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आगरा में 'डिजिटल अरेस्ट' गैंग का भंडाफोड़, राजस्थान से दो आरोपी गिरफ्तार

आगरा में डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगी करने वाले गैंग का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. राजस्थान के कोटा से दो आरोपियों आरिफ और दिव्यांश को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, दिव्यांश एक निजी बैंक में मैनेजर के रूप में कार्यरत था और उसने आरिफ की मदद से ठगी के लिए बैंक खाता खुलवाया था. यही वह खाता था, जिसमें पीड़ित महिला से पैसे ट्रांसफर कराए गए थे.

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यूपी के आगरा में डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगी करने वाले गैंग का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने ठगी के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ करते हुए राजस्थान से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

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न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने बताया कि ये आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डराते थे और उनसे मोटी रकम वसूलते थे. जांच में यह भी पता चला है कि ठगी की गई राशि विदेशों में ट्रांसफर की गई थी.

कैसे करते थे ठगी?

बता दें कि 'डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक नया तरीका है जिसमें ठग खुद को कानून प्रवर्तन अधिकारी बताकर लोगों को फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं. वो पीड़ितों को ड्रग तस्करी या मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर अपराधों में फंसाने की धमकी देकर उनसे पैसों की मांग करते हैं. डर के कारण पीड़ित तुरंत उनके बताए बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं.

कैसे हुआ खुलासा?

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब आगरा निवासी निजहत खातून को 16 जनवरी को एक फोन कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए उन पर ड्रग तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया, साथ ही, उनसे यह भी कहा गया कि अगर वो कानूनी पचड़े से बचना चाहती हैं, तो उन्हें एक निश्चित राशि का भुगतान करना होगा.

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डर के कारण खातून ने 2.8 लाख रुपये उस खाते में ट्रांसफर कर दिए, जिसका विवरण उन्हें कॉल पर दिया गया था. कुछ दिन बाद जब उन्हें ठगी का अहसास हुआ, तो उन्होंने 20 जनवरी को साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई.

राजस्थान से दो आरोपी गिरफ्तार

जांच के दौरान पुलिस ने राजस्थान के कोटा से दो आरोपियों आरिफ और दिव्यांश को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, दिव्यांश एक निजी बैंक में मैनेजर के रूप में कार्यरत था और उसने आरिफ की मदद से ठगी के लिए बैंक खाता खुलवाया था. यही वह खाता था, जिसमें निजहत खातून के पैसे ट्रांसफर किए गए थे.

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि ठगी के जरिए प्राप्त किए गए पैसे विदेश भेजे गए थे. डीसीपी सिटी सूरज राय ने कहा, "यह डिजिटल अरेस्ट कई लोगों की मिलीभगत से चल रहा था, हमारी टीम अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां की जाएंगी.'

 

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