मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले में शाही ईदगाह मस्जिद के पुरातात्विक सर्वे (ASI) की मांग पर आज यानी मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट फैसला सुगाएगा. पांच दिन पहले कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की गई है.
बता दें कि इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन का कहना है कि काशी विश्वनाथ मंदिर के ज्ञानवापी परिसर की तर्ज पर मथुरा में श्री कृष्ण जन्म स्थान पर बनी शाही ईदगाह का भी वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीक से एएसआई सर्वे कराया जाए. वहीं, मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने इस पर आपत्ति जताते हुए विरोध किया है.
'कोर्ट से जल्द सर्वे कराए जाने की मांग'
याचिकाकर्ता के वकील हरि शंकर जैन के मुताबिक, कोर्ट से इस बारे में जल्द सर्वे कराने की गुहार लगाई गई है. आशंका है कि वहां परिसर में मौजूद पुराने मंदिर के निशान और सबूत मिटाने की कोशिश लगातार जारी है. उसे रोकने और सुरक्षा इंतजाम कड़े करने का आदेश देने की भी गुहार लगाई गई है ताकि ऐतिहासिक सबूत मिटाए ना जा सकें.
'सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से कर दिया था इंकार'
16 नवंबर को हाईकोर्ट के जस्टिस मयंक कुमार जैन की बेंच ने सभी पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया था. इस बारे में मथुरा की विभिन्न अदालतों में 18 मुकदमे अलग-अलग स्तरों पर लंबित हैं. भगवान श्री कृष्ण विराजमान और भगवान बाल कृष्ण विराजमान गर्भगृह की ओर से अर्जी लगाई गई है. मथुरा के जिला जज की चिट्ठी से मिली जानकारी के आधार पर ही सभी मुकदमों की सुनवाई एकसाथ करने पर हाईकोर्ट ने सहमति जताई थी. उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दखल देने से मना कर दिया था. अब हाईकोर्ट का मंगलवार को आने वाला फैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
'हिंदू पक्ष ने कोर्ट में दिए तर्क'
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, याचिका में मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बगल में स्थित शाही ईदगाह को हटाने की भी मांग की गई है. दावा किया गया है कि यह एक हिंदू मंदिर पर बनाई गई है. मुकदमा संख्या एक में भगवान श्री कृष्ण विराजमान बनाम यूपी सुन्नी सेंट्रल बोर्ड है. वादी पक्ष की ओर से 'विवादित' जगह के सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति के लिए याचिका दायर की गई है. याचिकाकर्ताओं के वकील विष्णु शंकर जैन ने तर्क दिया कि ऐसे कई संकेत हैं जो बताते हैं कि संबंधित इमारत एक हिंदू मंदिर है. कथित 'कलश' और शिखर हिंदू स्थापत्य शैली के उदाहरण हैं.
'कमीशन नियुक्त करने और सर्वे कराने की मांग'
वकील ने दावा किया, वहां कमल के आकार का एक स्तंभ है जो हिंदू मंदिरों की एक उत्कृष्ट विशेषता है और शेषनाग की छवि है. वर्तमान संरचना में स्तंभ के आधार पर हिंदू धार्मिक प्रतीक और नक्काशी दिखाई देती है. उन्होंने तर्क के आलोक में एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए तीन अधिवक्ताओं का एक कमीशन नियुक्ति करने की मांग की. वकील ने कहा, आयोग की पूरी कार्यवाही की तस्वीरें खींची जाएं. वीडियोग्राफी की जाए और रिपोर्ट अदालत को सौंपी जाए. जिला प्रशासन को आयोग की कार्यवाही के दौरान पुलिस सुरक्षा प्रदान करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया जाए.
'मुस्लिम पक्ष ने याचिका का विरोध किया'
इस याचिका का सुन्नी सेंट्रल बोर्ड ने विरोध किया है और तर्क दिया है कि इस स्तर पर आवेदन पर कोई आदेश पारित करने की जरूरत नहीं है. मुकदमे की स्थिरता के संबंध में उनकी आपत्ति लंबित है. हालांकि, वादी के वकील ने कुछ कानूनी घोषणाओं का हवाला दिया और कहा, अदालत मुकदमे के किसी भी चरण में आयोग के लिए निर्देश जारी कर सकती है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.