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'ऋचा राजपूत को जेल नहीं भेजना, FIR दर्ज कर लें', बोले अखिलेश यादव

अखिलेश यादव ने कहा कि मैने पुलिस से कहा कि रिचा राजपूत ने ट्विटर पर लिखा जरूर है लेकिन बीजेपी के बड़े नेताओं के कहने से लिखा होगा, कोई न कोई उसके पीछे खड़ा है इसलिए इसको माफ कर दें, आप एफआईआर जरूर दर्ज कर लें लेकिन जेल भेजना ज़रूरी नही है.

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव
सपा प्रमुख अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच में चल रहा ट्विटर वॉर तो थम गया है, लेकिन बयानबाजी का दौर अभी भी जारी है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अब बीजेपी युवा मोर्चा की सोशल मीडिया प्रभारी ऋचा राजपूत को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने ऋचा के जेल जाने का समर्थन नहीं किया है. उनकी तरफ से जोर देकर कहा गया है कि FIR दर्ज की जा सकती है, लेकिन उन्हें जेल भेजने की कोई जरूरत नहीं है.

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अखिलेश यादव ने कहा कि मैने पुलिस से कहा कि रिचा राजपूत ने ट्विटर पर लिखा जरूर है लेकिन बीजेपी के बड़े नेताओं के कहने से लिखा होगा, कोई न कोई उसके पीछे खड़ा है इसलिए इसको माफ कर दें, आप एफआईआर जरूर दर्ज कर लें लेकिन जेल भेजना ज़रूरी नही है, हमारी ऐसी कोई शर्त नहीं है. बीजेपी के लोग होशियारी का काम करते हैं, धर्म और जाति का भी रूप दे सकते हैं, किससे क्या ट्वीट करवाया इसका भी अलग खेल है. अब जानकारी के लिए बता दें कि ये सारा विवाद सपा का सोशल मीडिया चलाने वाले मनीष जगन अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुआ था. असल में ऋचा राजपूत ने आरोप लगाया था कि सपा के ट्विटर हैंडल से उनके खिलाफ अपशब्द बोले गए हैं. विवादित बयान दिए गए हैं. उसी आधार पर शिकायत दर्ज हुई और पुलिस ने मनीष को गिरफ्तार कर लिया.

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लेकिन उस गिरफ्तारी के तुरंत बाद अखिलेश यादव पुलिस थाने पहुंच गए. उनके पास एक पीले रंग का लिफाफा भी था. अब दावा ये किया जा रहा है कि उस लिफाफे के बाद ये पूरा विवाद थम गया. मनीष भी जेल से बाहर आ गए और बीजेपी की तरफ से भी ज्यादा टीका टिप्पणी नहीं की गई. बताया जा रहा है कि उस लिफाफे में अखिलेश यादव एक पूरा ब्योरा लेकर आए थे. वो ब्योरा उन सबूतों का था जहां पर डिंपल यादव को लेकर बीजेपी सेल द्वारा कई तरह के ट्वीट किए गए थे. मांग ये की गई थी कि ऋचा राजपूत पर भी एक्शन हो, उनकी भी गिरफ्तारी हो. अब उसी मामले में अखिलेश यादव ने कहा है कि ऋचा को गिरफ्तार करने की जरूरत नहीं है. 

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