यूपी के आगरा में जूता कारोबारियों पर आयकर विभाग की छापेमारी लगातार तीसरे दिन भी जारी है. सूत्रों के मुताबिक, अभी तक 53 करोड़ रुपये कैश जब्त किया जा चुका है. कारोबारियों के यहां बेड-गद्दों तक में पैसे छिपाए गए थे, जिन्हें गिनने के लिए आधा दर्जन से मशीनें लगाई गई हैं. फिलहाल, आयकर विभाग की कार्रवाई चल रही है.
सूत्रों के मुताबिक, जिन कारोबारी के यहां छापा पड़ा है उनकी कंपनी मुख्य रूप से नकद में काम करती है. खासतौर पर छोटे विक्रेताओं के साथ. इसके लिए कंपनी 'पर्ची सिस्टम' का इस्तेमाल करती थी, पूरा काम ब्लैक में होता था. पर्चियों के जरिए हिसाब-किताब रखा जाता था. पक्की रसीद या बिल का यूज नहीं होता था.
बता दें कि आयकर विभाग ने मुख्य रूप से हरमिलाप ट्रेडर्स और इसके साथ व्यापारिक संबंध रखने वाली कंपनियों जैसे एमजी रोड स्थित बीके शूज, धाकरन स्थित मंशू फुटवियर पर छापेमारी की है. हरमिलाप ट्रेडर्स के मालिक के घर से छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकदी बरामद की गई है.
आयकर विभाग ने छापेमारी के दौरान ऐसी पर्चियां बरामद की हैं जिससे पलक झपकते ही लाखों करोड़ों का लेन देन हो जाता था.
इन पर्चियों के सामने आने से शहर के बाकी व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है. इन पर्चियों में बाकी व्यापारियों से लेनदेन की जानकारी है. जिसके आधार पर आयकर विभाग बाकी व्यापारियों के टर्नओवर का आंकलन कर सकता है.
इस कारोबार में नकद का भुगतान पर्चियों से होता है. चूंकि, कानपुर में 7 मई को मतदान था, ऐसे में पर्चियां नहीं भुनाई जा सकीं और वो आयकर विभाग के हत्थे चढ़ गईं. चुनाव के बाद पर्चियां भुनाए जाने की सूचना और टैक्स में हेराफेरी की शिकायत आयकर अधिकारियों तक पहुंच गई, जिसके बाद अधिकारियों को कार्रवाई करने का ये सबसे उचित समय लगा. इस छापेमारी में पर्चियों से टैक्स की हेराफेरी का पर्दाफाश हुआ है.
बता दें कि आयकर विभाग की टीम ने टेंट हाउस से गद्दे, चद्दर आदि मंगाए हैं, जिन्हें छापेमारी वाली जगह पर बिछाया गया. टेंट से मंगाए बिस्तर पर ही टीम में शामिल पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों ने रात गुजारी.
फिलहाल, आयकर विभाग ने कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिये हैं. रियल एस्टेट और बड़ी लैंड डील से जुड़े कागजात भी मिले हैं. आयकर विभाग ने भारतीय स्टेट बैंक के कर्मचारियों के साथ ही नोट गिनने की आधा दर्जन से अधिक मशीनें मंगाई हैं. टीम रविवार को पूरी रात नोट गिनती रही.
गौरतलब है कि जूता कारोबारियों के यहां आयकर विभाग के सर्च करने के पीछे अवैध रूप से चलने वाले पर्ची कारोबार को बताया जा रहा है. घरेलू जूता कारोबार उधार पर अधिक निर्भर करता है. ट्रेडर्स और बड़े कारोबारी छोटे कारोबारियों को तुरंत भुगतान के बजाय पर्ची बनाकर दे देते हैं, इस पर तारीख और अवधि लिखी होती है. नियत तारीख पर पर्ची देने वाले बड़े कारोबारी से छोटे कारोबारी भुगतान प्राप्त कर लेते हैं. यह पूरा काम नंबर दो में चलता है.