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मंडप से मर्डर तक... 4 साल पुराना प्यार और भूल गई सात जन्मों की कसमें, 15 दिन पहले ही दुल्हन बनी प्रगति की कहानी 

प्रगति की बड़ी बहन की शादी दिलीप के बड़े भाई के साथ हुई थी, इसलिए दोनों एक-दूसरे से परिचित थे. प्रगति का दिल अनुराग यादव के लिए धड़कता था. लेकिन प्रगति की शादी दिलीप से तय कर दी गई. 5 मार्च को दोनों ने सात फेरे लिए. शादी के बाद भी, उसका प्यार अनुराग के लिए जिंदा था. इसी प्यार के चलते उसने एक ऐसा रास्ता चुना जिसे सुनकर सब चौंक गए.

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प्रगति और दिलीप की शादी बहुत धूमधाम से हुई थी.
प्रगति और दिलीप की शादी बहुत धूमधाम से हुई थी.

ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूलों से सजा मंडप और खुशियों में डूबे चेहरे... मैनपुरी के रहने वाली दिलीप और औरैया की प्रगति की शादी सबके लिए किसी सपने जैसी थी. नाते-रिश्तेदार ही नहीं, पड़ोसी भी इस खुशी में शामिल थे. हर रस्म धूमधाम से निभाई जा रही थी. लेकिन इन रीतियों के बीच, दुल्हन प्रगति के दिमाग में  सात जन्मों की कसमें खाने के बजाय कुछ और ही चल रहा था. 

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प्रगति की बड़ी बहन पारुल की शादी 2019 में दिलीप के बड़े भाई संजय के साथ हो चुकी थी, इसलिए प्रगति और दिलीप एक-दूसरे से परिचित थे. लेकिन इस रिश्ते में एक अनकही सच्चाई छुपी थी. प्रगति का दिल पहले से किसी और के लिए धड़कता रहा था. वह अनुराग यादव से प्रेम करती थी, जो उसके गांव का ही था. बताया जा रहा है कि जब इस रिश्ते की भनक परिवार को लगी, तो आनन-फानन में उसकी शादी दिलीप से तय कर दी गई. 5 मार्च 2025 को दोनों ने सात फेरे लिए. लेकिन प्रगति के इरादे नहीं बदले. शादी के बाद भी, उसका प्यार अनुराग के लिए जिंदा था. इसी प्यार के चलते उसने एक ऐसा रास्ता चुना जिसे सुनकर सब चौंक गए. 

साजिश की खौफनाक चाल

प्रगति ने अपने प्रेमी अनुराग से मिलकर एक खौफनाक योजना बनाई. दिलीप को इस दुनिया से हटा देने की योजना. प्रगति ने सोचा अगर दिलीप की हत्या हो जाती है, तो वह न सिर्फ अनुराग के साथ एक नई जिंदगी बिता सकती थी, बल्कि दिलीप के घर से पैसे भी ले लेगी पर उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि अपराध कितना भी शातिराना क्यों न हो, कोई न कोई सुराग छूट ही जाता है.

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खेत में मिला था लहूलुहान दिलीप

पुलिस अधीक्षक अभिजीत शंकर ने बताया कि 19 मार्च 2025 को औरैया जिले के सहार थाना क्षेत्र में पुलिस को सूचना मिली कि एक गेहूं के खेत में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल अवस्था में पड़ा है. जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो देखा कि वह व्यक्ति खून से लथपथ था. उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तीन दिन तक जिंदगी और मौत की जंग लड़ने के बाद, 22 मार्च को उसने दम तोड़ दिया. मृतक की पहचान दिलीप यादव के रूप में हुई. जब यह खबर उसके परिवार तक पहुंची, तो मातम छा गया. दिलीप के भाई ने सहार थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया, और पुलिस इस ब्लाइंड मर्डर केस को सुलझाने में जुट गई.

ऑपरेशन त्रिनेत्र से खुला राज 

पुलिस ने 'ऑपरेशन त्रिनेत्र' के तहत सीसीटीवी फुटेज खंगाले, और जो सच सामने आया, वह चौंकाने वाला था. वीडियो में दिखा कि कुछ लोग दिलीप को बाइक पर बैठाकर ले जा रहे थे. इस सुराग को पकड़कर पुलिस ने मुखबिरों को सक्रिय किया और जल्द ही रामजी नागर का नाम सामने आया. 24 मार्च 2025 को पुलिस ने रामजी नागर को धर दबोचा. पूछताछ में उसने जो कबूला, उसने पूरे मामले की परतें खोल दीं.

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दो लाख में तय हुआ सौदा

रामजी नागर ने बताया कि यह पूरी साजिश प्रगति और उसके प्रेमी अनुराग यादव ने रची थी. शादी से पहले ही प्रगति अनुराग से प्यार करती थी और किसी भी कीमत पर उसे पाना चाहती थी. लेकिन जबरन हुई शादी ने उसे इस हद तक धकेल दिया कि उसने हत्या का रास्ता चुन लिया. प्रगति ने अनुराग को एक लाख रुपये दिए, जिसे अनुराग ने मुख्य हत्यारे रामजी नागर को सौंपा. दो लाख रुपये में सौदा तय हुआ और इस योजना को अंजाम देने के लिए पूरी टीम तैयार की गई. पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया—रामजी नागर, अनुराग यादव और खुद प्रगति यादव. लेकिन जांच अभी खत्म नहीं हुई. पुलिस को इस साजिश में शामिल अन्य लोगों के शामिल होने के सुराग मिले हैं, जिनकी तलाश जारी थी.

(औरैया से सूर्य प्रकाश शर्मा का इनपुट) 

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