2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं. लेकिन इससे पहले ही बीजेपी छोटे दलों को अपने साथ जोड़ने की कवायद में जुट गई है. बीजेपी का फोकस सबसे ज्यादा पूर्वांचल पर है, क्योंकि पूर्वांचल की कई सीटें ऐसी हैं, जहां प्रधानमंत्री के चेहरे के बावजूद बीजेपी के लिए सीटें जीतना हमेशा से मुश्किल भरा रहा है.
पहली बार बीजेपी ने अब छोटे दलों को जोड़ने की जिम्मेदारी डिप्टी सीएम बृजेश पाठक और मंत्री दयाशंकर सिंह को सौंप दी है. हालांकि इसका कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है लेकिन अब छोटे दलों से संवाद और उनके साथ गठबंधन की जिम्मेदारी बृजेश पाठक और दयाशंकर सिंह को सौंपी गई है.
बीजेपी को लगता है कि पश्चिम में कोई ऐसा दल नहीं है, जिसके साथ गठबंधन फिलहाल उसकी जरूरत हो, जो राजनीतिक दल पश्चिम में है उन्होंने अपनी राजनीतिक लाइन साफ बना रखी है. जैसे जयंत चौधरी की आरएलडी और आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद रावण हैं, जो बीजेपी के साथ जुड़ने को तैयार नहीं हैं. ऐसे में बीजेपी ने कुछ इलाकों में अपने सहयोगी ढूंढने का फैसला किया है और सबसे ज्यादा नजर और जरूरत पूर्वांचल की है.
ओमप्रकाश राजभर पूर्वांचल में बीजेपी के संभावित साझेदार हैं. 2022 विधानसभा चुनाव के बाद से वह लगातार बीजेपी को संकेत भी भेज रहे थे, लेकिन पहली बार बीजेपी को भी लगा ओमप्रकाश राजभर को एक बार फिर से गंवा देना कहीं बड़ी गलती साबित ना हो जाए, इसी को भांपकर बीजेपी ने उस चुनाव में ओम प्रकाश राजभर से मदद ली. जिसकी उसे बहुत जरूरत नहीं थी, लेकिन 2024 के लिहाज से यह संकेत देना जरूरी था कि बीजेपी पूर्वांचल में गंभीर है.
बीजेपी ने जो सर्वे किया है उसमें भी पूर्वांचल की कई सीटों पर बीजेपी के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं. जौनपुर, घोसी, लालगंज, गाजीपुर अम्बेडकरनगर, सलेमपुर आजमगढ़ बलिया जैसी सीटें हैं जो बीजेपी के लिए हमेशा से बेहद मुश्किल सीटें रही हैं. ऐसे में ओमप्रकाश राजभर जैसा साझेदार उन्हें चाहिए.
ओमप्रकाश राजभर को बीजेपी घोसी जैसी सीट देने की सोच रही है. हालांकि राजभर की मांग गाजीपुर, लालगंज और सलेमपुर भी है. माना जा रहा है कि ओमप्रकाश राजभर ही नहीं राजा भैया और संजय चौहान जैसे क्षेत्रीय चेहरों को साधने की तैयारी बृजेश पाठक पर दयाशंकर सिंह की जोड़ी करने वाली है.