-पिता से नस्लवादी व्यवहार का आरोप लगाते हुए एक शिकायत मिली थी.
घटना की जांच कर रहे जिमनास्टिक्स आयरलैंड के एक जांच अधिकारी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और इस पर अपना दुःख जाहिर किया है. संगठन ने कहा कि ऑफिसर्स की ओर से इस मामले के तहत एक लिखित माफीनामा जारी किया गया है. साथ ही ये भी बताया गया कि समारोह के बाद लड़की को अपना पदक मिल गया है.
हालांकि, आयरिश इंडिपेंडेंट ने लड़की की मां के हवाले से कहा कि जिम्नास्टिक आयरलैंड सार्वजनिक रूप से माफी मांगने में विफल रहा है. वहीं लड़की की मां ने ये भी कहा है कि वह इस मामले को स्विट्जरलैंड में जिमनास्टिक एथिक्स फाउंडेशन के पास लेकर गई हैं.
लड़की के परिवार ने मुख़र होकर इस बात को दोहराया कि उनकी बेटी को नजरअंदाज कर दिया गया क्योंकि वो काली है. लड़की की मां के मुताबिक अक्सर जिम्नास्टिक आयोजनों में हम अकेले अश्वेत परिवार होते हैं और फिर जो वहां हमारे साथ होता है वो काफी दुखदायी रहता है.
बहरहाल इंटरनेट पर वायरल इस वीडियो को अब तक आठ मिलियन से ज्यादा लोग देख चुके हैं. लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और कहा जा रहा है कि रंगभेद या नस्लवाद कम से कम खेल की दुनिया में तो शोभा नहीं देता.