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यूपी के बरेली में जीपीएस (गूगल मैप) के सहारे यात्रा कर रहे कार सवार तीन लोगों की मौत हो गई. दरअसल, कार सवार जिस ब्रिज (पुल) को क्रॉस कर आगे बढ़ना चाहते थे, असल में वो अधूरा बना था. ऐसे में कार ब्रिज से नीचे गिर पड़ी और दर्दनाक हादसा हो गया. ब्रिज पर न कोई अवरोधक था, न ही बैरिकेड, जिससे कार चालक खतरा भांप नहीं पाया. फिलहाल, हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन ने पुल पर अस्थाई रूप से दीवार बनाकर लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है.
वहीं, ब्रिज हादसे के बाद बदायूं में पुल शुरू होने वाली जगह को घटनास्थल मानते हुए लापरवाह लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं, गूगल के क्षेत्रीय प्रबंधक और अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ थाना दातागंज में एफआईआर दर्ज की गई है.
आपको बता दें कि रविवार सुबह बरेली के थाना फरीदपुर क्षेत्र में रामगंगा नदी के ऊपर बने अधूरे पुल की वजह से तीन लोगों की मौत हो गई थी. घटना के बाद से ही निर्माण विभाग के इंजीनियर, तमाम अधिकारी नियमों का हवाला देकर एक दूसरे विभाग पर जिम्मेदारी थोप रहे हैं. इस बीच मामले में कमिश्नर के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ है.
कमिश्नर के आदेश पर इन लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा
कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने बताया कि हादसे के बाद पीडब्ल्यूडी विभाग पर मुकदमा दर्ज किया गया है. मामले में बदायूं डीएम और बरेली डीएम जांच करेंगे. बदायूं के दातागंज थाने में नायाब तहसीलदार छविराम की ओर से भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 के तहत ये मुकदमा दर्ज कराया गया है. जिसमें सहायक अभियंता मोहम्मद आरिफ, लोक निर्माण विभाग बदायूं, सहायक अभियंता अभिषेक कुमार, अपर अभियंता संजय गंगवार, अपर अभियंता महाराज सिंह, गूगल के क्षेत्रीय प्रबंधक समेत पांच अज्ञात ग्रामीणों के नाम शामिल हैं.
अजय कुमार, मुख्य अभियंता का बयान- देखें वीडियो
मामले में सेतु निगम के क्षेत्रीय इंजीनियर का कहना है कि उन्होंने 2021 में ब्रिज को पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर कर दिया था. पुल का निर्माण कार्य सेतु निगम द्वारा किया गया था. निर्माण की जिम्मेदारी पूरी होने के बाद सेतु निगम विभाग की ओर से इसको लोक निर्माण विभाग को सौंप दिया गया था. जिसके बाद एप्रोच रोड का निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी विभाग को करना था. हैंडओवर हो जाने के बाद पुल की जिम्मेदारी और देखरेख की जिम्मेदारी भी पीडब्ल्यूडी की थी.
जुलाई महीने में कट गई थी एप्रोच रोड
बदायूं को बरेली से जोड़ने वाले इस पुल फरीदपुर के गांव खल्लपुर स्थित रामगंगा नदी के ऊपर बनाया जा रहा था. बताया जा रहा है कि पुल की एप्रोच रोड पिछले साल जुलाई में ही कट गई थी. जिस वजह से पुल और गांव के बीच नदी बहने लगी. वहीं, पुल का मुहाना सीधे नदी की ओर खुल गया.
अब प्रशासन मामले में किस तरह से लापरवाही बरत रहा था, उसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि अधूरे पुल के ऊपर सिर्फ एक पतली सी दीवार बनाई गई थी. इस दीवार के टूटने के बाद प्रशासन ने दूसरी दीवार नहीं बनाई और न रास्ता बंद करने के लिए कोई बैरिकेडिंग की, जो कि इस हादसे की सबसे बड़ी वजह है. यदि पुल पर बैरिकेडिंग या पुल की शुरुआत में मजबूत दीवार बनाई गई होती वो आवागमन रोका जा सकता था, और शायद यह हादसा भी टल सकता था.
2020 में बनाया गया था पुल
बरेली को बदायूं से जोड़ने के लिए सेतु निगम ने 2020 में पुल का निर्माण कराया था. करीब 40 करोड रुपये की लागत से 667 मीटर लंबे इस पुल का निर्माण कार्य किया गया था. बताया जा रहा है कि पुल की एप्रोच रोड बनाने के लिए 2020 से 2023 तक विभाग फाइल ही घुमाता रहा. विभाग के अधिकारियों ने इस और ध्यान ही नहीं दिया कि एप्रोच रोड के बिना पुल अधूरा है और कभी भी हादसा हो सकता है. आखिर में वही हुआ.
पिछले साल बनी एप्रोच रोड राम गंगा में बह गई
बताया जा रहा है कि स्थानीय लोगों की मांग और विरोध के चलते लोक निर्माण विभाग ने पिछले वर्ष फरवरी महीने में 2 किमी एप्रोच रोड का निर्माण कार्य कराया था, लेकिन रामगंगा नदी के बहाव में लगभग 200 मीटर की एप्रोच रोड कट गई. कुछ समय बाद नदी के बहाव में एप्रोच रोड लगभग 500 मीटर तक कट गई. स्थानीय लोगों ने कई बार इसकी शिकायत भी की लेकिन विभाग की अधिकारियों ने पुल का रास्ता बंद नहीं किया और न दोबारा एप्रोच रोड का निर्माण कराया.
अधूरे पुल की वजह से कट गया 250 गांवों का संपर्क
रामगंगा नदी के ऊपर बने हुए इस अधूरे पुल की वजह से बरेली और बदायूं के लगभग ढाई सौ गांव का संपर्क कट गया है. बदायूं से फरीदपुर के लिए आने वाले लोगों को बरेली होकर गुजरना पड़ता है. इसी तरह से फरीदपुर के लोगों को बरेली होते हुए बदायूं की ओर जाना पड़ता है, जिस वजह से सफर और लंबा हो जाता है. कई बार स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत विभाग के अधिकारियों से की, मांग उठाई कि जल्द ही एप्रोच रोड को बनाकर पुल को शुरू किया जाए, लेकिन विभाग के अधिकारियों ने अनसुना कर दिया.
पुलिस ने कही ये बात
मामले में सर्किल ऑफिसर आशुतोष शिवम ने कहा कि इस साल की शुरुआत में बाढ़ के कारण पुल का अगला हिस्सा नदी में गिर गया था, लेकिन इस बदलाव को जीपीएस सिस्टम में अपडेट नहीं किया गया था. पुलिस ने कहा कि ड्राइवर नेविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा था और उसे यह एहसास नहीं हुआ कि पुल असुरक्षित है, जिससे कार क्षतिग्रस्त हिस्से से नीचे गिर गई.
शिवम ने आगे कहा कि क्षतिग्रस्त पुल के रास्ते पर कोई सुरक्षा अवरोध या चेतावनी संकेत नहीं थे, जिसके कारण यह जानलेवा दुर्घटना हुई. सूचना मिलने पर फरीदपुर, बरेली और दातागंज थाने की पुलिस टीमें मौके पर पहुंचीं. जिसके बाद वाहन और शवों को नदी से निकाला गया.
पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे परिजनों ने भी दावा किया कि गाड़ी में सवार सभी लोग जीपीएस के भरोसे जा रहे थे. पुल पर ज़ब गाड़ी जा रही थी तो अचानक से आधे रास्ते मे पुल ख़त्म हो गया. जिससे कार करीब 50 फीट नीचे नदी में गिर गई. मामले में परिवार के लोग विभागीय अधिकारियों को भी दोषी मान रहे हैं, क्योंकि पुल को अधूरा छोड़ दिया गया था और कोई बैरिकेड्स भी नहीं लगाया गया था.