मथुरा प्रशासन ने शाही ईदगाह मस्जिद का बिजली कनेक्शन काट दिया है. इसके अलावा प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मस्जिद प्रबंधन के खिलाफ केस भी दर्ज कर लिया है. दरअसल, ये एक्शन मथुरा की शाही मस्जिद में अवैध बिजली कनेक्शन होने की शिकायत मिलने पर लिया गया था. इसके साथ ही शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के सचिव तनवीर अहमद से जुर्माना भी वसूला गया है.
सरकार की तरफ से जारी किए गए बयान के मुताबिक राज्य में अवैध बिजली कनेक्शनों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई है. बयान के मुताबिक कनेक्शन काटने का काम मथुरा जिला पुलिस और बिजली विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से किया. इस मामले में कृष्णा नगर थाने में केस दर्ज किया गया है.
बयान के मुताबिक श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट की शिकायत पर कार्रवाई की गई है. बता दें कि शाही ईदगाह मस्जिद का श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के साथ मस्जिद की संपत्ति को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है.
13.37 एकड़ जमीन पर मालिकाना हक का केस
ऐसा दावा है कि औरंगजेब ने श्रीकृष्ण जन्मस्थली पर बने प्राचीन केशवनाथ मंदिर को नष्ट कर 1669-70 में शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण कराया था. बहरहाल 1935 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 13.37 एकड़ की विवादित भूमि बनारस के राजा कृष्ण दास को अलॉट कर दी थी.
1951 में श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट ने यह भूमि अधिग्रहीत कर ली थी. ट्रस्ट 1958 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और 1977 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के नाम से रजिस्टर्ड हुआ. 1968 में श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही ईदगाह कमेटी के बीच हुए समझौते में 13.37 एकड़ जमीन का स्वामित्व ट्रस्ट को मिला और ईदगाह मस्जिद का मैनेजमेंट ईदगाह कमेटी को दे दिया गया.
दावा किया जा रहा है कि 12 अक्टूबर 1968 को श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह ट्रस्ट के साथ हुए समझौते में 13.7 एकड़ जमीन पर मंदिर और मस्जिद दोनों रहने की बात तय हुई थी, लेकिन अभी श्रीकृष्ण जन्मस्थान के पास 10.9 एकड़ जमीन का मालिकाना हक है, जबकि ढाई एकड़ जमीन का मालिकाना हक शाही ईदगाह मस्जिद के पास है.
हिंदू पक्ष शाही ईदगाह मस्जिद को अवैध तरीके से कब्जा करके बनाया गया ढांचा मानता है और इस जमीन पर भी दावा करता है. हिंदू पक्ष की ओर से शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने और ये जमीन भी श्रीकृष्ण जन्मस्थान को देने की मांग की गई है.