उमेशपाल हत्याकांड के बाद से फरार अतीक अहमद के खास गुर्गे बमबाज गुड्डू मुस्लिम को लेकर एसटीएफ ने बड़ा खुलासा किया है. एसटीएफ का दाव है कि गुड्डू मुस्लिम की तलाश तेज कर दी गई है. वह अब अतीक के विरोधी गैंग के संपर्क में आ गया है. अतीक और अशरफ की हत्या के बाद पुलिस और एसटीएफ का पूरा फोकस अब गुड्डू मुस्लिम, 50 हजार की इनामी अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन, साबिर और अरमान की तलाश पर हो गया है.
गुड्डू मुस्लिम सुपारी किलर भी है. वह कई साल से सुपारी लेकर हत्या कर रहा था. वह 1999 में पटना की बेउर जेल से तब पकड़ा गया था, वह वह जेल में बंद माफिया राजन तिवारी से किसी की हत्या की सुपारी लेने की बात करने गया था. उसे एनडीपीएस एक्ट में दस साल की सजा हुई थी. बाद में अतीक ने उसकी हाई कोर्ट से जमानत करा ली थी. वह कई बार इस तरह की फरारी काट चुका है. STF के मुताबिक गुड्डू आदतन और अकेले अपराध करने वाला है.
पिछले दिनों उत्तर प्रदेश पुलिस के स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के चीफ अमिताभ यश ने आजतक से बात करते हुए बताया था,'मैंने उमेशपाल हत्या वीडियो के सीसीटीवी फुटेज में उसे तुरंत पहचान लिया था. वह एक पेशेवर किलर है, जिसे पकड़ना जरूरी है. वह अकेले ही किसी भी अपराध को अंजाम देने में माहिर है. मेरा गुड्डू मुस्लिम से पहले भी पाला पड़ चुका है. वह नारकोटिक्स मामले में 1999 में पकड़ा गया था. उस समय अतीक ने अपने वकीलों की मदद से इसकी जमानत करवाई थी.'
मुख्तार, धनंजय, अभय सिंह गैंग से हैं संपर्क
गुड्डू मुस्लिम को श्रीप्रकाश शुक्ल की परछाईं माना जाता था. गुड्डू मुस्लिम ने माफिया सरगना मुख्तार अंसारी के लिए बम बनाए. धनंजय सिंह और अभय सिंह के गैंग में गुड्डू मुस्लिम को अच्छा काम मिला. दो दशक तक गुड्डू मुस्लिम पूर्वी उत्तर प्रदेश के गैंग में नामी बना रहा. 1997 में गुड्डू ने गेम टीचर फैड्रिक्स जे गोम्स की हत्या की थी.
1999 में जब गुड्डू गिरफ्तार हुआ, तब जेल से निकलवाने में अतीक ने उसकी मदद की. जेल से बाहर आने के बाद वह अतीक का गुर्गा बन गया. गुड्डू के जरिए अतीक के रिश्ते भी बिहार के माफियाओं से बने. गुड्डू ने अतीक के कई गुनाहों में अहम रोल निभाया. इसके बाद वह अतीक का करीबी बन गया.
कर्नाटक में मिली है गुड्डू की आखिरी लोकेशन
गुड्डू मुस्लिम की तलाश में एसटीएफ की कई टीमें लगी हैं. इसी बीच कर्नाटक में उसकी लास्ट लोकेशन मिली है. वहीं उमेश पाल हत्याकांड के बाकी शूटर साबिर और अरमान की तलाश भी तेज है. हालांकि अभी तक इन दोनों का सुराग नहीं मिला है, लेकिन कई तरह की चर्चा है. पुलिस के सूत्र दबी जुबां पर कुछ ऐसी बातें भी कर रहे हैं, जो चौंकाती है. चर्चा है कि साबिर और अरमान पुलिस के लिए मुखबिरी कर रहे और इन दोनों से ही असद का पता मिला था.
15 साल की उम्र में जुर्म की दुनिया में रखा कदम
गुड्डू मुस्लिम को बम बनाने का एक्सपर्ट माना जाता है. गुडडू मुस्लिम पर अतीक और अशरफ सबसे ज्यादा भरोसा करते थे. गुड्डू मुस्लिम पहले अतीक के गैंग में नहीं था. महज़ 15 साल की उम्र में उसने छोटी-मोटी चोरियों से अपराध की दुनिया में कदम रखा. वह धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश- बिहार के कई गिरोहों में बमबाज के नाम से जाना जाने लगा था.