गैंगस्टर मामले में जेल में बंद अफजाल अंसारी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से राहत मिली है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी जमानत मंजूर कर ली है. लेकिन सजा पर रोक बरकरार रहेगी. बीते 29 अप्रैल को गाजीपुर जिला अदालत ने अफजाल अंसारी को 4 साल की सजा सुनाई थी.
हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने अफजाल अंसारी की जमानत मंजूर तो कर ली, लेकिन सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. दरअसल, सजा पर रोक नहीं लगने से अफजाल अंसारी की सांसदी बहाल नहीं होगी. गाजीपुर जेल में बंद अफजाल अंसारी पर दर्ज अन्य केस में जमानत नहीं मिलने से रिहाई नहीं हो सकेगी.
अफजाल अंसारी की ओर से गैंगस्टर मामले में मिली 4 साल की सजा पर रोक लगाए जाने और जमानत पर जेल से रिहा किए जाने की मांग में याचिका दाखिल की गई थी. जस्टिस राजबीर सिंह की सिंगल बेंच ने सोमवार को याचिका पर फैसला सुनाया.
गाजीपुर की विशेष अदालत ने 29 अप्रैल, 2023 को दिए अपने निर्णय में 2007 के गैंगस्टर के एक मामले में मुख्तार अंसारी के साथ अफजाल अंसारी को दोषी करार दिया था और अफजाल को चार साल एवं मुख्तार को 10 साल के कारावास की सजा सुनाई थी. अदालत के इस निर्णय के बाद अफजाल अंसारी की सांसदी भी चली गई.
क्या है जनप्रतिनिधि कानून?
बता दें कि दो साल से ज्यादा की सजा मिलने पर जनप्रतिनिधि कानून के तहत सदन की सदस्यता चली जाती है. हाल ही में राहुल गांधी को जब कोर्ट ने 2 साल की सजा सुनाई गई थी तो उसके बाद उनकी लोकसभा सदस्यता चले गई थी.
1951 में जनप्रतिनिधि कानून आया था. इस कानून की धारा 8 में लिखा है कि अगर किसी सांसद या विधायक को आपराधिक मामले में दोषी ठहराया जाता है, तो जिस दिन उसे दोषी ठहराया जाएगा, तब से लेकर अगले 6 साल तक वो चुनाव नहीं लड़ सकेगा. धारा 8(1) में उन अपराधों का जिक्र है जिसके तहत दोषी ठहराए जाने पर चुनाव लड़ने पर रोक लग जाती है. इसके तहत, दो समुदायों के बीच घृणा बढ़ाना, भ्रष्टाचार, दुष्कर्म जैसे अपराधों में दोषी ठहराए जाने पर चुनाव नहीं लड़ सकते. हालांकि, इसमें मानहानि का जिक्र नहीं है.