इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2021 में तीन साल की बच्ची से बलात्कार और हत्या के दोषी एक व्यक्ति को दी गई मौत की सजा को 30 साल की जेल की सजा में बदल दिया है. मृत्युदंड को कम करते हुए, अदालत ने कहा कि दोषी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था, इसलिए 'उसके सुधार की संभावना' से इनकार नहीं किया जा सकता है. न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति सैयद आफताब हुसैन रिजवी की पीठ ने मामले में कनविक्ट दिनेश पासवान की आपराधिक अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया, जिसे फतेहपुर की जिला अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी.
दिनेश पासवान की ओर से पेश वकील तनीषा जहांगीर मोनिर ने अदालत से कहा कि अपीलकर्ता को केवल संदेह के आधार पर झूठा फंसाया गया था. उन्होंने कहा, 'मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य का है, जिसकी चेन अधूरी है'. मोनिर ने तर्क दिया, 'घटना का स्थान तय नहीं किया गया था, क्योंकि मृतक का शव कथित घटना स्थल (अपीलकर्ता के किराए के कमरे) पर नहीं मिला था. मृतक की मां के अनुसार शव उसके नाना-नानी के घर पर पाया गया था, जहां पूछताछ की गई थी'.
संबंधित पक्षों को सुनने के बाद, अदालत ने अपने हालिया आदेश में कहा, 'अपराध बहुत जघन्य प्रकृति का है और वीभत्स तरीके से किया गया है. हालांकि, अदालत ने यह कहते हुए मौत की सजा कम कर दी, '8 दिसंबर, 2021 को सीआरपीसी की धारा 313 के तहत दर्ज उसके बयान में दोषी की उम्र 25 वर्ष थी, इसलिए वह एक युवा है. रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों से यह भी स्थापित होता है कि वह शादीशुदा है और उसका एक बच्चा भी है'.
अदालत ने आगे कहा, 'अपीलकर्ता-अभियुक्त का न तो कोई आपराधिक इतिहास रहा है और न ही वह पूर्व में किसी मामले में दोषी करार दिया गया है. इसलिए उसके सुधार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. ये तथ्य उसकी सजा को कम करने में सहायक हैं'. बच्ची की मां ने फतेहपुर के खागा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी कि दिनेश पासवान उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर अपने कमरे में ले गया और दष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी. 18 जनवरी, 2022 को जिला अदालत ने दिनेश पासवान को मौत की सजा सुनाई थी.