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वाराणसी में देश के पहले पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे का अलाइनमेंट टेस्टिंग शुरू, दीपावली तक कमर्शियल रन की उम्मीद

वाराणसी में देश के पहले पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे का अलाइनमेंट टेस्टिंग शुरू हो गया है. काशी विद्यापीठ और रथयात्रा स्टेशनों के बीच केबल डालकर गोंडोला का परीक्षण किया जा रहा है. 3.7 किमी लंबी यह परियोजना ₹644 करोड़ की लागत से बन रही है और दीपावली तक कमर्शियल रन शुरू होने की संभावना है.

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 यह परियोजना ₹644 करोड़ की लागत से बन रही है.
यह परियोजना ₹644 करोड़ की लागत से बन रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में देश के पहले पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे का अलाइनमेंट टेस्टिंग शुरू हो चुका है. यह रोपवे वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया चौराहे तक बनेगा और जाम की समस्या को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. वर्तमान में काशी विद्यापीठ और रथयात्रा स्टेशनों के बीच केबल डालकर उस पर गोंडोला चलाकर टेस्टिंग की जा रही है. माना जा रहा है कि फरवरी में इसका ट्रायल रन भी शुरू हो जाएगा और दिवाली से पहले काशीवासियों को रोपवे की यह सौगात मिल जाएगी.

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वाराणसी के मंडलायुक्त कौशल राज शर्मा ने बताया कि रोपवे का अलाइनमेंट टेस्टिंग दो स्टेशनों काशी विद्यापीठ और रथयात्रा के बीच शुरू हो चुकी है. इन दोनों स्टेशनों के बीच केबल डाली जा चुकी है और गोंडोला का परीक्षण चल रहा है. यह परीक्षण अगले डेढ़ महीने तक चलेगा. इसके बाद लोड रखकर ट्रायल टेस्टिंग की जाएगी, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करना अनिवार्य होगा.

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यह परीक्षण फेज-वाइज आगे बढ़ेगा, यानी जैसे-जैसे अन्य स्टेशन बनकर तैयार होंगे, वैसे ही वहां भी टेस्टिंग शुरू होगी. इस पूरी प्रक्रिया में लगभग छह महीने का समय लगेगा, जिसके बाद यात्रियों के साथ अंतिम परीक्षण किया जाएगा. अधिकारियों का लक्ष्य दीपावली से पहले रोपवे को कमर्शियल रन में लाने का है, ताकि वाराणसी के लोग इसका लाभ उठा सकें.

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रोपवे परियोजना की खास बातें

  • परियोजना लागत: ₹644 करोड़.
  • कुल दूरी: 3.7 किलोमीटर
  • कुल स्टेशन: 5 (कैंट रेलवे स्टेशन, काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया चौराहा).
  • यात्रा का समय: केवल 16 मिनट.
  • ट्रॉलियों की संख्या: 137.
  • ऊंचाई: सड़क से 50 मीटर ऊपर.
  • प्रत्येक ट्रॉली की क्षमता: 10 लोग.
  • प्रति घंटे ट्रॉलियों की संख्या: 600 (दोनों दिशाओं में).
  • यात्रियों की प्रति मिनट क्षमता: 100.

रोपवे के निर्माण का सफर

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो साल पहले इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी थी. शिलान्यास से पहले उन्होंने रोपवे के मॉडल का अवलोकन किया था और स्विट्जरलैंड से इंपोर्ट किए गए केबलकार में बैठकर इसका डिजिटल अनुभव भी लिया था. इस परियोजना का उद्देश्य वाराणसी में बढ़ते ट्रैफिक जाम को कम करना और स्थानीय लोगों को एक तेज़ और सुविधाजनक परिवहन विकल्प देना है.

वाराणसी

दीपावली तक काशीवासियों को मिल सकता है तोहफा

रोपवे प्रोजेक्ट पर तेजी से काम हो रहा है और इसे इस साल नवंबर 2025 तक पूरा करने की योजना है. अधिकारियों का कहना है कि अगर सभी परीक्षण सफल होते हैं, तो दीपावली तक इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा. यह परियोजना न केवल वाराणसी के ट्रैफिक को आसान बनाएगी, बल्कि इसे पर्यटन और आधुनिक शहरी परिवहन प्रणाली के क्षेत्र में भी एक नया आयाम देगी.
 

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