Hathras Stampede News: उत्तर प्रदेश के हाथरस (Hathras) में सत्संग के बाद हुई घटना के बाद बाबा नारायण साकार हरि के दो भक्तों से बातचीत की, जिन्होंने बाबा के बारे में बात की. आश्रम में सेवादार की तरह काम करने वाले सत्यवान ने कहा कि बाबा जी ही ब्रम्ह हैं. बाबा के चरणों की धूल से लोगों के कष्ट कम हो जाते हैं. हमारे बाबा परम ब्रह्म हैं. वही सबको बनाए हैं. जिन लोगों की हादसे में मौत हुई, उनकी मौत आ गई थी. बाबा जी किसी से कोई पैसा नहीं लेते.
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सत्यवान ने कहा कि यह आश्रम यहीं के एक सेवादार ने अपनी 10 बीघा जमीन दान दी थी, जिस पर बनाया गया है. ग्वालियर, कानपुर, लखनऊ, शाहजहांपुर, दिल्ली आदि कई जगह पर आश्रम हैं. बाबा जी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी होकर आए हैं.
बहराइच से बस पर सवार होकर कई लोग सत्संग में आए थे. सत्संग में हुई भगदड़ की घटना के बाद जब इन लोगों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वे पहली बार आए हैं. उन्हें पता करना था कि बाबा इंसान हैं या भगवान. बस में एक मां और बेटी भी थीं, जो लापता हैं. ये लोग उनका इंतजार कर रहे हैं.
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कुछ लोग हादसे के तुरंत बाद बस से घर वापस लौट आए. एक व्यक्ति ने कहा कि हमारे सामने दो लोगों की मौत हो गई, हम खुशकिस्मत हैं, जो बचकर आ गए. जिस हिसाब से भीड़ थी, उसको देखते हुए कम पुलिसकर्मी तैनात थे. एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि जब सत्संग खत्म हो गया तो बाबा से मिलने के लिए महिलाएं उनकी गाड़ी के पीछे दौड़ीं, इसके बाद भगदड़ मच गई. भीड़ बहुत ज्यादा थी, गर्मी का मौसम था. लोग जल्दी बाहर निकलने के चक्कर में भागने लगे. जिस जगह पर चल रहे थे, वहां मिट्टी भी गीली थी, कीचड़ हो गया था. इस कारण कई लोग फिसल गए. अगर प्रशासन मुस्तैद होता तो हादसा टल सकता था.
महिला हेड कॉन्स्टेबल ने बताई घटना की कहानी
सत्संग के दौरान हाथरस में हुए दर्दनाक हादसे के मामले में थाना सिकंदराराऊ में एफआईआर दर्ज हो गई है. उधर सत्संग में ड्यूटी दे रही महिला पुलिस की हेड कॉन्स्टेबल शीला मौर्य ने कहा कि वहां भीड़ अधिक थी. वह महिलाओं को निकाल रही थी कि अचानक महिलाएं गिरने लगीं. शीला जिला अस्पताल में भर्ती हैं, उन्होंने कहा कि न जाने कैसे अचानक अंधेरा हुआ और वह भी बेहोश होकर गिर गईं.
सूरजपाल उर्फ भोले बाबा ने 1990 में छोड़ दी थी पुलिस की नौकरी
भोले बाबा का असली नाम सूरजपाल है. वह कासगंज जिले के बहादुर नगर के मूल निवासी हैं. सूरजपाल ने साल 1990 के दशक के अंत में एक पुलिसकर्मी के रूप में नौकरी छोड़ दी थी और प्रवचन देना शुरू किया था. बाबा ने 'सत्संग' (धार्मिक उपदेश) करना शुरू कर दिया.
सूरजपाल उर्फ भोले बाबा की कोई संतान नहीं है. सत्संग में बाबा की पत्नी भी साथ रहती हैं. वह अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय से आते हैं. बहादुर नगर में आश्रम स्थापित करने के बाद भोले बाबा की प्रसिद्धि गरीबों और वंचित वर्गों के बीच तेजी से बढ़ी और लाखों लोग अनुयायी बन गए.
अखिलेश यादव बोले- भीड़ को रोकने की जिम्मेदारी सरकारी की थी
इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि उनका कार्यक्रम कोई पहली बार नहीं हुआ है. कार्यक्रम पहले भी हुए हैं. अगर इतनी भीड़ आ रही थी तो सुरक्षा इंतजाम की जिम्मेदारी सरकार की थी. लोगों को गाइड करने की जिम्मेदारी सरकार की थी. भीड़ इकट्ठा नहीं होने देने की जिम्मेदारी सरकार की थी.
'मैं आयोजक नहीं, मुझे नहीं पता मेरा नाम लिस्ट में क्यों लिखा'
सत्संग के आयोजक के तौर पर पंडाल के बाहर 78 लोगों के नाम और नंबर दिए गए हैं. इनमें से एक डॉक्टर मुकेश कुमार से बात की. मुकेश का नाम नंबर 20 पर लिखा है. मुकेश कुमार का कहना है कि वो बिल्कुल आयोजनकर्ता नहीं थे. चार दिन पहले घर पर चंदा मांगने आए थे. उन्हें मना कर दिया था. मुझे नहीं पता, मेरा नाम क्यों लिखा.
अब तक 121 लोगों की हो चुकी है मौत
हाथरस की घटना में अब तक 121 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं कई लोग घायल हैं, जो अस्पताल में भर्ती है. हाथरस हॉस्पिटल में 32 डेड बॉडी आई हैं, 19 का आइडेंटिफिकेशन हो चुका है. पोस्टमार्टम के बाद उन्हें परिजनों को सौंपा जा रहा है, उनके घर भिजवाया जा रहा है. 32 में से 11 का पोस्टमार्टम हो चुका है. एक महिला पुलिसकर्मी बेहोश हो गई थी, वह अब ठीक है, उसे घर भेज दिया गया है.