उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय जातिगत जनगणना को लेकर सियासत तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी पिछले कई दिनों से इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर निशाना साध रही है, योगी सरकार से कड़े सवाल पूछ रही है. इसी कड़ी में अब नेता प्रतिपक्ष और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जातिगत जनगणना को लेकर एक नया दांव चल दिया है. उनकी तरफ से सदन में ही खुलकर इस मुद्दे पर विरोधियों का समर्थन मांगा गया है.
अखिलेश यादव का बड़ा सियासी दांव
नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने सदन में ही जातिगत जनगणना के लिए सपोर्ट मांगा है. उनकी तरफ से ओम प्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद से पूछा गया कि क्या वे जातिगत जनगणना नहीं चाहते. इस पर राजभर ने जवाब दिया कि आप ही ने हमको भगा दिया था. इस तंज पर अखिलेश ने खुलकर कुछ नहीं बोला और सिर्फ बाद में बात करने की बात कर दी. बाद में अखिलेश ने जातिगत जनगणना को लेकर संजय निषाद से भी समर्थन मांगा. इस पर निषाद ने दो टूक कहा कि आपने अपनी सरकार में हमारा हक मारा था और अब जातिगत जनगणना की बात कर रहे हैं.
वैसे सदन में अखिलेश ने बीएसपी के इकलौते विधायक उमाशंकर से भी जातिगत जनगणना को लेकर सपोर्ट मांगा था. लेकिन बाद में खुद ही कह दिया कि उन्हें तो पहले किसी और से पूछना पड़ेगा. उनकी तरफ से बिना नाम लिए मायावती पर निशाना साधा गया. सदन में सपा प्रमुख ने बीजेपी की साथी अपना दल को भी अपने पाले में करने की कोशिश की. उनकी तरफ से अपना दल से भी समर्थन मांगा गया. उन्होंने जोर देकर कहा कि बीजेपी के सहयोगी दल भी जातिगत जनगणना चाहते हैं. जानकारी के लिए बता दें कि यूपी में जातिगत जनगणना को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है.
बीजेपी की क्या प्रतिक्रिया?
कुछ दिन पहले ही केशव प्रसाद मौर्य ने कहा था कि जातीय जनगणना की बात केवल ढोंग है, जब सरकार में थे तब मौनी बाबा अब बाहर तब मांग केवल 2024 में चुनावी लाभ के लिए है जो नहीं मिलेगा, पहले अखिलेश यादव समाप्त हो रही सपा को बचाने का अध्यक्ष पद किसी और को सौंप जातिगत न्याय की शुरुआत संगठन से करें फिर ये बात करें.