पिछले 4 महीने से डीजीपी मुख्यालय में तैनात IPS डीके ठाकुर और विजय सिंह मीणा को नई जिम्मेदारी मिल गई है. योगी सरकार ने डीके ठाकुर को पुलिस भर्ती बोर्ड का ADG और विजय सिंह मीणा को विशेष जांच प्रकोष्ठ का ADG बनाया गया है. दोनों को 1 अगस्त 2022 को कमिश्नर के पद से हटाकर डीजीपी मुख्यालय में संबद्ध किया गया था.
डीजीपी मुख्यालय में संबद्धता से पहले डीके ठाकुर लखनऊ में कमिश्नर थे. वहीं, विजय सिंह मीणा के पास कानपुर में कमिश्नर के तौर पर जिम्मेदारी थी. सोमवार को 16 आईपीएस अफसरों की तैनाती की गई. दो एडीजी रैंक के अधिकारियों को डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध किया गया. इसमें नोएडा से हटाए गए पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह और वाराणसी से हटाए गए पुलिस कमिश्नर सतीश गणेश शामिल हैं.
IPS डीके ठाकुर और विजय सिंह मीणा को मोहर्रम के मौके पर कमिश्नर के पद से हटाकर डीजीपी कार्यालाय में संबद्ध किया गया था. डीके ठाकुर 1 साल 8 महीने तक लखनऊ के पुलिस कमिश्नर रहे. उनको अचानक शासन ने हटा दिया और उनकी जगह पर 93 बैच के आईपीएस अफसर और एडीजी इंटेलीजेंस एसबी शिरोडकर को लखनऊ का नया पुलिस कमिश्नर बनाया था.
उस समय यह बात सामने आई थी कि लखनऊ-कानपुर हाईवे पर अचानक रात के समय लंबा जाम लग गया था. घंटों गाड़ियां बंथरा बॉर्डर पर फंसी रहीं. लोगों ने सोशल मीडिया पर जाम की शिकायत की थी, जिस पर डीजीपी डीएस चौहान ने नाराजगी जताई और एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार को मौके पर भेजा था. प्रशांत कुमार ने घंटों की मशक्कत के बाद ट्रैफिक डायवर्जन कर, रविवार सुबह तक ट्राफिक नॉर्मल करा दिया था. माना गया कि ट्रैफिक जाम लखनऊ पुलिस कमिश्नर के हटने का तात्कालिक कारण बना.
कानपुर के पुलिस कमिश्नर रहे विजय सिंह मीणा को पुलिस कमिश्नर असीम अरुण के वीआरएस लेने के बाद चुनावी माहौल में भेजा गया था. चुनाव आयोग को तीन सीनियर अफसरों की लिस्ट भेजी गई थी, जिसमें विजय सिंह मीणा का नाम सबसे ऊपर था और वह कानपुर के पुलिस कमिश्नर बना दिए गए थे. लेकिन उनकी तैनाती के बाद चर्चा तेज हो गई कि वह सपा के खेमे के अफसर हैं. सपा सरकार में वे यूपी के तमाम जिलों में डीआईजी और आईजी रहे. कानपुर पुलिस कमिश्नर के हटने का भी तत्कालिक कारण लखनऊ-कानपुर रोड पर लगा ट्रैफिक जाम ही माना गया.