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UP निकाय चुनाव: रिजर्वेशन तय करने 23 जनवरी को गोरखपुर आएंगे OBC आयोग के सदस्य

उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने की कवायद शुरू हो गई है. ओबीसी आयोग के सदस्य 23 जनवरी को गोरखपुर आएंगे. वहां आयोग के सदस्य, मंडल के जिला अधिकारियों और मंडल आयुक्त के साथ बैठक करेंगे. इस दौरान ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए चर्चा की जाएगी. यूपी सरकार की ओर से एक कमेटी गठित की गई है.

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सांकेतिक तस्वीर.
सांकेतिक तस्वीर.

उत्तर प्रदेश सरकार ने नगर निकाय चुनाव को लेकर ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए एक आयोग गठित किया है. इसी सिलसिले में आयोग के सदस्य 23 जनवरी को गोरखपुर आएंगे. वे यहां एनेक्सी भवन में गोरखपुर मंडल के सभी जिलों के जिलाधिकारियों और मंडल आयुक्त के साथ बैठक करेंगे. इससे पहले कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण तय करने के निर्देश दिए थे.

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ओबीसी आयोग के सदस्य 23 जनवरी को सुबह 10 बजे दो दिवसीय दौरे पर गोरखपुर पहुंचेंगे. आयोग के अध्यक्ष जस्टिस राम औतार सिंह के नेतृत्व में सदस्य चोब सिंह वर्मा, महेंद्र कुमार, बृजेश कुमार सोनी, संतोष कुमार विश्वकर्मा गोरखपुर आ रहे हैं. एनेक्सी भवन में दोपहर एक बजे से मंडल के जिले गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महाराजगंज के जिलाधिकारी व अन्य अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे. जिला प्रशासन आयोग की बैठक की तैयारियों में जुट गया है.

बैठक में गोरखपुर नगर निगम के नगर आयुक्त, सभी नगर पालिकाओं व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारी, संचालन समिति के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहेंगे. आयोग के सदस्य अगले दिन 24 जनवरी को नगर निगम समेत विभिन्न नगर पंचायत क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे और पिछड़ा वर्ग की वास्तविक संख्या की जानकारी जुटाएंगे. आरक्षण का निर्धारण कर आयोग को 31 मार्च तक अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे.

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इस संबंध में एडीएम प्रशासन पुरुषोत्तम दास गुप्ता ने बताया कि 23 जनवरी को होने वाली बैठक में रैपिड सर्वे को लेकर चर्चा की जा सकती है. सभी जिलों को नगर निकायों के निर्वाचन से जुड़ी सभी सूचनाएं भी आयोग के सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत करनी होंगी. अन्य पिछड़ा वर्ग की राजनीतिक भागीदारी, निकायों की कुल जनसंख्या और अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या से संबंधित सूचनाएं भी उपलब्ध करानी होंगी. 

एडीएम प्रशासन ने बताया कि जिले में अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या के संबंध में सर्वे कराकर नवीनतम आंकड़े आयोग को उपलब्ध कराने के लिए भी एक समिति बनाई गई है. समिति आयोग उपलब्ध कराने के लिए भी एक समिति बनाई गई है. समिति आयोग को आंकड़े उपलब्ध कराएगी जिसका सत्यापन आयोग करेगा.

क्या है ये पूरा मामला? 

बता दें कि पिछले साल 27 दिसंबर को हाई कोर्ट से योगी सरकार को बड़ा झटका लगा था. तब कोर्ट ने राज्य सरकार की उस ओबीसी सूची को खारिज कर दिया था जिसके दम पर निकाय चुनाव करवाने की तैयारी थी. हाई कोर्ट ने साफ कहा था कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के नियमों का पालन नहीं किया और उसके बिना ही चुनाव की घोषणा की गई. तब कोर्ट ने सरकार को ये भी कहा था कि वो बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव करवा सकती है. उसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. वहां सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी. सुप्रीम कोर्ट ने जिन निकायों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, उनके कामकाज के लिए विशेष समिति बनाने की बात भी कही है.

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(रिपोर्ट- विनीत पांडेय)

 

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