समाजवादी पार्टी की सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ रेप केस दर्ज कराने वाली महिला-बेटी की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी. आरोप है कि युवती और उसकी मां ने प्रजापति के पक्ष में बयान देने के बदले करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टी और कैश ले लिया था. बाद में दोनों अपने वकील को ही ब्लैकमेल करने लगी थीं. उधर, महिला का आरोप था कि वकील ने ही गायत्री प्रजापति के पक्ष में बयान कराने से मना कर दिया था. यही नहीं, इसकी वजह से उन्होंने वकील की फीस नहीं दी और और उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी थी.
जानकारी के मुताबिक, वकील दिनेश चंद्र त्रिपाठी ने चित्रकूट की रहने वाली इस महिला के खिलाफ गौतम पल्ली थाने में केस दर्ज करवाया था. इसके मुताबिक युवती की मां ने पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के खिलाफ रेप केस दर्ज कराया था. वकील ने महिला की तरफ से पैरवी करके गायत्री प्रजापति की जमानत खारिज करवाई थी और केस लड़ रहे थे. लेकिन बाद में महिला ने साठगांठ कर ली और शपथ पत्र देकर गायत्री प्रसाद प्रजापति के पक्ष में बयान देना चाहती थी. लेकिन वकील त्रिपाठी ने अपनी मुवक्किल को ऐसा करने से मना किया.
इसको लेकर महिला ने वकील को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी थी और न ही उसकी फीस दी थी. बाद में वकील ने उल्टा महिला के खिलाफ गौतम पल्ली थाने में मुकदमा दर्ज करवा दिया था. जांच में आरोप सही पाए जाने पर आरोपी मां और बेटी को गिरफ्तार कर लिया गया था. कोर्ट ने अब महिला और उसकी बेटी की जमानत याचिका खारिज कर दी है.
जानिए पूरा मामला
बता दें कि समाजवादी सरकार में गायत्री प्रसाद प्रजापति खनन मंत्री रह चुके हैं. गायत्री और छह अन्य लोगों पर चित्रकूट की एक महिला ने अपनी नाबालिग बेटी संग गैंगरेप का आरोप लगाया था. महिला का कहना था कि वह मंत्री गायत्री प्रजापति से मिलने उनके आवास पर पहुंची थी.जिसके बाद मंत्री और उनके साथियों ने उसको नशा दे दिया और नाबालिग बेटी के साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया. शिकायत के बाद गायत्री प्रजापति की तरफ से परिवार को धमकी देने की बात भी सामने आई थी.