यूपी के कानपुर देहात में एक अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान कथित तौर पर आत्मदाह के बाद पुलिस ने इस मामले में एक एसडीएम, चार राजस्व अधिकारियों और एक दर्जन से अधिक पुलिस कर्मचारियों समेत 39 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. आईजी (कानपुर रेंज) प्रशांत कुमार ने बताया कि इस मामले में एसडीएम (मैथा) ज्ञानेश्वर प्रसाद को भी निलंबित कर दिया गया है. पीड़ित परिवार की तरफ से दर्ज कराई गई एफआईआर की जांच अकबरपुर के इंस्पेक्टर को सौंप दी गई है.
कानपुर देहात के एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने कहा कि अब तक लेखपाल अशोक सिंह और बुलडोजर चलाने वाले दीपक को गिरफ्तार किया गया है. आईजी प्रशांत कुमार ने न्यूज एजेंसी को बताया कि एफआईआर में हत्या, हत्या के प्रयास के अलावा मवेशियों को मारने और अपंग बनाने की कोशि, घर को नष्ट करने के इरादे से आग लगाने समेत कई आरोप लगाए गए हैं. उन्होंने कहा कि पीड़ितों के घर को गिराने में इस्तेमाल किया गया बुलडोजर जब्त कर लिया गया है.
पीड़ित परिवार जब शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सौंपने से इनकार कर रहे थे तो डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने पीड़ितों से वीडियो कॉल के जरिए बात की. उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर गौर किया जाएगा. उसके बाद पीड़ित परिवार ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए सौंप दिया. इस घटना के बाद गांव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार की "सत्ता का अहंकार" और "असंवेदनशीलता" इस घटना के लिए जिम्मेदार है. वहीं पीड़ित परिवार से मिलने वालीं यूपी की महिला कल्याण राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने जिले के अधिकारियों को इसके लिए दोषी ठहराया. उन्होंने कहा कि लेखपाल से लेकर जिलाधिकारी तक दोषी अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा.
प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बहुत संवेदनशील हैं और वह सुनिश्चित करेंगे कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ बहुत जल्द सख्त कार्रवाई शुरू की जाए. शुक्ला ने कहा कि सीएम ने मुझे पीड़ित परिवार से मिलने और घटना का जायजा लेने के लिए कहा था. मंत्री ने कहा कि वह करीब एक महीने पहले पीड़ितों से मिली थीं, जब उनका घर तोड़ा जा रहा था और उन्हें इस बात का अफसोस है कि वह उन दो महिलाओं को नहीं बचा सकीं, जो उनके 'परिवार के सदस्य' जैसी थीं.
मंत्री ने कहा, "मैंने जिलाधिकारी नेहा जैन से बात की, जिन्होंने मुझे आश्वासन दिया कि वह इस मामले को व्यक्तिगत रूप से देखेंगी और परिवार को न्याय दिलाने में मदद करेंगी." प्रतिभा शुक्ला ने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार की मदद के बजाय डीएम ने उन्हें बाहर निकाल दिया था और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई.
आईजी प्रशांत कुमार के अनुसार, परिवार और गांव वालों की मांग थी कि सीएम योगी उनसे बात करें और पीड़ित परिवार को कम से कम 5 करोड़ रुपये का मुआवजा व सरकारी नौकरी दें. डिप्टी सीएम पाठक ने पीड़ितों से बात करते हुए कहा कि ये बेहद दुखद है. आरोपियों के खिलाफ हत्या के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है. उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की जाएगी और दोषियों को ऐसी सजा दी जाएगी कि उनकी पीढ़ियां इसे याद रखेंगी."
आईजी बोले- दोषियों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई
आईजी कुमार ने कहा कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें थाना प्रभारी (ग्रामीण) दिनेश गौतम भी शामिल हैं, जिन्हें जल्द ही निलंबित किया जा सकता है. गौतम के अलावा मैथा के एसडीएम, जेसीबी चालक दीपक, मदौली के लेखपाल (राजस्व अधिकारी) अशोक सिंह, तीन अज्ञात लेखपाल, एक अनाम कानूनगो (राजस्व अधिकारी) और 12-15 पुलिस कर्मियों पर मामला दर्ज किया गया है.
राहुल और अखिलेश ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर सत्तारूढ़ बीजेपी पर हमला बोला. उन्होंने ट्वीट कर कहा, "जब सत्ता का अहंकार लोगों के जीने के अधिकार को छीन लेता है, तो इसे तानाशाही कहते हैं." पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, "यह 'बुलडोजर नीति' इस सरकार की क्रूरता का चेहरा बन गई है. भारत इसे स्वीकार नहीं करता है."
वहीं समाजवादी पार्टी ने इस घटना के लिए "असंवेदनशील" प्रशासन को दोषी ठहराया और पीड़ितों के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिए समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल को गांव जाने से रोकने के लिए सरकार पर निशाना साधा. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गांव में तनाव के कारण उन्हें रोक दिया गया.
सपा और कांग्रेस ने सरकार को घेरा
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के पीड़ित परिवार से बात करने का वीडियो समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, जिन्होंने आरोप लगाया कि सहानुभूति के शब्द केवल दिखावे के लिए हैं. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.
बता दें कि जब राजस्व विभाग की टीम रूरा क्षेत्र के मड़ौली गांव में अतिक्रमण हटाने पहुंची तो प्रमिला दीक्षित (45) और उनकी बेटी नेहा (20) ने कथित तौर पर पुलिस, जिला प्रशासन और राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में एक झोपड़ी में खुद को आग लगा ली.
प्रमिला के बेटे के खिलाफ दर्ज हुई थी शिकायत
कानपुर देहात के एसपी ने बताया कि विशाल दीक्षित ने प्रमिला दीक्षित के बेटे शिवम दीक्षित के खिलाफ ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी. जिसके बाद एसडीएम ज्ञानेश्वर प्रसाद के नेतृत्व में जिला प्रशासन की टीम वहां अतिक्रमण हटाने के लिए गई थी. एसपी ने कहा कि अतिक्रमण को बुलडोजर से हटाया जा रहा था, तभी मां-बेटी ने खुद को आग लगा ली.