अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां जोरों पर है. रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए 2 मंडप होंगे, जिसमें कुल 9 हवन कुंड शास्त्री विधि से बनाई जाएगी. इन कुंडों को बनाने की जिम्मेदारी भी काशी के विद्वानों को मिली है. इससे पहले रामलला के मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा में कर्मकांड और मुहूर्त की जिम्मेदारी काशी के विद्वानों को मिल चुकी है.
मंगलवार को काशी से अयोध्या के लिए 5 सदस्यीय दल कुंड निर्माण के लिए रवाना हुए हैं. इस दल में कर्मकांडी विद्वान अरुण दीक्षित, पंडित सुनील दीक्षित, अनुपम कुमार दीक्षित और पंडित गजानन जोधकर के साथ ही सांगवेद महाविद्यालय के आचार्य और यज्ञ कुंड निर्माण पद्धति के विशेषज्ञ पंडित दत्तात्रेय नारायण रटाटे भी हैं.
2 मंडपों में कुल 9 हवन कुंड बनाए जाएंगे
'आजतक' से बातचीत में यज्ञ कुंड निर्माण पद्धति के विशेषज्ञ पंडित दत्तात्रेय नारायण रटाटे ने बताया कि 2 मंडपों में कुल 9 कुंड बनाया जाएगा. इसमें 8 कुंड 8 दिशाओं में होगा, जबकि एक कुंड आचार्य के लिए बनाया जाएगा. इन कुंडों के निर्माण में महापंडित विट्ठल दीक्षित रचित मंडप कुंड सिद्धि नामक ग्रंथ में कुंडों के निर्माण की पद्धति और विशेषता के बारे में जानकारी है. ईश्वर संहिता और पंचरात्रागम में यज्ञ कुंडों की ज्यामिति, परिमाप और शुभ फलों का जिक्र है.
सुखों की प्राप्ति के लिए किया जाएगा आचार्य कुंड का निर्माण
उन्होंने बताया कि कुंड की ज्यामिति एक विज्ञान है, जो फल देने वाली होती है. इसलिए इसके निर्माण में लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई और गहराई का विशेष ध्यान दिया जाता है. शास्त्री पद्धति से आठों दिशाओं में आठ कुंड बनाए जाएंगे. पूर्व में सर्व सिद्धि दायक चौकोर कुंड, आग्नेय में पुत्र प्राप्ति और कल्याण के लिए योनि कुंड, दक्षिण में कल्याणकारी अर्धचंद्राकार, नैऋत्य में शत्रु नाश के लिए त्रिकोण, पश्चिम में शांति-सुख के लिए वृत्ताकार, वायव्य में मारण और उच्छेद के लिए षडस्त्र कुंड, उत्तर में वर्षा के लिए पद्म कुंड, ईशान में आरोग्य के लिए अष्टासत्र कुंड और ईशान और पूर्व के बीच के सभी सुखों की प्राप्ति के लिए आचार्य कुंड का निर्माण किया जाएगा.
कुंड की लंबाई और चौड़ाई साढे 25 इंच की होगी
पंडित दत्तात्रेय ने आगे बताया कि प्रत्येक कुंड में तीन सीढियां होगी, जो ऊपर की सफेद सीढ़ी विष्णु के लिए, बीच की लाल सीढ़ी ब्रह्मा और अंतिम काली सीढ़ी भगवान रुद्र के आह्वान के लिए बनाई जाएगी. कुंड की लंबाई और चौड़ाई साढे 25 इंच की होगी और उसकी गहराई भी साढ़े 25 इंच की होगी. तीन सीढ़ियां चार-चार इंच की होगी. शास्त्र संवत तरीके से कुंड के पूरे पांच अंग बनाए जाएंगे.
निर्माण सामग्री को लेकर सहयोगी ने कही ये बात
कुंड के निर्माण सामग्रियों के बारे में सहयोगी अनुपम दीक्षित ने बताया कि निर्माण सामग्री में ईंट, बालू, मिट्टी, गोबर, पंचगव्य और सीमेंट का उपयोग किया जाएगा. कुंड का अलग-अलग आकार भले रहेगा, लेकिन उनका क्षेत्रफल एक जैसा ही रहेगा.