समाजवादी पार्टी को योगी सरकार का बजट रास नहीं आया. बजट पर टिप्पणी करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि यह इनका सेकेंड लास्ट बजट था, इसके बाद आखिरी होगा, फिर हमारी सरकार आएगी. अखिलेश ने कहा कि इनके कई बजटों को देखें तो वो इन लोगों के घोषणा पत्र से मेल नहीं खाते. बिना विजन के बजट आया है, कोई क्लैरिटी नहीं है बजट में.
वहीं, सीएम योगी द्वारा संगम का पानी का शुद्ध बताए जाने पर अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी के सभी नेताओं को संगम का पानी भिजवाना चाहिए, वो उसी से खाना बनाएं, नहाएं और पिएं. यह पानी विधानसभा में भी रख देना चाहिए और उनको पिलाना चाहिए. आखिर सीएम को पता ही नहीं कि यह बैक्टीरिया कहां से आता है.
बकौल सपा मुखिया- हर बार बजट आता है और सरकार यही कहती है कि ये यूपी का सबसे बड़ा बजट है. हर बजट पहले से बड़ा ही होगा. इस बार का बजट नहीं बल्कि बड़ा ढोल है, जिसमें आवाज तो बहुत है लेकिन अंदर से खाली है. पूरा का पूरा बजट खोखला है. इस बजट का झोला खाली है. जनता को लग रहा है बजट आया ही नहीं है. वह पूछ रही है कि प्रवचन तो आया लेकिन बजट कब आएगा.
अखिलेश यादव ने कहा कि ये पहली सरकार है जो उर्दू का विरोध उर्दू में ही कर रह थी. उन्होंने भाषण में कई बार उर्दू शब्दों का उपयोग किया, जैसे- बदनाम, बख्शा नहीं जाएगा, मौत, हादसा, जान, हसीन, अगर, बाद आदि. कोई बताए कि रेल की हिंदी क्या है, 'गैर' की हिंदी क्या होती है, क्रिकेट, स्टेशन, इंटरनेट और मेट्रो जैसे शब्दों की हिंदी क्या होती है.
पार्टी ऑफिस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए अखिलेश यादव ने आगे कहा कि इस बजट को देखकर किसानों की उम्मीदों का खेत सूख गया है. महिलाओं के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं कि घर कैसे चलाएंगे, आम जनता के लिए इसमें कुछ नहीं है, लोग कह रहे हैं कि सरकार का प्रवचन तो गया है अब बजट कब आएगा.
बकौल अखिलेश- यूपी का बजट देखकर सारे मंत्री और विधायक भी निराश हैं क्योंकि इसमें उनके लिए और उनके विभाग के लिए कुछ नहीं है. आखिर उन्हें ही जनता को फेस करना है, किस मुंह से करेंगे. बीजेपी ने इस बजट में भी अपने संकल्प पत्र के वादे पूरे नहीं किए, उनका नौंवा बजट भी फेल रहा. इस वर्ष के बाद सरकार अपना आखिरी बजट पेश करेगी जिसके बाद नई सरकार सत्ता में आएगी.