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'हिंदू राष्ट्र का बिगुल बजा दो सनातनियों' , धीरेंद्र शास्त्री ने प्रयागराज में लगाई दहाड़

बागेश्वर धाम वाले कथावचक धीरेंद्र शास्त्री गुरुवार को प्रयागराज पहुंचे. उन्होंने यहां संगम में डुबकी लगाई. इसके बाद समर्थकों से उन्होंने हिंदू राष्ट्र का बिगुल बजाने की अपील की. उन्होंने कहा कि यहां जितने सनातनी हिंदू हैं, हिंदू राष्ट्र के साथ जो भी हैं, हाथ उठाएं, हिंदू राष्ट्र का बिगुल बजा दें.

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धीरेंद्र शास्त्री (File Photo)
धीरेंद्र शास्त्री (File Photo)

मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्थित बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री गुरुवार को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर पहुंचे. उन्होंने संगम में चल रहे माघ मेले में पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई. डुबकी लगाने के बाद उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें साधु-संतों का आशीर्वाद पाने का मौका मिला. 

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उन्होंने आगे कहा कि जिस पर साधुओं का आशीर्वाद रहता है, वह हमेशा झंडे गाड़ता है. लोग कहते हैं संतों से होता क्या है? लेकिन मैं कहता हूं संतों से लाखों करोड़ों लोगों की रक्षा होती है. उन्होंने आगे कहा कि यहां जितने सनातनी हिंदू हैं, हिंदू राष्ट्र के साथ जो भी हैं. हाथ उठाएं और हिंदू राष्ट्र का बिगुल बजा दें.

धीरेंद्र शास्त्री निर्मोही अखाड़े के संत संतोष दास (सतुआ बाबा) के यहां साधु-संतों से आशीर्वाद लेने आए हैं. उन्होंने कहा कि मैं यहां किसी से मिलने नहीं, बल्कि सिर्फ संतों का आशीर्वाद लेने आया हूं. धीरेंद्र शास्त्री यहां हिंदू राष्ट्र को लेकर चलाई जा रही मुहिम के लिए सभी का समर्थन मांगा. 

माघ मेले से धीरेंद्र शास्त्री  हिंदुत्व की अलख जगाकर सनातन धर्म की मजबूती के लिए एक बड़ा संदेश दिया है. वहीं, विहिप पंडित धीरेंद्र शास्त्री की मुहिम का समर्थन कर उनके साथ खड़े होने की बात कह चुका है. माघ मेले से निकलकर शास्त्री शहर से 50 किलोमीटर दूर मेजा में मां शीतला कृपा महोत्सव में जाकर लाखों श्रद्धालुओं को कथा सुनाएंगे.

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बता दें कि धीरेंद्र शास्त्री तब से काफी चर्चा में हैं, जबसे महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने उन पर अंधविश्वास और जादू-टोना को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है. समिति के अध्यक्ष श्याम मानव ने दावा किया था कि धीरेंद्र शास्त्री 'दिव्य दरबार' और 'प्रेत दरबार' की आड़ में 'जादू-टोना' को बढ़ावा देते हैं. उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री पर आम लोगों को लूटने, धोखाधड़ी करने और उनका शोषण करने का आरोप भी लगाया था. 

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने धीरेंद्र शास्त्री को चुनौती भी दी थी कि अगर वो उनके बीच दिव्य दरबार लगाते हैं और चमत्कार करके दिखाते हैं तो वो उन्हें 30 लाख रुपये देंगे. समिति का कहना था कि धीरेंद्र शास्त्री 'दिव्य दरबार' नाम से जो सभा करते हैं, उसमें दो कानूनों का उल्लंघन होता है. पहला है- 2013 का महाराष्ट्र का जादू-टोना विरोधी कानून और दूसरा है- 1954 का ड्रग्स एंड रेमेडीज एक्ट. श्याम मानव ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ नागपुर में शिकायत भी की थी. हालांकि, नागपुर पुलिस ने जांच के बाद उन्हें क्लीनचिट दे दी थी.

हालांकि, इन आरोपों पर जवाब देते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने दावा किया था कि वो कोई अंधविश्वास नहीं फैलाते और न ही किसी की समस्या दूर करते हैं. धीरेंद्र शास्त्री ने ये भी कहा था कि 'हाथी चले बाजार, कुत्ते भौंके हजार.' इसके बाद से धीरेंद्र शास्त्री के दावों को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई थी. कुछ लोग इसे आस्था का मुद्दा बता रहे हैं, तो कुछ लोग अंधविश्वास बताकर धीरेंद्र शास्त्री पर सवाल खड़े कर रहे थे. 

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