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नीलकंठ महादेव मंदिर पर बनी ​है बदायूं की शम्सी शाही मस्जिद? जानें क्या कहते हैं ऐतिहासिक दस्तावेज

शम्सी शाही मस्जिद के नीचे नीलकंठ महादेव मंदिर होने का दावा करने वाले याचिकाकर्ताओं ने जो अन्य प्रमाण पेश किए हैं, उनमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का संस्मरण 'बदायूं में जामा मस्जिद और संयुक्त प्रांतों में अन्य इमारतें' भी शामिल है. इसमें कहा गया है कि बदायूं जामा मस्जिद में इस्तेमाल किए गए बलुआ पत्थर के ब्लॉक प्राचीन हिंदू मंदिरों से लूटे गए प्रतीत होते हैं.

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बदायूं की शम्सी जामा मस्जिद में हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने की इजाजत देने को लेकर कोर्ट में याचिका दायर. (PTI Photo)
बदायूं की शम्सी जामा मस्जिद में हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने की इजाजत देने को लेकर कोर्ट में याचिका दायर. (PTI Photo)

बदायूं की जामा मस्जिद जिसे शम्सी शाही मस्जिद के नाम से भी जाना जाता है, अब एक विवादास्पद बहस के केंद्र में आ गई है. हिंदू याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इस मस्जिद का निर्माण नीलकंठ महादेव मंदिर के ऊपर किया गया है. इस दावे ने भारत के मध्यकालीन इतिहास के बारे में फिर से चर्चा शुरू कर दी है. इस विवाद को समझने के लिए, शम्सी शाही मस्जिद के नीचे नीलकंठ महादेव मंदिर होने का दावा करने वालों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे विभिन्न ऐतिहासिक साक्ष्यों पर विचार करना महत्वपूर्ण है. 

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गजेटियर आफ इंडिया, उत्तर प्रदेश, डिस्ट्रिक्ट बदायूँ में लिखा है- 'शम्सी शाही मस्जिद का निर्माण एक पुराने पत्थर के मंदिर की जगह पर किया गया था, इस मस्जिद के निर्माण के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री किसी नष्ट हुए मंदिर की प्रतीत होती है. सबसे पुरानी मुस्लिम इमारत संभवतः शम्स-उद-दीन इल्तुतमिश की ईदगाह है, जो 1202 से 1200 ईस्वी तक बुदईई का पहला गवर्नर था. इसके अवशेष पुराने शहर के पश्चिमी बाहरी इलाके से लगभग 2 किमी की दूरी पर हैं. इसमें 91.4 मीटर लंबी एक विशाल ईंट की दीवार शामिल है.'

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गजेटियर में आगे लिखा है, 'बदायूं पर इल्तुतमिश ने अपनी स्पष्ट छाप छोड़ी. पुराने शहर के ऊंचे हिस्से में, मौलवी टोला मुहल्ला में जामा मस्जिद के निर्माण की जिम्मेदारी उसकी थी. ऐसा कहा जाता है कि इसे एक पुराने पत्थर के मंदिर की जगह पर बनाया गया था. इस मस्जिद के निर्माण के लिए इस्तेमाल की गई सामग्री किसी नष्ट हुए मंदिर का प्रतीत होती है. मस्जिद की चौड़ाई उत्तर से दक्षिण तक लगभग 85.3 मीटर है और पश्चिमी बाहरी दीवार के सामने से पूर्वी द्वार के सामने तक लगभग 09 मीटर है. इस प्रकार आकार के मामले में यह मस्जिद जौनपुर की मस्जिदों को टक्कर देती है और उत्तरी भारत की सबसे बड़ी मुस्लिम इमारतों में से एक है. मस्जिद की दीवारें पूर्व, उत्तर और दक्षिण में 5.5 मीटर की  चौड़ाई में मेहराबदार आकार वाली हैं. पश्चिम में एक गहरा मेहराब है, जिसके दोनों ओर दो छोटे नक्काशीदार खंभे हैं, जो पुराने हिंदू मंदिर से लिए गए थे.'

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शम्सी शाही मस्जिद के नीचे नीलकंठ महादेव मंदिर होने का दावा करने वाले याचिकाकर्ताओं ने जो अन्य प्रमाण पेश किए हैं, उनमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का संस्मरण 'बदायूं में जामा मस्जिद और संयुक्त प्रांतों में अन्य इमारतें' भी शामिल है. इसमें कहा गया है कि बदायूं जामा मस्जिद में इस्तेमाल किए गए बलुआ पत्थर के ब्लॉक प्राचीन हिंदू मंदिरों से लूटे गए प्रतीत होते हैं. एएसआई के मेम्वायर में लिखा है, 'बदायूं की जामी मस्जिद सबसे प्राचीन में से एक होने के अलावा, भारत की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है. लगभग 12 फीट की ऊंचाई तक मस्जिद का निर्माण पूरी तरह से प्राचीन हिंदू मंदिरों से लूटे गए बलुआ पत्थर के ब्लॉक से किया गया है. इसके दोनों ओर छोटे खंभे लगे हैं, जो किसी हिंदू इमारत से लिए गए हैं.'

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'आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया रिपोर्ट ऑफ ए टूर इन द गैंगेटिक प्रोविंसेज 1875-76 एंड 1877-78' के अनुसार, 'कहा जाता है कि महिपाल ने हरमंदर नाम का एक मंदिर भी बनवाया था, जिसे मुस्लिमों ने नष्ट कर दिया था और वर्तमान जामा मस्जिद उसके स्थान पर बनाई गई है.'

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