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'अचानक तेज आवाज आई और हर तरफ धुआं ही धुआं था...', ग्रामीणों ने बयां की गोंडा ट्रेन हादसे की आंखों देखी

18 जुलाई को गोरखपुर जा रही चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस की 17 बोगियां डिरेल हो गई थी, जिससे करीब 5 बोगियां पलट गईं. दुर्घटना में 4 पैसेंजर की मौत हो गई, जबकि घायलों के बारे में अधिकारियों के अलग-अलग दावे हैं. जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने जहां लगभग 10 घायलों के बारे में बताया तो पूर्वोत्तर रेलवे की जीएम सौम्या माथुर ने 31 घायलों की बात कही. दुर्घटना झिलाही व मोतीगंज स्टेशन के बीच करीब 2:30 बजे के आसपास की हुई.

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गोंडा में हुए ट्रेन हादसे में 4 यात्रियों की मौत हो गई
गोंडा में हुए ट्रेन हादसे में 4 यात्रियों की मौत हो गई

यूपी के गोंड़ा में 18 जुलाई को बड़ा ट्रेन हादसा हुआ. यहां गोरखपुर जा रही चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस की 17 बोगियां डिरेल हो गई थी, जिससे करीब 5 बोगियां पलट गईं. दुर्घटना में 4 पैसेंजर की मौत हो गई, जबकि घायलों के बारे में अधिकारियों के अलग-अलग दावे हैं. जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने जहां लगभग 10 घायलों के बारे में बताया तो पूर्वोत्तर रेलवे की जीएम सौम्या माथुर ने 31 घायलों की बात कही. दुर्घटना झिलाही व मोतीगंज स्टेशन के बीच करीब 2:30 बजे के आसपास की हुई. 

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घटना की सूचना से हड़कंप मच गया था. घटनास्थल पर डीएम नेहा शर्मा व एसपी विनीत जायसवाल भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे थे. आरपीएफ भी मौके पहुंचा और बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. एसडीआरएफ को भी मदद के लिए बुलाया गया था. ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों को अन्य ट्रेनों से मनकापुर स्टेशन भेजा गया, जहां से वह अपने गंतव्यों के लिए रवाना हुआ. 

घटना के बाद स्थानीय ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए थे, जिन्होंने अधिकारियों के आने से पहले से ही यात्रियों को बाहर निकलने में मदद करना शुरू कर दिया था. दरअसल, रेल हादसा होने पर जोरदार आवाज सुनकर सबसे पहले पिकौरा व कंधईपुर गांव के सुनील, पिंटू समेत कई ग्रामीण मौके पर पहुंचे. सुनील व प्रशांत सिंह ने बताया कि जोर से अवाज सुनकर हम सब मौके पर पहुंचे और शीशा तोड़कर करीब एक दर्जन लोगों को बाहर निकाला. हम लोगों ने खटिया से घायलों को एम्बुलेंस तक पहुंचाया. 

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सीपीआरओ रेलवे पंकज सिंह के मुताबिक करीब 30 घंटे गोंड़ा गोरखपुर अप व डाउन लाइन बाधित थी, लेकिन हजार से ज्यादा कर्मचारियों ने उच्चधिकारियों की मौजूदगी में लाइनों को ठीक कर रेल संचालन बहाल कराया. 

उधर, एसपी विनीत जायसवाल ने हादसे में 4 मौतों की पुष्टि करते हुए बताया कि हमारी पुलिस ,एलआईयू व अधिकारियों ने ट्रेन के ड्राइवर व सहायक ड्राइवर से घटना के होने के कारणों की विस्तृत जानकारी ली तो उन दोनों ने किसी भी धमाके से इनकार करते हुए कहा कि जब वह यहां पहुंचे तो इंजन में कुछ झटका लगा, जिससे पटरियों से आवाज आई, नीचे कुछ गड़गड़ाहट हुई. इसके बाद उन्होंने इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया, जिससे गाड़ी के रुकने से यह डिरेलमेंट की घटना हुई है. जीएम रेलवे सौम्य माथुर ने बताया कि घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं. दरअसल, पहले जानकारी आई थी कि लोको पायलट ने दावा किया है कि उन्होंने हादसे से पहले धमाके की आवाज सुनी थी. हालांकि बाद में पुलिस ने इसे खारिज कर दिया.

यात्रियों ने बयां किया खौफनाक मंजर
 
ट्रेन में सफर कर रहे यात्री दिनेश पाल ने बताया कि अचानक खड़खड़ाहट की आवाज हुई और 20 से 25 सेकेंड में सब कुछ हो गया. करीब 1 दर्जन यात्री घायल हुए. हम लोग चंडीगढ़ से डिब्रूगढ़ जा रहे थे. वहीं दूसरे यात्री पवन ने बताया कि हम सब कंपार्टमेंट में बैठे थे. तभी अचानक आवाज के साथ ट्रेन हिली और जोर से गड़गड़ाहट हुई. ईश्वर की कृपा थी कि हम सुरक्षित हैं. कई लोग घायल हुए हैं.

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यात्रियों को बाहर निकालकर पानी पिलाया: ग्रामीण

रेल हादसे की जोरदार आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे पिकौरा गांव के निवासी सुनील ने बताया कि हमारा गांव पटरी के एकदम बगल में ही है. हम सब बैठे थे. अचानक तेज आवाज आई और धुआं-धुआं फैल गया. हम लोगों ने देखा तो कई बोगी पलटी हुई थी. हम लोग दौड़ कर वहां गए. शीशे को हम लोगों ने सब्बल से तोड़कर कई घायलों को निकाला. उसके बाद सबको पानी पिलाया. गांव वालों ने बहुत मेहनत की. हम लोगों ने घायलों को खटिया से एम्बुलेंस तक पहुंचाया था. 

दूसरे ग्राणीम प्रशांत ने बताया कि हमारा गांव घटनास्थल से 2 सौ मीटर दूर है. हम सबने तेज आवाज सुनी तो भाग कर यहां आए. देखा कि ट्रेन पलट गई है. हम सब गांव वालों ने सभी घायलों को बाहर निकाला. हमने एक बॉडी भी देखी थी. यात्री लोग बहुत परेशान थे. गांव वाले लोग सबकी मदद कर रहे थे. हम लोगों ने 112 नंबर पर फोन भी किया और घटना की जानकारी दी.

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