यूपी के हाथरस जिले में हुए भगदड़ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने DM और SP को तलब किया है. हाईकोर्ट ने हाथरस के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को 15 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और यह बताने का निर्देश दिया है कि 2024 में हुई भगदड़ के लिए उन्हें जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया जाना चाहिए. कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 15 जनवरी तय की है.
मामले में न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने कहा कि ऐसी घटनाएं आयोजकों द्वारा की गई खराब व्यवस्था का परिणाम हैं. उन्होंने मंजू देवी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा- "आयोजक अपने लाभ के लिए निर्दोष लोगों को बुलाते हैं और उचित व्यवस्था न होने के कारण ऐसी घटनाएं होती हैं. यह देखना प्रशासन की जिम्मेदारी है कि पुलिस बल, चिकित्सा आदि की उचित व्यवस्था है या नहीं."
हाईकोर्ट ने आगे कहा, "अतीत में ऐसी कई घटनाएं देखी गई हैं जहां लाखों लोग ऐसे आयोजनों में इकट्ठा होते हैं, गरीब और अशिक्षित लोग आस्था और विश्वास के कारण इकट्ठा होते हैं और अपना आपा खोने के कारण भगदड़ में लोगों की असमय मौत हो जाती है."
वहीं, सरकारी वकील रूपक चौबे ने कहा कि आयोजकों ने 80,000 लोगों की भीड़ का अनुमान लगाते हुए अनुमति मांगी थी, लेकिन कार्यक्रम स्थल पर 2.5 लाख लोगों की भीड़ जुट गई.
121 लोगों की हुई थी मौत
आपको बता दें कि 2 जुलाई, 2024 को हाथरस जिले के फुलराई मुगलगढ़ी गांव में सूरजपाल उर्फ भोले बाबा के अनुयायियों द्वारा आयोजित 'सत्संग' कार्यक्रम के दौरान भगदड़ मच गई थी जिसमें 121 लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए थे. मामले में सब-इंस्पेक्टर बृजेश पांडे की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला और पुलिस प्रशासन से हाथरस की घटना से सबक लेने और प्रयागराज में होने वाले आगामी महाकुंभ के लिए उचित व्यवस्था करने की आवश्यकता जताई, ताकि ऐसी दुर्घटनाओं से बचा जा सके.