माफिया डॉन अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की अप्रैल में प्रयागराज में पुलिस हिरासत में गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी. अतीक अहमद और अशरफ प्रयागराज में इसी साल फरवरी में हुए उमेश पाल हत्याकांड में आरोपी भी थे. पुलिस ने अतीक अहमद और अशरफ की हत्या के मामले में गुरुवार को चार्जशीट दाखिल कर दी. पुलिस ने अपनी चार्जशीट में दावा किया है कि अतीक-अशरफ की हत्या में सुपारी किलिंग और गहरी साजिश का सबूत नहीं मिला है. पुलिस ने अपनी चार्जशीट में मौके से गिरफ्तार अरुण मौर्या, सनी और लवलेश तिवारी को ही आरोपी बनाया है. एसआईटी की तरफ से दाखिल की गई चार्जशीट पर कोर्ट ने संज्ञान लेकर प्रतापगढ़ जेल में बंद तीनों आरोपियों को शुक्रवार को तलब किया है.
दरअसल, 24 फरवरी को प्रयागराज में दिनदहाड़े उमेश पाल की हत्या कर दी गई थी. उमेश पाल की पत्नी की शिकायत पर पुलिस ने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ, उसके बेटे असद समेत 9 लोगों को आरोपी बनाया था. पुलिस पूछताछ के लिए साबरमती जेल से बंद अतीक और बरेली में बंद अशरफ को प्रयागराज लाई थी. यहां 15 अप्रैल की रात को पुलिस अतीक और अशरफ को मेडिकल के लिए अस्पताल में लाई थी. अस्पताल के बाहर अरुण मौर्या, सनी और लवलेश पत्रकार बनकर पहुंचे और जैसे ही अतीक और उसके भाई अशरफ ने मीडिया से बात करना शुरू की, तीनों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. इस दौरान करीब 18 राउंड गोलियां चलीं, जिनमें से 8 गोली अतीक अहमद को लगीं. दोनों की मौके पर ही मौत हो गई.
पुलिस की चार्जशीट की बड़ी बातें
- अतीक और अशरफ की हत्या के मामले में पुलिस ने 2056 पेज की चार्जशीट दाखिल की है. इसमें से 2000 पेज में पुलिस की केस डायरी, नक्शा नजरी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चालान, फोटो परीक्षण रिपोर्ट, गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज का विवरण आदि शामिल है. चार्जशीट 56 पन्ने में दायर की गई है.
- पुलिस ने तीनों ही आरोपियों लवलेश तिवारी, सनी सिंह और अरुण मौर्या के खिलाफ आईपीसी की धारा 302/307/34 /120 बी /419/ 420 /467/ 468 /471 और आर्म्स एक्ट की धारा 3,7/ 25/ 27 और क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट की धारा 7 के तहत चार्जशीट दाखिल की है.
- चार्जशीट के मुताबिक, पुलिस को अतीक-अशरफ की हत्या में किसी भी तरह की सुपारी किलिंग, कोई बड़ी साजिश या अन्य मास्टरमाइंड के इशारे पर हत्या किए जाने के कोई सबूत नहीं मिले हैं.
- पुलिस ने तीनों हत्यारोपियों के पड़ोसियों, रिश्तेदारों और दोस्तों के बयान को भी अपनी जांच का हिस्सा बनाया. इसी के आधार पर पुलिस ने शूटरों की प्रवृत्ति को आक्रामक और जल्द नाम कमाने की हसरत वाला बताया. पुलिस ने तीनों शूटर में सनी सिंह को अपराधिक प्रवृत्ति का भी बताया है.
- पुलिस ने चार्जशीट में दावा किया है यह तीनों शूटर तो 13 अप्रैल को ही अतीक और अशरफ की हत्या करना चाहते थे. तीनों कोर्ट भी पहुंचे थे. लेकिन वकीलों की भीड़ और भारी पुलिस बंदोबस्त को देखकर घटना को अंजाम नहीं दे पाए.
- सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने दावा किया कि 15 अप्रैल को सबसे पहले शूटर लवलेश तिवारी कॉल्विन हॉस्पिटल पहुंचा था. इसके 12 मिनट बाद सनी सिंह और अरुण मौर्या वहां पहुंचे. अतीक और अशरफ के पहुंचने पर लवलेश तिवारी ने वीडियो भी बनाया. इतना ही नहीं सनी सिंह और अरुण मौर्या ने बाकी मीडियाकर्मियों के साथ खड़े होकर घुलने मिलने की कोशिश कर रहे थे.
- लवलेश वीडियो बनाते हुए कॉल्विन अस्पताल में मीडिया कर्मी के तौर पर घुसा था. जैसे ही अतीक अहमद और अशरफ अस्पताल के गेट से अंदर पहुंचे सनी सिंह और लवलेश तिवारी ने अपनी जिगाना पिस्टल से फायरिंग शुरू कर दी, जबकि अरुण मौर्या की पिस्टल से सिर्फ दो फायर हुए और पिस्टल फंस गई थी.
- पुलिस ने अपनी चार्जशीट में शूटर सनी सिंह को ही इस हत्याकांड का असली मास्टरमाइंड बताया है. सनी सिंह ने ही अतीक अहमद और अशरफ की हत्या का पूरा प्लान रचा था और जिसके लिए उसने चित्रकूट के फर्जी नाम पते पर तीनों के आधार कार्ड बनवाए थे. हालांकि पुलिस अपनी तफ्तीश में यह साफ नहीं कर पाई कि तीनों शूटरों का आधार कार्ड किस की मदद से बनवाया गया. वहीं पुलिस का कहना है सनी दिल्ली के कुख्यात गोगी गैंग के संपर्क में था, इसी गोगी गैंग के जरिए सनी को जिगाना पिस्टल मिली थी.