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'बिकरू कांड' के बाद से खूब दौड़ रहा है यूपी में बुलडोजर, जानिए अब तक ढहा चुका है क्राइम का कितना साम्राज्य!

UP Bulldozer Action: यूपी में माफियों, अपराधियों की अवैध संपत्तियों पर ताबड़तोड़ बुलडोजर की कार्रवाई हो रही है. ऐसे में आइए जानते हैं बुलडोजर की पूरी कहानी. प्रदेश में अब तक कितने माफियाओं की संपत्ति पर चला बुलडोजर और इस कार्रवाई के क्या हैं नियम...

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यूपी में अवैध संपत्तियों पर ताबड़तोड़ बुलडोजर की कार्रवाई हो रही है
यूपी में अवैध संपत्तियों पर ताबड़तोड़ बुलडोजर की कार्रवाई हो रही है

यूपी में 'बुलडोजर' चर्चा में है. जमीन पर भी और सियासत में भी. माफियों, अपराधियों की अवैध संपत्तियों पर ताबड़तोड़ बुलडोजर की कार्रवाई हो रही है. इसी के चलते कई लोग सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ को 'बुलडोजर बाबा' की उपाधि दे रहे हैं. ऐसे में आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश में 'बाबा के बुलडोजर' की पूरी कहानी. साथ ही जानेंगे कब, कहां और कैसे चला बुलडोजर, अब तक कितने माफियाओं की संपत्ति 'बुलडोजर एक्शन' से हुई ध्वस्त. और इस कार्रवाई के क्या हैं नियम...

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दरअसल, यूपी में बुलडोजर की एंट्री हुई थी कानपुर में हुए 'बिकरू कांड' के बाद. जब कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे और उसके गैंग के लोगों ने 8 पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या कर दी थी. तब प्रशासन ने सबसे पहले विकास दुबे के घर पर बुलडोजर चलवाया था. लेकिन इसके बाद तो यह बुलडोजर माफियाओं, गुंडों और भू माफियाओं के लिए बुरे सपने जैसे बन गया. प्रदेश में माफियाओं पर नकेल कसने के लिए योगी सरकार ने बुलडोजर एक्शन को एक बड़ा हथियार बनाया. 

मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद जैसे बड़े माफियाओं से लेकर पुलिस पर हमला करने वाले विकास दुबे जैसे मनबढ़ अपराधियों की संपत्ति पर बुलडोजर चलाकर सरकार ने उनकी कमर तोड़कर रख दी. साथ ही साथ एक कड़ा संदेश भी दिया. 

'बिकरू कांड' के बाद हुई बुलडोजर एक्शन की शुरुआत

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2 जुलाई 2020 की रात को उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में सबसे बड़ा हमला हुआ था. उस दिन रात को कानपुर के बिकरू गांव में गैंगस्टर विकास दुबे ने साथियों के साथ मिलकर 8 पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतार दिया था. पुलिस के ऊपर इससे पहले ददुआ, निर्भय गुर्जर जैसे कुख्यात डकैतों ने भी इतना बड़ा हमला नहीं किया था और ना ही पुलिस को इतनी बड़ी शहादत देनी पड़ी थी. 

विकास दुबे के साम्राज्य पर बुलडोजर एक्शन

इस वारदात के बाद पुलिस ने भी जवाब देना शुरू किया. विकास दुबे गैंग के एक-एक आदमी को एनकाउंटर में मारकर गिराया जाने लगा. इसके साथ ही प्रदेश में बुलडोजर ने भी गरजना शुरू कर दिया. लगभग 40 थानों की पुलिस फोर्स और उत्तर प्रदेश के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार, एसएसपी कानपुर दिनेश पी, आईजी कानपुर जेएन सिंह की मौजूदगी में विकास दुबे के उस घर पर बुलडोजर का एक्शन हुआ जिसकी छत से चढ़कर बदमाशों ने डिप्टी एसपी देवेंद्र मिश्रा समेत आठ पुलिसकर्मियों को गोलियों से छलनी कर दिया था. 

चार बुलडोजर लगाकर विकास दुबे की अपराध से अर्जित संपत्ति वो फिर चाहे मकान हो या फिर उसकी गाड़ियां सब को तहस-नहस कर दिया गया. उत्तर प्रदेश के साथ-साथ ये दृश्य पूरा देश देख रहा था. लेकिन ये कार्रवाई यहीं नहीं रुकने वाली थी. बीते कुछ सालों में उत्तर प्रदेश पुलिस ने माफियाओं की अरबों की संपत्ति पर हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त कर, उन्हें गैंगस्टर एक्ट में जब्त किया है. 

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एक नजर आंकड़ों पर...

20 मार्च 2017 से 6 अगस्त 2023 तक उत्तर प्रदेश में माफियाओं पर गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत की गई अवैध संपत्तियों के जब्तीकरण की कार्रवाई- 

* गैंगस्टर एक्ट के तहत 21417 केस दर्ज और 68235 गिरफ्तार. 

* अवैध संपत्तियां पर गैंगस्टर एक्ट के तहत 4166 मामले (10,703करोड़) 107,032,500,923 रु की सम्पत्ति जब्त की गई. 

* मुख्यालय स्तर पर चिह्नित किए गए 69 माफिया पर की गई कार्रवाई में 3627 करोड़ 82 लाख 14242 रुपए की संपत्ति का जब्तीकरण और ध्वस्तीकरण किया गया. 

अतीक अहमद की 416 करोड़ की अवैध संपत्ति जब्त

माफिया डॉन अतीक अहमद के कब्जे से करीब 752 करोड़ 27 लाख की संपत्ति पर बुलडोजर चला कर मुक्त कराया गया. अब तक 416 करोड़ 92 लाख की संपत्ति जब्त तक की गई. 

अतीक की अवैध संपत्ति पर एक्शन

मुख्तार अंसारी पर भी एक्शन 

वहीं, माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की 314 करोड़ 23 लाख की संपत्ति गैंगस्टर एक्ट में जब्त की गई है. अब तक 285 करोड़ 70 लाख की अवैध कब्जे वाली संपत्ति को बुलडोजर चलाकर मुक्त कराया गया है. 

कितने माफियाओं पर कार्रवाई की गई? 

माफियाओं पर कार्रवाई की जद में संगठित अपराध के हर क्षेत्र के माफिया को शामिल किया गया है, जिसमें अपराधिक माफिया 893, भू माफिया 1179, खनन माफिया 130, वन माफिया 53, शराब माफिया 661, शिक्षा माफिया 30, गो तस्कर माफिया 375, अन्य माफिया 182 शामिल हैं. कुल 3503 संगठित गिरोह बनाकर अपराध करने वाले माफिया पर कार्रवाई की गई है. 

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कौन से नियम के तहत हो रही कार्रवाई? 

बता दें कि सरकार ने माफिया और अपराधियों की संपत्ति पर बुलडोजर का जो एक्शन शुरू किया उसमे एक्शन असल में 3 तरह से लिया जाता है. इसमें अपराध से अर्जित संपत्ति, सरकारी जमीन को कब्जा कर बनाई गई संपत्ति और बिना स्थानीय प्रशासन की अनुमति के बनाई गई संपत्ति शामिल होती है. 

सबसे पहले बात करते हैं अपराध से अर्जित संपत्ति की- जब किसी व्यक्ति पर गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा दर्ज होता है तो उस मुकदमे में गैंगस्टर अधिनियम के 14 (1) के तहत संपत्ति जब्तीकरण की कार्रवाई की जाती है. इसमें आरोपी के ऊपर दर्ज हुए पहले मुकदमे के बाद से अर्जित की गई पूरी संपत्ति अपराध से अर्जित संपत्ति मानी जाती है. यानी माना जाता है कि उस व्यक्ति ने यह संपत्ति अपराध से बनाई है जिसे गैरकानूनी मानकर जब्त किया जाता है. 

यूपी में 'बुलडोजर' चर्चा में है

दूसरे वो संपत्ति जो सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाई जाती है- ऐसी सरकारी जमीन को खाली कराने के लिए उस इमारत का ध्वस्तीकरण किया जाता है जिसे स्थानीय प्रशासन या विकास प्राधिकरण के द्वारा चिन्हित कर कराया जाता है कि यह सरकारी जमीन है और इस पर बनी इमारत अवैध है. इसको बुलडोजर से गिरा दिया जाता है. 

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तीसरी उस संपत्ति पर बुलडोजर चलता है जो स्थानीय विकास प्राधिकरण या नगर निगम के द्वारा बिना नक्शा पास करवाए बनवाई जाती है. बिना नक्शा पास करवाए खड़ी की गई उस इमारत को अवैध बताकर ध्वस्तीकरण करवाया जाता है. 

पुलिस के पास ध्वस्तीकरण का अधिकार नहीं

गौरतलब है कि पुलिस को कहीं भी किसी भी प्रावधान में संपत्ति के ध्वस्तीकरण का अधिकार नहीं है. वह सिर्फ प्राधिकरण या नगर निगम के द्वारा की गई कार्रवाई में सुरक्षा के लिए खड़ी हो सकती है. पुलिस खुद से किसी मकान को नहीं गिरवा सकती है. 

माफियाओं की कब्जाई जमीन पर गरीबों का आशियाना 

प्रदेश सरकार माफियाओं के कब्जे वाली जमीन पर बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण को ढहाने के बाद वहां की जमीन को गरीबों के आवास व अन्य सरकारी योजनाओं में भी प्रयोग कर रही है. जैसे- प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद के कब्जे वाली लूकरगंज की जमीन पर गरीबों के लिए 76 आवास बनाए हैं. प्रधानमंत्री गरीब आवास योजना के तहत बनाए गए ये फ्लैटनुमा आवास उन गरीबों को दिए गए हैं, जिनके लिए अपनी छत का होना एक सपना था. 

जिस जमीन पर था अतीक का कब्जा, वहां तैयार हुए फ्लैट

प्रयागराज की तर्ज पर अब उत्तर प्रदेश के हर विकास प्राधिकरण व जिला प्रशासन ने माफियाओं की ऐसी जमीन को चिन्हित करना शुरू कर दिया है, जिन पर गरीबों के लिए आवास बनाया जा सके. लखनऊ में भी माफिया मुख्तार अंसारी के कब्जे वाली डालीबाग की जमीन पर विकास प्राधिकरण और जिला प्रशासन गरीबों के लिए आवास की कार्य योजना बनाने में लगा है. 

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पुलिस का क्या कहना है? 

इस संबंध में यूपी के स्पेशल डीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार का कहना है कि पुलिस माफियाओं पर हर क्षेत्र में एक्शन ले रही है.  माफियाओं की अपराध से अर्जित संपत्ति को गैंगस्टर एक्ट में जब्त किया जा रहा है. माफिया ने अगर सरकारी जमीन पर कब्जा कर कोई निर्माण किया है तो उसे जिला प्रशासन की मदद से ढहाया जा रहा है. गैंगस्टर एक्ट के तहत पुलिस कार्रवाई कर रही है और आगे भी एक्शन जारी रहेगा. 

(इनपुट- संतोष शर्मा) 


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