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Hathras Stampede में मारे गए सभी 121 शवों की पहचान पूरी, वीडियो कॉल के जरिए हुई आखिरी डेड बॉडी की शिनाख्त

अधिकारियों के अनुसार, भगदड़ के बाद 21 शवों को आगरा, 28 को एटा, 34 को हाथरस और 38 को अलीगढ़ ले जाया गया. फिलहाल, सभी शवों की पहचान कर ली गई है और उन्हें संबंधित परिवारों को सौंप दिया गया है.

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हाथरस अस्पताल के बाहर शवों के ढेर
हाथरस अस्पताल के बाहर शवों के ढेर

हाथरस भगदड़ के सभी पीड़ितों के शवों की पहचान कर ली गई है और उन्हें उनके परिवारों को सौंप दिया गया है. जिला मजिस्ट्रेट आशीष कुमार ने गुरुवार को यह जानकारी दी है. दरअसल, बीते मंगलवार को प्रवचनकर्ता 'भोले बाबा' के सत्संग में मची भगदड़ में कुल 121 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं. हादसे में 31 घायल भी हुए थे. अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है. 

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अधिकारियों के अनुसार, भगदड़ के बाद 21 शवों को आगरा, 28 को एटा, 34 को हाथरस और 38 को अलीगढ़ ले जाया गया. जिला मजिस्ट्रेट आशीष कुमार ने गुरुवार को न्यूज एजेंसी को बताया, "सभी शवों की पहचान कर ली गई है और उन्हें संबंधित परिवारों को सौंप दिया गया है."

बकौल जिला मजिस्ट्रेट- आखिरी शव की पहचान पीड़ित के परिवार ने वीडियो कॉल के जरिए की. वे अलीगढ़ अस्पताल (शव लेने) जा रहे हैं. बुधवार तक अज्ञात तीन शवों में से दो की पहचान देर रात और एक की पहचान गुरुवार सुबह की गई.  
  
भगदड़ से बमुश्किल एक हफ़्ते पहले ही हाथरस डीएम के पद पर नियुक्त हुए 2015 बैच के आईएएस अधिकारी आशीष कुमार ने कहा कि अब किसी के लापता होने की कोई रिपोर्ट नहीं है. हमने कार्यक्रम (सत्संग) में गए और वापस लौटे लोगों की संख्या गिनने के लिए जिला प्रशासन के कर्मियों को तैनात किया था. 

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रोते-बिलखते परिजन

मजिस्ट्रेट ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है. वहीं, प्रदेश सरकार ने बुधवार को हाथरस त्रासदी की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया, जो इस संभावना की भी जांच कर रहा है कि भगदड़ के पीछे कोई 'साजिश' तो नहीं थी. जांच पैनल दो महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा. 

उधर, पुलिस ने हाथरस के फुलहारी गांव के पास 'सत्संग' के आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिसमें उन पर 2.5 लाख लोगों को कार्यक्रम स्थल पर इकट्ठा करने का आरोप लगाया गया है, जबकि उन्हें केवल 80,000 लोगों के लिए अनुमति मिली थी. मंगलवार देर रात सिकंदरा राऊ थाने में दर्ज एफआईआर में 'मुख्य सेवादार' देवप्रकाश मधुकर और अन्य आयोजकों को आरोपी बनाया गया है. हालांकि, 'भोले बाबा' कहे जाने वाले उपदेशक का नाम एफआईआर की लिस्ट में नहीं है. 

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को हाथरस का दौरा किया और घायलों से मुलाकात की. मीडिया के सामने उन्होंने कहा कि जो भी इसके लिए जिम्मेदार होगा, वह जांच के दायरे में आएगा, और उसपर एक्शन लिया जाएगा. 

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