उत्तर प्रदेश में बीजेपी के खराब प्रदर्शन के बाद अब पार्टी के भीतर जीते और हारे उम्मीदवारों ने आवाज उठानी शुरू कर दी है. उन्होंने 'आस्तीन के सांप' और 'गद्दार' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है. ज्यादातर मंत्री चुनाव हार गए, जो जीते वह भी बड़ी मुश्किल से जीत पाए. ऐसे में सबने अब पार्टी के भीतर के नेताओं पर ही ठीकरा फोड़ना शुरू कर दिया है.
उन्नाव से साक्षी महाराज हालांकि लगातार तीसरी बार जीते हैं लेकिन उनकी जीत का अंतर काफी कम हो गया है. उन्होंने इसके लिए पार्टी के भीतर के कुछ 'गद्दार' और 'आस्तीन के सांप' को जिम्मेदार ठहराया है. साक्षी महाराज ने कहा कि कुछ तो कमियां रही होंगी. मैं कल्याण सिंह के समय से राजनीति कर रहा हूं. यूपी की 80 सीटों पर आना-जाना रहा है. कुछ गद्दारों ने गद्दारी की है. जो आस्तीन के सांप बने हैं उनके लिए पार्टी समीक्षा करेगी.
वहीं, फतेहपुर से चुनाव हार चुकीं केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति ने भी पार्टी के भीतर के कुछ लोगों के द्वारा भीतरघात करने का दावा किया है. उन्होंने भीतरघात को ही अपनी हार का जिम्मेदार बताया है.
सूत्रों की मानें तो मिर्जापुर में अनुप्रिया पटेल के नजदीकी लोगों का भी मानना है कि बीजेपी के कई नेता ऊपर से तो साथ दिखे लेकिन अंदर ही अंदर हराने में अपनी ताकत लगाते रहे. उधर, जौनपुर से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े कृपाशंकर सिंह ने कहा कि वह हार से निराश नहीं है लेकिन हार की वजह शीर्ष नेताओं को जरूर बताएंगे.
हालांकि, सहारनपुर से चुनाव हारे राघव लखनपाल का मानना है कि 400 पार के नारे का उल्टा असर पड़ा और दलितों ने खिलाफ वोट किया. उन्होंने भी हार की समीक्षा करने की बात कही है.
कुछ इसी तरह की रिपोर्ट जीते और हारे उम्मीदवारों की मुख्यालय में पहुंचने लगी है. बीजेपी के कुछ उम्मीदवारों ने अपने-अपने लोकसभा के नेताओं की लंबी-चौड़ी फेहरिस्त हाई कमान को भेजी है. इसमें पार्टी के लिए भीतरघात करने वाले छोटे से बड़े लोगों के नाम शामिल हैं.
फिलहाल, हार की वजह बेशक कई नेता पार्टी के भीतरघात को ठहरा रहे हो लेकिन यह भी सच है कि बीजेपी का एक बड़ा वोट वर्ग इस बार हाथ से निकल गया है. ओबीसी में बीजेपी का वोट वर्ग माने जाने वाली कुशवाहा, कुर्मी, मौर्य, शाक्य इन बिरादरियों में बड़ी सेंध लगी है और दलित बिरादरी का बड़ा हिस्सा चुपचाप बीजेपी के खिलाफ 'इंडिया' एलाइंस को वोट कर गया.
यूपी में बीजेपी को हुआ तगड़ा नुकसान
गौरतलब है कि यूपी की कुल 80 सीटों में से सपा ने 37 पर जीत दर्ज की है. जबकि, बीजेपी को 33 सीटें मिली हैं. वहीं, कांग्रेस को 6 सीट, रालोद को 2 सीट, आजाद समाज पार्टी और अपना दल (एस) को एक-एक सीट हासिल हुई है. मायावती की पार्टी बसपा का खाता नहीं खुला है.
पिछली बार बीजेपी ने 62 सीटों पर जीत दर्ज की थी. इस बार उसे 29 सीटों का नुकसान हुआ है. वहीं, सपा को पिछली बार के मुकाबले 32 सीटों का फायदा हुआ है. सपा ने इस चुनाव में 37 सीटों पर जीत दर्ज की है.