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Ayodhya Ram Mandir: राम की नगरी पहुंचे कांग्रेसी नेता, सरयू नदी में डुबकी लगाकर बोले- अयोध्या सब की है, राम सबके हैं

मकर संक्रांति के अवसर पर कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई अयोध्या में राम लला के द्वार पहुंची. कांग्रेस के कई नेताओं ने आज अयोध्या में स्नान किया. यूपी कांग्रेस प्रमुख अजय राय ने पार्टी नेताओं अविनाश पांडे, दीपेंद्र हुड्डा, अखिलेश प्रताप सिंह के साथ अयोध्या में सरयू नदी में डुबकी लगाई.

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कांग्रेसी नेताओं ने सरयू नदी में डुबकी लगाई
कांग्रेसी नेताओं ने सरयू नदी में डुबकी लगाई

मकर संक्रांति के अवसर पर कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई अयोध्या में राम लला के द्वार पहुंची. कांग्रेस के कई नेताओं ने आज अयोध्या में स्नान किया. यूपी कांग्रेस प्रमुख अजय राय ने पार्टी नेताओं अविनाश पांडे, दीपेंद्र हुड्डा, अखिलेश प्रताप सिंह के साथ अयोध्या में सरयू नदी में डुबकी लगाई. कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे ने आज तक से बातचीत में कहा कि संक्रांति के मौके पर हम सभी नेता ने डुबकी लगाई है, अयोध्या सब की है, राम सबके हैं, यह बीजेपी ना बताएं कि किसे आना है, किसे नहीं.

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उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा के सवाल पर कहा कि 22 तारीख के कार्यक्रम में हम क्यों जाएं, यह उनका राजनीतिक कार्यक्रम है, रामलाल के दर्शन और सरयू में डुबकी लगाने कोई भी कभी भी आ सकता है. वहीं, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि कांग्रेस के नेता हमेशा से अयोध्या आते रहे हैं. इसमें कुछ नया नहीं है, संक्रांति के पर्व पर सरयू में डुबकी लगाना सभी कांग्रेसियों की आस्था है. उन्होंने कहा कि राम के नाम पर बीजेपी सियासत करती है. हमारे लिए राम पूजनीय हैं और मकर संक्रांति पर डुबकी लगाना ये हमारी श्रद्धा का विषय है, इसमें कोई सियासत नहीं है.

अयोध्या दौरे पर कांग्रेस नेता और प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत भी पहुंची. उन्होंने कहा कि हम रामलला के दर्शन के लिए आये हैं, इसे 'राजनीतिक' कहना बीजेपी की गलती है. सच तो ये है कि बीजेपी धर्म के नाम पर गंदी राजनीति कर रही है.

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'कांग्रेस हाईकमान ने ठुकरा दिया था न्योता' 
बता दें कि बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने 22 जनवरी को प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने का निमंत्रण ठुकरा दिया था. कांग्रेस नेतृत्व ने इसे बीजेपी का इवेंट बताया था और इसे 'राजनीतिक प्रोजेक्ट' करार दिया था. कांग्रेस का कहना था कि एक निजी मसला है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने बीजेपी और आरएसएस के नेताओं द्वारा 'अधूरे' मंदिर के उद्घाटन के पीछे के मकसद पर सवाल उठाए थे.

22 जनवरी को होनी है रामलला की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा
बताते चलें कि अयोध्या में 22 जनवरी को रामलला की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा होनी है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य यजमान के रूप में शामिल होंगे. ऐसे में केंद्र से लेकर राज्य सरकार के अधिकारी कार्यक्रम की तैयारियों में व्यस्त हैं. अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा से एक हफ्ते पहले धार्मिक कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे. प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में मेहमानों को न्योते भेजे जा रहे हैं. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारियों ने बेहद सधे अंदाज में अतिथियों की लिस्ट तैयार की है. मेहमानों की सूची में करीब 150 समुदायों से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है. इन सभी के पास अब न्योते मिलने की पुष्टि होने लगी है.

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