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बाबा को लाल पसंद है... केवल कुंवारी लड़कियों को ही अपनी शिष्या बनाता था नारायण साकार हरि 

नारायण साकार हरि के सत्संग में जाने वाली महिलाओं ने बाबा को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. उनका कहना है कि बाबा को लाल रंग पसंद हैं और वो सिर्फ कुंवारी लड़कियों को ही अपनी शिष्या बनाते हैं. इन लड़कियों को आयोजन समिति की ओर से लाल ड्रेस दी जाती हैं, जिसे पहनकर ही लड़कियां सत्संग में जाती हैं और डांस करती हैं.

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नारायण साकार हरि के बारे में सत्संग में जाने वाली महिलाओं ने किए खुलासे
नारायण साकार हरि के बारे में सत्संग में जाने वाली महिलाओं ने किए खुलासे

हाथरस में जिस सूरज पाल उर्फ नारायण साकार हरि के सत्संग में भगदड़ मची थी, उससे जुड़े हर दिन चौंकाने वाले नए खुलासे हो रहे हैं. अब सामने आया है कि सत्संग में बाबा हमेशा कुंवारी लड़कियों से घिरा रहता था. उसे लाल रंग पसंद था, इसलिए इन लड़कियों को सत्संग के दौरान आयोजन समिति की ओर से स्पेशल लाल पौशाक दी गई थी. ये खुलासा सूरज पाल के सत्संग में जाने वाली महिलाओं ने किया है.  

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महिलाओं ने बताया कि लड़कियां वही पोशाक पहनकर सत्संग में जाती थीं और नृत्य करती थीं. उन्होंने बताया कि सत्संग के दौरान बाबा हमेशा काला चश्मा पहना करता था. उन लड़कियों को सूरज पाल के चश्मे में भगवान का रूप दिखता था. इतना ही नहीं, जो महिलाएं सत्संग में जाती थीं, उन्होंने कई ऐसे खुलासे किए, जिनके बारे में वे कमरे में भी बताने से झिझकती थीं. एक महिला ने बताया कि सूरजपाल के आसपास हमेशा रहने वाली कुंवारी लड़कियां उसे अपना पति मानती थीं और उसी तरह उसके साथ रहती थीं. ये लड़कियां उसका सम्मान करती थीं और उसकी एक पुकार पर कुछ भी करने को तैयार रहती थीं.   

'महिलाओं को देखकर मुस्कुराता था सूरज पाल' 

सत्संग में जाने वाली महिला ने बताया कि सूरज पाल सत्संग के दौरान सभी महिलाओं को एक जैसे कपड़े पहने हुए देखता था और वह सत्संग के दौरान उन महिलाओं को देखकर मुस्कुराता रहता था. दीक्षा लेने वाली महिलाएं हमेशा सूरजपाल के आसपास ही रहती थीं. उस समय सूरजपाल चश्मा पहनते थे.  

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कुंवारी लड़कियों को ही शिष्या बनाता था सूरज पाल 

इसके अलावा सूरज पाला के एक अनुयायी ने बताया कि बाबा के आश्रम और संस्थान में महिलाओं की अलग-अलग श्रेणियां तय थीं. कुंवारी लड़कियां ही सूरजपाल की शिष्याएं थीं. इसके लिए लड़कियों को बाबा से विशेष दीक्षा लेनी पड़ती थी. वहीं सुहागिन महिलाओं को सूरजपाल में भोले बाबा के दर्शन होते थे. उन्हें सूरज पाल से दूर रखा जाता था, वह शादीशुदा महिलाओं को अपने पास नहीं आने देता था.  

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'बाबा को लाल रंग पसंद है...' 

सूरजपाल के सत्संग में जाने वाली महिला ने बताया कि बाबा को लाल रंग पसंद था. इसीलिए कुंवारी लड़कियां लाल पोशाक पहनती थीं. गहनों के अलावा श्रृंगार करके वे सत्संग में बाबा के पास और उनके इर्द-गिर्द नाचती थीं. यह विशेष पोशाक सत्संग समिति की ओर से कुंवारी कन्याओं को दी गई थी. डांस करने के बाद लड़कियां अपनी ड्रेस बदल लेती थीं. ये सब काम तो सत्संग के दौरान ही चलता था. 

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'बाबा का डेली रूटीन संभालती थीं लड़कियां' 

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बाबा के आश्रम के आसपास के इलाके में रहने वाले लोगों ने बताया कि उसका पूरा कामकाज लड़कियां संभालती थीं. बाबा लड़कियों द्वारा तैयार किए गए विशेष नीम के पानी से स्नान करते थे. पानी में गुलाब की पंखुड़ियां, खुशबू, परफ्यूम आदि कई चीजें मिलाई जाती थीं. इतना ही नहीं, लड़कियां हमेशा बाबा को खाना खिलाती थीं और उनके आसपास ही रहती थीं. 

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