प्रयागराज के महाकुंभ में हर रोज लाखों की तादाद में श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए आ रहे हैं. ऐसे में वहां छोटा कारोबार करने वाले भी बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं. पिछले दिनों एक युवक का वीडियो वायरल हुआ था, जिसने मेला क्षेत्र में सिर्फ पांच दिन तक नीम की दातून बेचकर 40 हजार रुपये कमा लिए थे. एक अन्य वीडियो में दावा किया गया कि महाकुंभ में श्रद्धालुओं को चंदन लगाकर एक शख्स ने लाखों की कमाई की है. यही नहीं दावा तो ये भी किया जा रहा है कि मेला क्षेत्र में भीख मांगकर भी लोग रोजाना हजार रुपये से ज्यादा कमा रहे हैं.
40 हजार रुपये की पूंजी लगाई
ऐसे ही वायरल वीडियो देखकर प्रयागराज के दो युवक मंगला प्रसाद और नितेश ने कुंभ मेला क्षेत्र में अपनी परचून की दुकान लगाई थी. वह बताते हैं कि माता-पिता, भाई और दोस्त से 10-10 हजार रुपये लेकर कुल 40 हजार की पूंजी निवेश की थी. इस दुकान में चाय-नाश्ते से लेकर खाने-पीने का सामान और स्नेक्स मिलते हैं. इसके लिए बाकायदा राशन लेकर वह मेला क्षेत्र में आए थे. दुकान भी ऐसी जगह थी, जहां तमाम शंकाराचार्य, महामंडलेश्वर और धर्मगुरुओं के टैंट बने हुए थे. दुकान के सामने से रोजाना लाखों की संख्या में श्रद्धालु भी गुजरते थे, फिर भी इनका का धंधा घाटे में रहा.
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मंगला प्रसाद और उनके दोस्त नितेश ने बताया कि हम बाकी के सामान के साथ सिर्फ एक रुपये में नीम का दातून बेच रहे हैं. इसके लिए काफी मेहनत की और पेड़ पर चढ़कर लकड़ी तोड़कर लाए थे लेकिन यहां कुछ भी बिका नहीं और लकड़ी भी अब सूख चुकी है. उन्होंने बताया कि हम भी सोचकर आए थे कि सोशल मीडिया वाले युवक की तरह दुकान लगाकर कुछ मुनाफा कमा लेंगे. लेकिन मुनाफा तो दूर अब तक 30 हजार की कमाई हो पाई है और 10 हजार घाटे में ही चल रहे हैं.
भंडारे में सब फ्री तो खरीदेगा कौन
युवकों ने बताया कि सोचकर आए थे कि चालीस हज़ार लगा रहे हैं तो दो-तीन लाख मिल जायेगा. जब सोशल मीडिया पर वीडियो देख रहे थे कि दातून वाला लाखों कमा सकता है, हमने सोचा चाय-नाश्ता बेचकर इसका आधा ही कमा लेंगे तो बहुत है. इसी चक्कर में कुल चालीस हज़ार जमा किए थे और अब सब कुछ पानी में चला गया है. धंधा सब गड़बड़ हो गया, हम मोटा मुनाफा सोच रहे थे और यहां आकर नुकसान हो गया.
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उन्होंने बताया कि मेला क्षेत्र में पानी, चाय, खाना सब कुछ भंडारे में एकदम फ्री मिल रहा है. ऐसे में दुकान से खरीदकर कौन खाना चाहेगा. भीड़ वाले दिनों में तो दूध 100 रुपये लीटर तक बिका है और हम कितना पानी मिलाकर चाय बेचें, स्वाद भी तो रहना चाहिए. दुकानदार ने बताया कि जो लोग भी महाकुंभ आ रहे हैं कोई खरीदारी के लिए रुक नहीं रहा, लोग आते हैं और सीधे स्नान के लिए घाट पर चले जाते हैं. वहां से लौटकर सीधे अपने घरों के लिए रवाना हो जाते हैं, भीड़ में किसी के पास खरीदारी का टाइम नहीं है.
राशन अब वापस घर ले जाएंगे
युवकों ने बताया कि दुकान अब एकदम ठप हो गई है और जो भी कुछ बिक्री हुई थी वह मौनी अवामस्या के आसपास थी, जब लोगों की भारी भीड़ यहां आई और खरीदारी भी की. श्रद्धालु अब भी स्नान के लिए आ रहे हैं लेकिन कुछ खाने-पीने का सामान नहीं खरीद रहे. ऐसे में हमें अब बेसन, मैदा समेत पूरा राशन वापस ले जाना पड़ रहा है.
अब महाकुंभ से साधु-संन्यासियों के शिविर उठ चुके हैं और कल्पवासी भी यहां से जा चुके हैं. महाकुंभ में अब सिर्फ स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ है. इनकी दुकान भी अब यहां से हटने वाली है. लेकिन मंगला प्रसाद के मन में उदासी है, जो देखकर, सोचकर वह मेला क्षेत्र में व्यापार करने के लिए आए थे, वो मकसद पूरा नहीं हो सका. आखिर में उन्होंने कहा कि बोरी भरकर दातून लाए थे, जो बिकी ही नहीं. अब घर ले जाकर चूल्हे में जला लेंगे.