इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन पिछले दो दिनों से अपनी कई मांगों को लेकर हड़ताल पर है. यह हड़ताल शुक्रवार को भी जारी रहेगी. जिसके चलते हाईकोर्ट में सुनवाई भी ठप है. वहीं, अब यह हड़ताल जजों बनाम वकीलों का हो गया है. क्योंकि एसोसिएशन ने एक बड़ा फैसला लेते हुए हाईकोर्ट में किसी भी केस की सुनवाई के दौरान जजों को माई लॉर्ड या योर लॉर्डशिप नहीं, बल्कि सर कहने का फैसला लिया है.
मांगों को लेकर बार काउंसिल ने चीफ जस्टिस व सीनियर जजों से भी की थी मुलाकात
अपनी मांगें पूरी करवाने के लिए हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने एक बैठक कर बुधवार को चीफ जस्टिस और कई सीनियर जजों के सामने अपनी बातें रखी थी, लेकिन वो बैठक विफल रही जिसके बाद अभी भी हड़ताल जारी है. लेकिन अब ये हड़ताल पूरी तरह बार एसोसिएशन वर्सेज जजों के बीच हो गई है. ऐसे में जजों के व्यवहार व मनमानी सुनवाई प्रक्रिया के खिलाफ बार एसोसिएशन लामबंद हो गया है.
जज भगवान न बने और आम इंसान बनकर न्याय करें
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने अनिल तिवारी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि जज भगवान बनने से पीछे हटे और आम इंसान बनकर न्याय करें। यही वजह है कि बार एसोसिएशन ने फैसला लिया है कि वकील जजों को 'माय लॉर्ड' न कहकर बल्कि सर कहकर संबोधित करें. इसको लेकर बार काउंसिल की तरफ से एक प्रस्ताव भी पास कर दिया गया है.
कार्य बहिष्कार के दौरान उपस्थित होने वाले वकीलों पर होगी कार्रवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने अनिल तिवारी ने यह भी कहा कि 2 दिन से इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकील कार्य बहिष्कार कर रहे हैं. ऐसे में बार सरकारी और प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले वकीलों पर सख्त हो गया है. कार्य बहिष्कार के दौरान अगर कोई वकील फिजिकल या फिर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित होता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी. वहीं, जो वकील इस दौरान उपस्थित हुए थे, उन्हें कारण बताओं नोटिस भी जारी किया गया है.
इन मुद्दों को लेकर बार काउंसिल है हड़ताल पर
आपको बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में यूपी के सभी शहरों से पैरवी के लिए लोग पहुंचते हैं. लेकिन तारीख नहीं लगने और सुनवाई नहीं होने से लोग परेशान हैं. हालांकि, वकीलों के कार्य बहिष्कार के बाद भी जज अपने-अपने कोर्ट में बैठे, लेकिन वकीलों की अनुपस्थिति के चलते वह अपने-अपने चैम्बरों में वापस चले गए. वकील अपनी मांगों को लेकर पिछले 2 दिन से हड़ताल पर हैं.
वकीलों का कहना है कि कोर्ट में उनसे दुर्व्यवहार होता है. ऐसे में कोर्ट के कामकाज में परेशानी खत्म होनी चाहिए. साथ ही वकील रिवाइज करने की पुरानी पद्धति को न मानना, हाईकोर्ट रूल्स में बिना संशोधन मनमाने ढंग से फाइलिंग व रिपोर्टिंग की प्रक्रिया में बदलाव करना और एडवोकेट रोल से संबंधित मांगे गए डेटा को देने से इनकार करने आदि के मुद्दों को लेकर हड़ताल पर हैं.