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मैनपुरी की जीत और पार्टी के विलय का शिवपाल को मिलेगा रिटर्न गिफ्ट? अखिलेश ने तय की ये भूमिका

मैनपुरी उपचुनाव के बाद शिवपाल यादव ने अपनी पार्टी प्रसपा का विलय सपा में कर दिया था, जिसके बाद अखिलेश यादव ने उन्हें अहम जिम्मेदारी देने की बात कही थी. अब दो महीने के बाद अखिलेश यादव ने सोमवार को चाचा शिवपाल से मुलाकात की है और माना जा रहा है कि अब उनको राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी मिल सकती है.

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अखिलेश यादव
अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी की सियासत में शिवपाल यादव का रुतबा एक बार फिर से बढ़ने जा रहा है. शिवपाल यादव ने अपनी पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का विलय सपा में कर दिया है और मरते दम तक पार्टी में रहने का ऐलान भी कर दिया था. ऐसे में अब अखिलेश यादव चाचा शिवपाल को पार्टी कर राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. इसके अलावा आदित्य यादव सहित उनकी पार्टी के अन्य नेताओं को भी सपा संगठन में तवज्जे मिलनी तय है. 

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव सोमवार को अचानक चाचा शिवपाल यादव से मिलने उनके लखनऊ आवास पहुंचे. इस दौरान चाचा-भतीजे बंद कमरे में करीब एक घंटे तक यूपी की सियासी गतिविधियों के साथ ही संगठन विस्तार पर चर्चा हुई, क्योंकि पिछले दिनों अखिलेश ने कहा था कि शुभ दिन आने के बाद संगठन का विस्तार करेंगे. उत्तरायण के लगते ही आखिरकार  वह शुभ दिन सोमवार को आ गया और अखिलेश शाम शिवपाल के घर पहुंचकर एक घंटे तक सियासी मंथन किया. अति पिछड़ों एवं दलितों को साथ लेकर संगठन के विस्तार पर भी दोनों में एकराय बनी. 

राष्ट्रीय और प्रदेश कार्यकारिणी का ऐलान करने वाले हैं अखिलेश

समाजवादी पार्टी के संगठन विस्तार के पहले अखिलेश और शिवपाल की मुलाकात में संगठन के पदों पर मुहर लगने की खबर है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव नई राष्ट्रीय और प्रदेश की कार्यकारिणी का ऐलान करने वाले हैं. माना जा रहा है हैदराबाद से लौटकर समाजवादी पार्टी अपनी नई टीम का ऐलान करेंगे. शिवपाल यादव को राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी जाएगी, जिसमें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राष्ट्रीय महासचिव का पद हो सकता है. 

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बता दें कि शिवपाल यादव और अखिलेश यादव गिले-शिकवे भुलाकर साथ आ चुके हैं. शिवपाल ने अपनी पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का विलय सपा में कर चुके हैं. चाचा-भतीजे भले ही एक हो गए हों, लेकिन अभी तक शिवपाल को अहम जिम्मेदारी मिली है और न ही उनके करीबी नेताओं को अहमियत मिली है. चाचा-भतीजे के बीच मिलन हुए दो महीने होने जा रहे हैं, लेकिन शिवपाल को न तो सपा में कोई पद मिला और न ही पार्टी दफ्तर में उनके बैठने के लिए कोई कमरा तय किया गया है. ऐसे में पार्टी में कशमकश बनी हुई थी, जिसके हल तलाशने अखिलेश यादव चाचा के आवास पहुंचे. 

चाचा शिवपाल को किसी भी स्थिति में नाराज नहीं करना चाहते अखिलेश

अखिलेश यादव अब चाचा शिवपाल को किसी भी स्थिति में नाराज नहीं करना चाहते हैं. अखिलेश ने शिवपाल से मुलाकात किया और करीब एक घंटे तक दोनों नेताओं की तमाम मुद्दों पर मंथन किया गया. अखिलेश यादव मुलाकात के बाद सीधे अपने घर चले गए, मीडिया से कोई बातचीत नहीं हुई. हालांकि, सूत्रों की माने तो संगठन के अलग-अलग पदों को लेकर अखिलेश यादव ने अपनी सूची तैयार कर ली थी, सिर्फ इस सूची पर शिवपाल यादव की सहमति लेने वह शिवपाल यादव से मिले थे. 

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दरअसल, सपा में वापसी के बाद शिवपाल यादव सिर्फ इतना चाहते हैं कि अब पार्टी के फैसलों में उनकी सहमति ली जाए या कम से कम सार्वजनिक तौर पर यह दिखे कि संगठन के फैसलों में उनकी भी सहमति है. इसी मद्देनजर अखिलेश सपा के संगठन की लिस्ट तैयार कर चाचा शिवपाल के पास पहुंचे थे, जिस पर दोनों ही नेताओं के बीच सहमति बनी है. साथ ही 2024 के चुनाव में बीजेपी की खिलाफ किस तरह का आक्रमक रुख अपनाए रखा जाए, उसकी भी रणनीति बनी. 

कार्यकारिणी में नए चेहरों को भी मिल सकती है जगह

सूत्रों की मानें तो शिवपाल और आदित्य के अलावा उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले नेताओं को भी समायोजित करने पर सहमति बनी. सपा में इस बार राष्ट्रीय और प्रदेश कार्यकारिणी में कुछ नए चेहरों को जगह मिल सकती है. शिवपाल के साथ आए नेताओं को प्रदेश कार्यकारिणी में जगह दी गई. 

चाचा-भतीजे के बीच अब एक सहमति बनी हुई है कि शिवपाल यादव हर हाल में समाजवादी पार्टी के लिए ही जियेंगे और मरेंगे. शिवपाल यादव के कई करीबी नेता पहले ही या तो समाजवादी पार्टी या बीजेपी की तरफ रुख कर चुके हैं. इस तरह से कोई बड़ा चेहरा शिवपाल यादव के साथ अब बचा नहीं है. ऐसे में शिवपाल यादव के पास अपने किसी खास के लिए कुछ मांगेंगे, इसकी उम्मीद कम है, लेकिन इस मुलाकात से इतना दिखेगा कि संगठन में बदलाव पर शिवपाल यादव की भी मुहर है. यह शिवपाल के समर्थक या उनके चाहने वालों को संतुष्ट करने के लिए काफी होगा. 

आदित्य यादव को भी मिल सकता है 'गिफ्ट'

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शिवपाल यादव को अपनी पार्टी के विलय करने के बदले  लोकसभा, विधान सभा, विधान परिषद के लिए 2 सीटें अखिलेश यादव कभी भी उन्हें दे सकते हैं. बेटे आदित्य यादव को शिवपाल यादव कहीं भी एडजेस्ट कर सकते हैं. ऐसे में इस मुलाकात के मायने इतने हैं कि अब बड़े फैसलों में शिवपाल यादव की सहमति दिखाई देगी. पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि शिवपाल के नेतृत्व में जिलेवार आंदोलन शुरू किया जा सकता है, क्योंकि सपा निकाय चुनाव के साथ लोकसभा चुनाव में भी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराना चाहती है. शिवपाल का मैदान में उतरना जरूरी माना जा रहा है. 

मुलायम सिंह यादव के दौर में समाजवादी पार्टी में शिवपाल यादव की तूती बोलती थी. शिवपाल यादव का सबसे पसंदीदा पद प्रदेश का प्रमुख महासचिव का पद हुआ करता था, लेकिन अब शिवपाल यादव के लिए प्रदेश में कोई पद बचा नहीं. ऐसे में उनकी वरिष्ठता को देखते हुए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राष्ट्रीय महासचिव का ही ऐसा पद है जो शिवपाल यादव को दिया जा सकता है. इस तरह से उन्हें अहम जिम्मेदारी देकर संतुष्ट किया जा सकता है? 


 

 

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