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शादी की रस्मों के बाद नाव पर सवार होकर ससुराल पहुंची दुल्हन... घाघरा नदी में उफान के बीच डूबा है पूरा इलाका

उत्तर प्रदेश के गोंडा (Gonda) में हिलोरें मारती बाढ़ के बीच एक दुल्हन (bride) नाव पर सवार होकर अपनी ससुराल पहुंची. दूल्हे की इच्छा थी कि वह अपनी दुल्हन को कार से विदा करके लाए, लेकिन घाघरा नदी में उफान के चलते गांव में आई बाढ़ के बीच ऐसा नहीं हो सका. मजबूरी में दूल्हा और दुल्हन नाव अपने परिजनों के साथ नाव पर सवार होकर घर पहुंचे.

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नाव पर सवार होकर ससुराल पहुंची दुल्हन.
नाव पर सवार होकर ससुराल पहुंची दुल्हन.

यूपी के गोंडा (Gonda) में एक दुल्हन (bride) विदा होकर अपने दूल्हे के साथ नाव में सवार होकर ससुराल पहुंची. लोगों ने जब नाव में दूल्हा-दुल्हन को देखा तो हैरान रह गए. दरअसल, गोंडा में घाघरा नदी से सटे तरबगंज तहसील के आसपास के इलाकों में कई दिन से रह-रहकर बारिश हो रही है. इस वजह से नदी के नजदीक सभी गांवों में बाढ़ आ गई है. ऐसे हालात में लोगों को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

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बेयोन्दा मांझा गांव के रहने वाले राम कुमार की शादी एली परसौली गांव में थी. बाढ़ के चलते राम कुमार की बारात पहले नाव से पहुंची थी. राम कुमार अपनी दुल्हन को गाड़ी से विदा करके लाना चाहते थे, लेकिन बारिश के बीच बाढ़ के हालात में ऐसा नहीं हो सका.

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राम कुमार दुल्हन को गाड़ी से विदा करके कुछ ही दूर तक ला सके. इसके बाद उन्हें अपने गांव जाने के लिए नाव में बैठना पड़ा. इस दौरान उनके घर की महिलाएं भी दुल्हन के साथ नाव में सवार होकर गांव पहुंचीं.

प्रधान बोले- शादी की तैयारियां हो चुकी थीं, इसलिए टाल नहीं पाए

गांव के प्रधान केशवराम यादव ने कहा कि गांव में शादी के लिए पहले से तारीख तय थी. 11 जुलाई को शादी हुई. पहली बार ऐसा हुआ कि बाढ़ जल्दी आ गई. नेपाल से पानी छोड़े जाने की वजह से बाढ़ आई है. सारी तैयारियां पूरी होने की वजह से शादी को टाला नहीं जा सका, बशर्ते शादी करना ही पड़ी.

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इधर से दूल्हा भी नाव से गया था और वापसी में दुल्हन को भी नाव से विदा करवाकर लाया गया. इसके अलावा कोई व्यवस्था यहां संभव नहीं थी. एक नाव पर दुल्हन है और हम लोग दूसरी नाव पर हैं. प्रशासन के द्वारा केवल नाव दी गई है.

दरअसल, गोंड़ा में घाघरा नदी खतरे के निशान से 57 सेमी ऊपर पहुंच गई थी. इससे गोंड़ा के 18 गांवों में बाढ़ आ गई. तरबगंज तहसील क्षेत्र में घाघरा नदी के किनारे बसे गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था. हालांकि नदी अभी भी खतरे के निशान से 13 सेमी ऊपर बह रही है, लेकिन कई गांवों में अभी भी पानी भरा हुआ है. दैवीय आपदा है, जो सहयोग है, लेखपाल बराबर आ रहे हैं.

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